Pakistan: पाकिस्तान के डिफॉल्टर होने का और बढ़ा अंदेशा, भारी पड़ रही है सियासी अस्थिरता
Pakistan: खबरों के मुताबिक आर्थिक क्षेत्रों में इस बात से काफी बेचैनी है कि जब देश का आर्थिक संकट लगातार गहराता जा रहा है, जब देश के राजनेता अन्य प्रश्नों पर तू तू-मैं मैं में जुटे हुए हैं। बाजार विशेषज्ञों ने एएचएल की रिपोर्ट को देश के लिए एक कड़ी चेतावनी बताया है...
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पाकिस्तान के डिफॉल्टर (कर्ज चुकाने में अक्षम) होने का अंदेशा बहुत बढ़ गया है। ब्रोकरेज फर्म आरिफ हबीब लिमिटेड (एएचएल) के आकलन के मुताबिक बीते 11 नवंबर को ये जोखिम 64.19 फीसदी तक पहुंच गया। पिछले पांच साल में क्रेडिट डिफॉर्ट स्वैप (सीडीएस) इंडेक्स पर पाकिस्तान की स्थिति इतनी खराब कभी नहीं हुई थी।
पर्यवेक्षकों के मुताबिक एक प्रमुख ब्रोकरेज फर्म का ये आकलन ने शहबाज शरीफ सरकार के लिए तगड़ा झटका है। पाकिस्तान पर डिफॉल्टर होने का खतरा लंबे समय से मंडरा रहा है। इसमें लगातार हो रही बढ़ोतरी को सरकार की बड़ी नाकामी माना जा रहा है। आलोचकों का कहना है कि इस खतरे से देश को उबारने के लिए दिन-रात एक करने के बजाय शरीफ सरकार सियासी मुद्दों से उलझी हुई है। उसकी प्रमुख चिंता अगले आम चुनाव तक कुर्सी पर बने रहने की रही है।
इस बीच नए सेनाध्यक्ष की नियुक्ति के सवाल पर पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान ने एक नया दांव चल कर सरकार की उलझन बढ़ा दी है। खान ने अचानक अपना रुख बदलते हुए बुधवार को कहा कि वे अब चुप रहते हुए इस देखेंगे कि पाकिस्तान डेमोक्रेटिक मूवमेंट (पीडीएम) गठबंधन की सरकार किसे नया सेनाध्यक्ष बनाती है। लेकिन इसके साथ ही उन्होंने पीडीएम की प्रमुख पार्टी पाकिस्तान मुस्लिम लीग (एन) के सुप्रीमो नवाज शरीफ पर कटाक्ष करते हुए कहा कि वे ऐसे अफसर को सेनाध्यक्ष बनाना चाहते हैं, जो उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करे। पत्रकारों से बातचीत करते हुए पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) के अध्यक्ष इमरान खान ने कहा- ‘नवाज ऐसा सेनाध्यक्ष चाहते हैं, जो उनके हितों की रक्षा करे। लेकिन कोई सेनाध्यक्ष राष्ट्र-हित के खिलाफ नहीं जाएगा। इसलिए सरकार जो चाहे, करे।’
खबरों के मुताबिक आर्थिक क्षेत्रों में इस बात से काफी बेचैनी है कि जब देश का आर्थिक संकट लगातार गहराता जा रहा है, जब देश के राजनेता अन्य प्रश्नों पर तू तू-मैं मैं में जुटे हुए हैं। बाजार विशेषज्ञों ने एएचएल की रिपोर्ट को देश के लिए एक कड़ी चेतावनी बताया है। एक विश्लेषक ने अपना नाम न छापने की शर्त पर वेबसाइट बिजनेसरिकॉर्डर.कॉम से कहा- ‘पाकिस्तान के कर्ज बीमा की रकम बढ़ रही है, इसका अर्थ है कि देश के डिफॉल्टर होने की आशंका गहरा रही है।’
बीते 31 मई को पाकिस्तान पर कुल बाहरी कर्ज और देनदारियां 126.07 बिलियन डॉलर थीं। उपरोक्त विश्लेषक ने कहा- ‘सीडीएस में बढ़ोतरी देश में जारी राजनीतिक अस्थिरता के कारण हुई है। इसके अलावा देश के विदेशी मुद्रा भंडार में गिरावट आ रही है और विदेश में कमाने वाले पाकिस्तानियों से आने वाली रकम घट रही है। इससे देश के लिए सुरक्षित कोष के स्रोत घटे हैं।’
स्टेट बैंक ऑफ पाकिस्तान के आंकड़ों के मुताबिक बीते चार नवंबर तक उसके पास 7.96 बिलियन डॉलर की विदेशी मुद्रा ही बची थी। यह सुरक्षित स्तर से बहुत कम है। बाजार विश्लेषकों ने कहा है कि सरकार को तुरंत ऐसे कदम उठाने चाहिए, जिससे विदेशी मुद्रा का बाहर जाना रुके। लेकिन ऐसे कदम उठाने के बजाय सरकार का ध्यान चीन और सऊदी अरब जैसे देशों से और कर्ज लाने पर टिका है। इधर देश के अंदर अस्थिरता का माहौल लगातार बना हुआ है।