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Israel: PM मोदी और नेतन्याहू के व्यक्तिगत रिश्ते भारत-इस्राइल सहयोग बढ़ाने में अहम, डेनियल रूबेनस्टीन का दावा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, तेल अवीव
Published by: नितिन गौतम
Updated Wed, 25 Feb 2026 01:10 PM IST
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सार
इस्राइली पीएम के पूर्व सलाहकार ने दावा किया है कि पीएम मोदी और इस्राइली पीएम के व्यक्तिगत संबंध दोनों देशों के रिश्तों को बेहतर करने में अहम हैं। उन्होंने कहा कि दोनों नेताओं की मजबूत केमिस्ट्री का असर दोनों देशों के रिश्तों पर सकारात्मक होता है।
इस्राइली पीएम के पूर्व सोशल मीडिया सलाहकार
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इस्राइल दौरे को लेकर इस्राइली पीएम बेंजामिन नेतन्याहू के पूर्व सोशल मीडिया सलाहकार डेनियल रूबेनस्टीन ने प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नेतन्याहू और पीएम मोदी के बीच व्यक्तिगत संबंध बहुत मजबूत और महत्वपूर्ण हैं। डेनियल रूबेनस्टीन ने कहा कि भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की इस्राइल की आगामी यात्रा ऐतिहासिक है। यह पहली बार होगा जब कोई भारतीय प्रधानमंत्री इस्राइली संसद को संबोधित करेंगे। पिछले दशक में, जब पीएम नरेंद्र मोदी ने आखिरी बार इस्राइल का दौरा किया था, तब दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय संबंधों में रक्षा, व्यापार, कृषि, चिकित्सा और पर्यटन जैसे क्षेत्रों में प्रगति हुई है।
दोनों नेताओं के व्यक्तिगत रिश्तों का असर दोनों देशों के रिश्तों पर सकारात्मक
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दोनों नेताओं के व्यक्तिगत रिश्तों का असर दोनों देशों के रिश्तों पर सकारात्मक
- रूबेनस्टीन ने कहा, 'मेरा मानना है कि इस्राइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच व्यक्तिगत संबंध बहुत मजबूत और महत्वपूर्ण हैं, क्योंकि यही संबंध सरकार के हर अन्य स्तर पर रिश्तों की दिशा तय करते हैं। जब हम देखते हैं कि हमारे प्रधानमंत्री बेंजामिन और प्रधानमंत्री मोदी एक-दूसरे के साथ अच्छे संबंध रखते हैं व एक-दूसरे के साथ समय बिताते हुए सहज हैं, तो इसका सकारात्मक प्रभाव पड़ता है।'
- रूबेनस्टीन ने कहा, 'भारत हिंद महासागर के पास स्थित एक लोकतांत्रिक देश है। इस्राइल भूमध्य सागर के पास स्थित एक लोकतांत्रिक देश है और हमारे बीच क्षेत्र में मौजूद पारस्परिक साझेदारों के माध्यम से व्यापार और विकास के अपार अवसर हैं। चाहे वह शिपिंग हो, कनेक्टिविटी हो या कृत्रिम बुद्धिमत्ता, इस्राइल और भारत के बीच व्यापार, सहयोग और आदान-प्रदान की अपार संभावनाएं हैं। मुझे आशा है कि यह यात्रा ऐसे संबंधों की सिर्फ शुरुआत है।'
- डेनियल रूबेनस्टीन ने कहा कि मुझे उन विशिष्ट समझौतों के बारे में जानकारी नहीं है जिन पर चर्चा होगी, लेकिन मैं आपको मौजूदा संभावनाओं के बारे में बता सकता हूं। भारत और इस्राइल दो लोकतांत्रिक राष्ट्र हैं जिनकी पड़ोसियों के साथ तनातनी रहती है, जिसके चलते हमें अपनी रक्षा पर बहुत ध्यान देना पड़ता है। इस्राइल एक छोटा देश है, लेकिन उसका रक्षा क्षेत्र बहुत बड़ा है और मुझे यकीन है कि रक्षा सहयोग पर चर्चा होगी।
- उन्होंने कहा, 'भारत और इस्राइल के बीच मजबूत रक्षा संबंधों के लिए कोई भी नया समझौता हमारे मित्रों और हमारे उन विरोधियों को एक संदेश देगा। जो कोई भी इस्राइल या भारत के साथ अपना सहयोग बढ़ाना चाहता है, उसका स्वागत किया जाएगा और जो कोई हमारे खिलाफ खड़ा होगा, तो उसे उसके परिणाम भुगतने होंगे। मुझे पता है कि भारत और इजरायल के लोग आतंकवाद के खतरे को अच्छी तरह समझते हैं। हमारे दोनों देशों ने हाल के वर्षों में बड़े आतंकवादी हमलों का सामना किया है।'
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