'पीओके आजाद नहीं बल्कि गुलाम कश्मीर': अपने ही बिछाए जाल में फंसा पाकिस्तान, 80 हजार लोगों ने कर दी बगावत
पीओके में हो रहे विरोध प्रदर्शन को नियंत्रित करना पाकिस्तान की सेना और वहां की सरकार के लिए मुश्किल होता जा रहा है। अब तो पीओके के लोगों ने खुलेआम बोलना शुरू कर दिया है कि पीओके कोई आजाद कश्मीर नहीं है बल्कि इस पर पाकिस्तान का कब्जा है।
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पीओके के लोग खुद बोले- पीओके कभी आजाद नहीं रहा
सोशल मीडिया पर पीओके में विरोध प्रदर्शन के कई वीडियो सामने आए हैं। ऐसे ही एक वीडियो को पोस्ट करते हुए रिटायर्ड एयर मार्शल अनिल चोपड़ा ने लिखा, पाकिस्तान पिछले 78 वर्षों से पाकिस्तान अधिकृत जम्मू-कश्मीर को 'आजाद कश्मीर' कहता आया है। लेकिन अब पीओके के लोगों ने 80 हजार से अधिक लोगों की मौजूदगी वाली एक रैली में इस दावे को चुनौती दी है।
जेएएसी के नेता सरदार अमान खान ने कहा, 'कश्मीर कोई विवादित क्षेत्र नहीं है। यह कब्जे वाला क्षेत्र है। और यह कभी आजाद नहीं था।'
एविएटर अनिल चोपड़ा ने लिखा, भारत पिछले 78 वर्षों से यही बात कहता रहा है, जबकि पाकिस्तान इसे प्रोपेगेंडा बताता रहा। अब पीओके के लोग खुद अपनी रैलियों में यही बात कह रहे हैं। अब सवाल ये है कि पाकिस्तान इस बार इसका जिम्मेदार किसे ठहराएगा? क्या वह यह भी कहेगा कि रावलकोट की रैली में 80 हजार लोगों को रॉ ने भेजा था?'
Pakistan has spent 78 years calling PoJK "Azad Kashmir." 🇮🇳
The people of PoJK just corrected that in front of 80,000 people.
JAAC leader Sardar Aman Khan said it straight.
"Kashmir is not disputed territory. It is occupied territory. And it was never truly Azad."
India has… pic.twitter.com/jb50aHVSQE— Aviator Anil Chopra (@Chopsyturvey) July 15, 2026
पीओके में क्यों हो रहे हैं विरोध प्रदर्शन?
पीओके में विरोध प्रदर्शन तब शुरू हुए, जब पाकिस्तान की सरकार ने जम्मू कश्मीर से पलायन कर आए लोगों के लिए 12 विधायी सीटें आरक्षित करने का एलान किया। इसका स्थानीय लोगों ने विरोध शुरू कर दिया। धीरे-धीरे पीओके के लोगों ने अन्य मांगों को लेकर भी विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया। इन प्रदर्शनों में चार सुरक्षाकर्मियों समेत 15 लोगों की मौत हो चुकी है।
जेएएसी का लॉन्च मार्च का एलान
पीओके में विरोध प्रदर्शनों की अगुवाई कर रही जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (जेएएसी) ने 15 जुलाई को मुजफ्फराबाद के लिए 'लॉन्ग मार्च' का ऐलान किया है। एक्शन कमेटी को पाकिस्तान सरकार बैन कर चुकी है और बड़ी संख्या में सुरक्षाबलों को रावलकोट और मुजफ्फराबाद में तैनात किया है। ऐसे में लॉन्ग मार्च में हिंसा की आशंका जताई जा रही है। एक्शन कमेटी पीओके विधानसभा में सीटों के आरक्षण, महंगाई और कश्मीरियों पर पाकिस्तानी फोर्स के दमन के खिलाफ सड़कों पर है।
विरोध प्रदर्शनों को लेकर भारत ने भी दी प्रतिक्रिया
पीओके में हो रहे विरोध प्रदर्शनों पर भारतीय विदेश मंत्रालय ने भी प्रतिक्रिया दी है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि पीओके में लोगों का गुस्सा कोई अचानक पैदा हुई स्थिति नहीं है, बल्कि यह पाकिस्तान के वर्षों से चले आ रहे शोषण, अधिकारों के हनन और अवैध कब्जे का नतीजा है। उन्होंने कहा कि स्थानीय लोगों की वास्तविक समस्याओं का समाधान करने के बजाय पाकिस्तान सरकार बल प्रयोग और दमन का रास्ता अपना रही है। भारत का कहना है कि पाकिस्तान लगातार वहां के लोगों की लोकतांत्रिक आवाज को दबाने की कोशिश कर रहा है।
भारत ने वैश्विक समुदाय से अपील की कि पाकिस्तान को मानवाधिकार उल्लंघन और पीओके में हो रही घटनाओं के लिए जवाबदेह ठहराया जाए। उन्होंने कहा कि भारत का रुख है कि पीओके के लोगों को उनके मूल अधिकार मिलने चाहिए। जायसवाल ने भारत का दावा दोहराते हुए कहा कि पूरा जम्मू-कश्मीर, जिसमें पाकिस्तान अधिकृत जम्मू-कश्मीर भी शामिल है, भारत का अभिन्न अंग है।