Trump: PAK पीएम बोले- अमेरिकी राष्ट्रपति ने 1 करोड़ जानें बचाईं; ट्रंप ने अलापा भारत-पाक संघर्ष रोकने का दावा
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर दावा किया कि उन्होंने भारत-पाकिस्तान के बीच संघर्ष रोका और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री ने 1 करोड़ जानें बचाने के लिए उन्हें धन्यवाद दिया। वहीं भारत ने तीसरे पक्ष की मध्यस्थता से इनकार किया है।
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अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर यह दावा दोहराया है कि उन्होंने भारत और पाकिस्तान के बीच एक बड़े संघर्ष को रोकने में अहम भूमिका निभाई थी। ट्रंप के अनुसार, पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने अमेरिका दौरे के दौरान सार्वजनिक रूप से उन्हें धन्यवाद देते हुए कहा था कि ट्रंप की पहल से कम से कम एक करोड़ लोगों की जान बची।
'पाकिस्तान के प्रधानमंत्री ने किया धन्यवाद'
व्हाइट हाउस में शीर्ष तेल और गैस कंपनियों के अधिकारियों से मुलाकात के दौरान मीडिया से बात करते हुए ट्रंप ने कहा कि भारत और पाकिस्तान के बीच हालात बेहद तनावपूर्ण थे और हालात युद्ध की ओर बढ़ रहे थे। उन्होंने कहा, 'पाकिस्तान के प्रधानमंत्री यहां आए और उन्होंने साफ कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप ने भारत-पाकिस्तान संकट में न्यूनतम दस मिलियन जानें बचाईं।'
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उन्होंने यह भी कहा कि भारत-पाकिस्तान के बीच हालिया तनाव में हालात इतने बिगड़ चुके थे कि दोनों देशों के आठ लड़ाकू विमान हवा में मार गिराए गए, लेकिन उनके हस्तक्षेप से परमाणु युद्ध जैसी स्थिति बनने से पहले ही मामला शांत हो गया। हालांकि, भारत ने इन दावों को लगातार खारिज किया है। भारतीय अधिकारियों का कहना है कि भारत-पाकिस्तान के बीच शांति किसी तीसरे पक्ष की मध्यस्थता से नहीं बल्कि सीधे दोनों देशों के सैन्य संवाद के जरिए हुई।
आठ बड़े युद्धों को रोक- डोनाल्ड ट्रंप
डोनाल्ड ट्रंप ने इस दौरान नोबेल शांति पुरस्कार को लेकर भी बयान दिया। उन्होंने कहा कि वह डींग नहीं हांकना चाहते, लेकिन इतिहास में शायद ही कोई ऐसा व्यक्ति होगा जिसने उनसे ज्यादा युद्ध रुकवाए हों। ट्रंप का दावा है कि उन्होंने आठ बड़े युद्धों को समाप्त कराया, जिनमें कुछ संघर्ष 25 से 36 वर्षों से जारी थे।
भारत के अनुसार, जम्मू-कश्मीर के पहलगाम आतंकी हमले (अप्रैल 2025) में 26 लोगों की मौत के बाद भारत ने ऑपरेशन सिंदूर के तहत पाकिस्तान में आतंकी ठिकानों को निशाना बनाया था। इसके बाद 10 मई को पाकिस्तान के डीजीएमओ ने भारतीय डीजीएमओ से संपर्क कर संघर्षविराम का अनुरोध किया, जिस पर दोनों पक्षों की सहमति बनी। भारत ने साफ किया है कि शांति प्रक्रिया पूरी तरह द्विपक्षीय थी और इसमें किसी विदेशी नेता या देश की भूमिका नहीं रही।
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