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Hindi News ›   World ›   PoK isn't part of PAK: 'If oppression doesn't stop, we will join India', protesters in Rawalakot issue warning

पीओके पाकिस्तान का हिस्सा नहीं: 'दमन न रुका तो भारत के साथ जाएंगे', रावलकोट में प्रदर्शनकारियों ने दी चेतावनी

Wed, 01 Jul 2026 08:13 AM IST
Pavan आशुतोष भाटिया, अमर उजाला, नई दिल्ली/रावलकोट
आशुतोष भाटिया, अमर उजाला, नई दिल्ली/रावलकोट Published by: Pavan Updated Wed, 01 Jul 2026 08:13 AM IST
सार

पीओके में नागरिक विद्रोह का नेतृत्व कर रहे नागरिक अधिकार आंदोलनकारी सरदार अमन खान ने ईदगाह मैदान में उमड़े जनसैलाब के सामने कहा कि पीओके पाकिस्तान का नहीं है। हमें पाकिस्तान की जरूरत नहीं है, बल्कि पाकिस्तान को अपने अस्तित्व के लिए पीओके की जरूरत है।

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PoK isn't part of PAK: 'If oppression doesn't stop, we will join India', protesters in Rawalakot issue warning
रावलकोट में प्रदर्शनकारियों ने दी चेतावनी - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) में इस्लामाबाद के नियंत्रण को बड़ा झटका लगा है। महंगाई, आर्थिक संकट, जरूरी खाद्य पदार्थों और राशन की आपूर्ति पर रोक व प्रशासनिक विफलता से भड़के हजारों प्रदर्शनकारियों ने पाकिस्तान को सीधी चुनौती देते हुए मंच से खुलेआम कहा कि पीओके पाकिस्तान का हिस्सा नहीं है। अगर उनके दमन का सिलसिला नहीं रुका, तो वे स्थायी रूप से भारत के साथ जाने पर विचार कर सकते हैं। पाकिस्तान के प्रशासनिक दमन के खिलाफ पीओके के रावलकोट के ईदगाह मैदान में हजारों लोग 22 दिन से आंदोलन कर रहे हैं।
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पीओके में नागरिक विद्रोह का नेतृत्व कर रहे नागरिक अधिकार आंदोलनकारी सरदार अमन खान ने ईदगाह मैदान में उमड़े जनसैलाब के सामने कहा कि पीओके पाकिस्तान का नहीं है। हमें पाकिस्तान की जरूरत नहीं है, बल्कि पाकिस्तान को अपने अस्तित्व के लिए पीओके की जरूरत है। नौ जून से प्रदर्शनकारियों का एक समूह नियंत्रण रेखा (एलओसी) के पास धरने पर है। अमन खान ने संकेत दिया कि मौजूदा हालात ऐसे बने रहे, तो स्थानीय लोग भारत के साथ घनिष्ठ संबंध तलाश सकते हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि पीओके की सीमाएं खुल सकती हैं और ऐसा हुआ, तो इस्लामाबाद को पीओके के लोगों से रुकने की भीख मांगनी पड़ेगी।
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आजादी मिलने तक जन विद्रोह नहीं थमेगा
पीओके में दशकों के राजकीय दमन, महंगाई व प्रशासनिक उपेक्षा के खिलाफ 38 सूत्रीय मांगों को लेकर जन विद्रोह शुरू हुआ है। वे पाकिस्तान से आजादी की मांग कर रहे हैं।
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  • पीओके की जमीनी हकीकत दुनिया के सामने न आए, इसके लिए पाकिस्तानी सरकार ने 5 जून से क्षेत्र में इंटरनेट सेवाएं बंद कर रखी हैं। आवाज दबाने के लिए नागरिकों पर जुल्म किया जा रहा है।
  • पीओके प्रवासी विद्रोह के समर्थन में अलग-अलग देशों में पाकिस्तानी दूतावासों और उच्चायोगों के बाहर प्रदर्शन कर रहे हैं। उधर, आंदोलनकारियों ने साफ कह दिया है कि यह विद्रोह मुजफ्फराबाद समेत सभी हिस्सों के पाकिस्तानी कब्जे से आजादी मिलने से पहले नहीं थमेगा।

पोल न खुले, इसलिए विपक्षी नेताओं को जाने से रोका
पोल खुलने के डर से पाकिस्तानी सरकार ने विपक्षी नेताओं के नेतृत्व वाले प्रतिनिधिमंडल को पीओके में जाने से रोक दिया। जम्मू-कश्मीर ज्वाइंट अवामी एक्शन कमेटी (जेकेजेएएसी) ने इसके लिए पाकिस्तानी अधिकारियों की कड़ी आलोचना की है। कमेटी ने इस कदम को लोकतांत्रिक अधिकारों और राजनीतिक असहमति को दबाने की कार्रवाई का एक और सबूत बताया। तहरीक तहफ्फुज ऐन पाकिस्तान के प्रमुख महमूद खान अचकजई के नेतृत्व वाले प्रतिनिधिमंडल में पूर्व प्रधानमंत्री शाहिद खाकान अब्बासी भी थे। बलोच मानवाधिकार कार्यकर्ता उमर करीम बलूचिस्तान क्षेत्र में मानवाधिकार उल्लंघनों की ओर अंतरराष्ट्रीय ध्यान आकर्षित करने के लिए से  एक से 3 जुलाई तक लंदन में ब्रिटेन के विदेश, राष्ट्रमंडल और विकास कार्यालय (एफसीडीओ) के बाहर तीन दिवसीय भूख हड़ताल करेंगे।
 
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