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US-Iran War: अमेरिका-ईरान के बीच शांति वार्ता का दूसरा दौर, पाकिस्तान में तैयारी; जंग खत्म करने की होगी कोशिश?
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, इस्लामाबाद
Published by: अमन तिवारी
Updated Fri, 17 Apr 2026 01:19 PM IST
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सार
पाकिस्तान अगले हफ्ते अमेरिका-ईरान के बीच दूसरे दौर की शांति वार्ता करने की तैयारी में है। इसका उद्देश्य पश्चिम एशिया में युद्ध खत्म कर वैश्विक संकट को दूर करना है। फिलहाल दोनों देशों के बीच अस्थायी युद्धविराम लागू है, जिसे स्थायी समझौते में बदलने की कोशिश हो रही है।
अमेरिका, ईरान और इस्राइल का झंडा
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
पाकिस्तान अगले हफ्ते अमेरिका और ईरान के बीच होने वाली दूसरे दौर की महत्वपूर्ण शांति वार्ता की मेजबानी करने की तैयारी कर रहा है। इस बातचीत का मुख्य उद्देश्य पश्चिम एशिया में जारी युद्ध को समाप्त करना है। इस युद्ध ने दुनिया भर में ऊर्जा की आपूर्ति को बुरी तरह प्रभावित किया है।
पिछले हफ्ते हुई पहली सीधी बातचीत बिना किसी समझौते के खत्म हो गई थी। हालांकि, दोनों पक्ष अभी दो हफ्ते के अस्थायी युद्धविराम का पालन कर रहे हैं। यह युद्धविराम 22 अप्रैल को समाप्त होगा। पाकिस्तान इस मौके का फायदा उठाकर दोनों देशों को फिर से बातचीत की मेज पर लाने की कोशिश कर रहा है।
अधिकारिक ने सूत्रों ने शुक्रवार को कहा, दोनों पक्षों को बातचीत की टेबल पर वापस लाने के लिए तेजी से डिप्लोमैटिक काम हुआ। इस शांति प्रक्रिया को सफल बनाने के लिए पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और फील्ड मार्शल आसिम मुनीर काफी सक्रिय हैं। पर्दे के पीछे काम करने के बाद, प्रधानमंत्री ने सऊदी अरब, कतर और तुर्की के नेताओं से बातचीत की है। वहीं, फील्ड मार्शल मुनीर ने तेहरान में ईरान के राजनीतिक और सैन्य नेतृत्व के साथ मुलाकात की। हालांकि, बातचीत के नतीजे के बारे में आधिकारिक तौर पर कुछ नहीं कहा गया है।
ये भी पढ़ें: Indonesia Helicopter crash: इंडोनेशिया के बोर्नियो द्वीप पर हेलीकॉप्टर क्रैश, आठ की मौत; राहत-बचाव कार्य जारी
इस्लामाबाद के अधिकारियों के अनुसार, सुरक्षा के लिहाज से इस्लामाबाद और रावलपिंडी में भारी इंतजाम किए जा रहे हैं। दूसरे प्रांतों से हजारों पुलिस और अर्धसैनिक बलों को बुलाया गया है। पहले दौर की बातचीत में 10,000 से ज्यादा जवान तैनात रहे थे। प्रशासन ने संकेत दिए हैं कि अगले हफ्ते यातायात पर कड़ी पाबंदियां रहेंगी। जरूरत पड़ने पर स्कूल और बाजार भी बंद किए जा सकते हैं।
अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व उपराष्ट्रपति जेडी वेंस कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर असहमति की वजह से पिछला समझौता नहीं हो पाया। दूसरी तरफ, ईरान के प्रतिनिधि मोहम्मद बागेर गालिबाफ ने कहा कि उनकी टीम ने आगे की पहल की, लेकिन दूसरी तरफ की पार्टी इस बातचीत के दौर में ईरानी डेलीगेशन का भरोसा जीतने में नाकाम रही।
इस बीच, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सकारात्मक संकेत दिए हैं। उन्होंने कहा कि अगर इस्लामाबाद में अंतिम समझौता होता है, तो वह वहां जा सकते हैं। ट्रंप ने दावा किया कि ईरान चल रही बातचीत की लगभग सभी शर्तों को मान चुका है। इस दौरान ट्रंप ने उन्होंने पाकिस्तानी नेतृत्व की भी तारीफ की। यह पूरा विवाद 28 फरवरी को अमेरिका और इस्राइल के ईरान पर हमलों के बाद शुरू हुआ था।
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पिछले हफ्ते हुई पहली सीधी बातचीत बिना किसी समझौते के खत्म हो गई थी। हालांकि, दोनों पक्ष अभी दो हफ्ते के अस्थायी युद्धविराम का पालन कर रहे हैं। यह युद्धविराम 22 अप्रैल को समाप्त होगा। पाकिस्तान इस मौके का फायदा उठाकर दोनों देशों को फिर से बातचीत की मेज पर लाने की कोशिश कर रहा है।
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अधिकारिक ने सूत्रों ने शुक्रवार को कहा, दोनों पक्षों को बातचीत की टेबल पर वापस लाने के लिए तेजी से डिप्लोमैटिक काम हुआ। इस शांति प्रक्रिया को सफल बनाने के लिए पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और फील्ड मार्शल आसिम मुनीर काफी सक्रिय हैं। पर्दे के पीछे काम करने के बाद, प्रधानमंत्री ने सऊदी अरब, कतर और तुर्की के नेताओं से बातचीत की है। वहीं, फील्ड मार्शल मुनीर ने तेहरान में ईरान के राजनीतिक और सैन्य नेतृत्व के साथ मुलाकात की। हालांकि, बातचीत के नतीजे के बारे में आधिकारिक तौर पर कुछ नहीं कहा गया है।
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इस्लामाबाद के अधिकारियों के अनुसार, सुरक्षा के लिहाज से इस्लामाबाद और रावलपिंडी में भारी इंतजाम किए जा रहे हैं। दूसरे प्रांतों से हजारों पुलिस और अर्धसैनिक बलों को बुलाया गया है। पहले दौर की बातचीत में 10,000 से ज्यादा जवान तैनात रहे थे। प्रशासन ने संकेत दिए हैं कि अगले हफ्ते यातायात पर कड़ी पाबंदियां रहेंगी। जरूरत पड़ने पर स्कूल और बाजार भी बंद किए जा सकते हैं।
अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व उपराष्ट्रपति जेडी वेंस कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर असहमति की वजह से पिछला समझौता नहीं हो पाया। दूसरी तरफ, ईरान के प्रतिनिधि मोहम्मद बागेर गालिबाफ ने कहा कि उनकी टीम ने आगे की पहल की, लेकिन दूसरी तरफ की पार्टी इस बातचीत के दौर में ईरानी डेलीगेशन का भरोसा जीतने में नाकाम रही।
इस बीच, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सकारात्मक संकेत दिए हैं। उन्होंने कहा कि अगर इस्लामाबाद में अंतिम समझौता होता है, तो वह वहां जा सकते हैं। ट्रंप ने दावा किया कि ईरान चल रही बातचीत की लगभग सभी शर्तों को मान चुका है। इस दौरान ट्रंप ने उन्होंने पाकिस्तानी नेतृत्व की भी तारीफ की। यह पूरा विवाद 28 फरवरी को अमेरिका और इस्राइल के ईरान पर हमलों के बाद शुरू हुआ था।
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