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खर्ग द्वीप बनेगा युद्ध का मैदान: ईरान के तेल ठिकानों पर हमले से क्यों पीछे हटा अमेरिका? ट्रंप ने बताया प्लान

Wed, 15 Jul 2026 10:17 AM IST
नितिन गौतम पीटीआई, अमर उजाला
पीटीआई, अमर उजाला Published by: नितिन गौतम Updated Wed, 15 Jul 2026 10:17 AM IST
सार

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि उन्होंने ही अपनी सेना को खर्ग द्वीप पर हमले से मना किया था क्योंकि इससे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर समस्या हो सकती थी, लेकिन अब वे इस पर विचार कर रहे हैं। आइए जानते हैं क्या हैं ट्रंप के इस बयान के मायने...

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खर्ग द्वीप पर हमले पर विचार कर रहे ट्रंप - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि उन्होंने अमेरिकी सेना को ईरान के खर्ग द्वीप स्थित तेल प्रतिष्ठानों को निशाना नहीं बनाने का निर्देश दिया था, क्योंकि उनका मानना है कि इन पर हमला वैश्विक अर्थव्यवस्था को प्रभावित कर सकता है। हालांकि, उन्होंने ईरान में सीमित जमीनी सैन्य अभियान चलाने या भविष्य में रणनीतिक महत्व वाले इस द्वीप पर नियंत्रण करने की संभावना से भी इनकार नहीं किया। फॉक्स न्यूज को दिए इंटरव्यू में ट्रंप ने दावा किया कि अमेरिका ने खर्ग द्वीप पर दो या तीन बार हमले किए, लेकिन तेल प्रतिष्ठानों को जानबूझकर निशाना नहीं बनाया।
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खर्ग द्वीप पर हमले से इनकार नहीं किया
ट्रंप ने कहा, 'सब कुछ निशाना बनाओ, लेकिन तेल को मत छुओ। उस छोटे से हिस्से को छोड़ दो। तेल प्रतिष्ठानों को हाथ मत लगाना। मैं वैश्विक अर्थव्यवस्था पर इसका असर नहीं चाहता। यह दुनिया की अर्थव्यवस्था का एक अहम हिस्सा है।' ट्रंप ने यह भी कहा कि अमेरिका चाहे तो भविष्य में तेल प्रतिष्ठानों पर हमला कर सकता है। उन्होंने कहा, 'हमने अब तक उन्हें निशाना नहीं बनाया है, लेकिन किसी समय ऐसा कर सकते हैं, लेकिन मुझे लगता है कि इसकी संभावना कम है।'
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खर्ग द्वीप पर नियंत्रण करने के सवाल पर ट्रंप ने कोई साफ जवाब नहीं दिया। इंटरव्यू के दौरान पत्रकार ने 1988 में दिए गए ट्रंप के उस बयान का जिक्र किया, जिसमें उन्होंने कहा था कि अगर किसी अमेरिकी सैनिक या जहाज पर हमला हुआ तो वह खर्ग द्वीप पर कब्जा कर लेंगे। इस पर ट्रंप ने कहा, 'मैं इस बारे में अभी कुछ नहीं कह सकता। अगर कहूंगा तो यह समझदारी नहीं होगी।' हालांकि, उन्होंने संकेत दिया कि अगर ईरान की सैन्य क्षमता को और अधिक कमजोर कर दिया गया तो खर्ग द्वीप पर कब्जे की संभावना पर विचार किया जा सकता है।
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ईरान में सेना उतारने पर क्या बोले ट्रंप?
जब उनसे पूछा गया कि क्या वह सीमित स्तर पर जमीनी सैन्य अभियान की संभावना को पूरी तरह खारिज कर रहे हैं, तो ट्रंप ने इससे इनकार कर दिया। उन्होंने कहा, 'मैं ऐसा भी नहीं कहना चाहता। कभी-कभी जमीनी अभियान की जरूरत पड़ती है, लेकिन हमारे पास ऐसे लोग हैं जो हमारी ओर से यह अभियान चलाएंगे।' हालांकि, ट्रंप ने यह नहीं बताया कि उनका इशारा किन बलों या सहयोगियों की ओर था।

ट्रंप ने दावा किया कि अमेरिकी सैन्य अभियान से ईरान को इतना नुकसान पहुंचा है कि उसे इससे उबरने में करीब 20 साल लग जाएंगे। ट्रंप ने कहा कि अमेरिकी हमले तब तक जारी रहेंगे, जब तक वह खुद उन्हें रोकने का फैसला नहीं करते। खर्ग द्वीप फारस की खाड़ी में ईरान के तट के पास स्थित है और लंबे समय से देश के कच्चे तेल के निर्यात का प्रमुख केंद्र रहा है। इस द्वीप पर किसी भी तरह का हमला अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा आपूर्ति और कच्चे तेल की कीमतों को प्रभावित कर सकता है। इसका असर भारत समेत एशिया के प्रमुख तेल आयातक देशों पर भी पड़ सकता है।

ट्रंप का दावा- ईरान ने समझौते की इच्छा जताई
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि फॉक्स न्यूज को दिए गए उनके इंटरव्यू से करीब एक घंटे पहले ईरानी प्रतिनिधियों ने अमेरिका से संपर्क किया था और संकेत दिया था कि तेहरान समझौता करना चाहता है। यह बयान ऐसे समय आया है जब अमेरिका की ओर से ईरान पर हमले लगातार जारी हैं। ट्रंप ने कहा कि व्हाइट हाउस में इंटरव्यू से कुछ समय पहले उनके प्रतिनिधियों ने ईरानी अधिकारियों से बातचीत की थी। जब उनसे पूछा गया कि उन्होंने आखिरी बार किसी ईरानी अधिकारी से कब बात की थी, तो ट्रंप ने कहा, 'मैंने सीधे नहीं, लेकिन मेरे प्रतिनिधियों ने बात की है। वास्तव में करीब एक घंटे पहले भी उन्होंने बातचीत की थी।'

ट्रंप ने दावा किया कि, 'वे समझौता करना चाहते हैं।' हालांकि, उन्होंने तेहरान पर बार-बार समझौतों से पीछे हटने का आरोप लगाया और कहा कि उन्हें यकीन नहीं है कि इस बार की बातचीत किसी नतीजे तक पहुंचेगी। उन्होंने आगे कहा, 'हम नागरिक आबादी को लेकर बेहद सावधानी बरत रहे हैं, लेकिन मैंने कहा है कि बेहतर होगा आप समझौता कर लें, नहीं तो आपके पास कुछ भी नहीं बचेगा।' ट्रंप ने कहा कि अमेरिकी सैन्य दबाव बढ़ने के बीच ईरान के पास बातचीत की मेज पर लौटने के अलावा कोई विकल्प नहीं है।
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