फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   World ›   Profound Impact of US-Iran Conflict on Pakistans Economy Oil Import Bill Rises by 167 percent

US-Iran war: पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था पर अमेरिका-ईरान युद्ध का गहरा असर, तेल आयात बिल 167 फीसदी बढ़ा

Tue, 05 May 2026 02:17 PM IST
Sandhya Kumari न्यूज डेस्क, अमर उजाला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला Published by: Sandhya Kumari Updated Tue, 05 May 2026 02:17 PM IST
सार

अमेरिका-ईरान तनाव से तेल कीमतों में उछाल आया, जिससे पाकिस्तान का आयात बिल तेजी से बढ़ा। महंगाई, मुद्रा गिरावट, घटते विदेशी भंडार और होर्मुज पर निर्भरता ने ऊर्जा संकट को गहरा कर अर्थव्यवस्था पर गंभीर दबाव बढ़ा दिया है।

विज्ञापन
Profound Impact of US-Iran Conflict on Pakistans Economy Oil Import Bill Rises by 167 percent
पाकिस्तानी पीएम शहबाज शरीफ - फोटो : ANI

विस्तार

अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे संघर्ष ने पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था में ऊर्जा की कीमतों में भारी उछाल ला दिया है। बढ़ती महंगाई, घटते विदेशी मुद्रा भंडार और तेजी से गिरती मुद्रा के कारण पाकिस्तान पहले से ही गंभीर संकट में है। इंडिया नैरेटिव के एक लेख के अनुसार, यह झटका केवल अस्थायी नहीं बल्कि अर्थव्यवस्था के लिए एक संरचनात्मक आघात है। लेख में कहा गया है कि पाकिस्तान उपमहाद्वीप में अमेरिका-ईरान युद्ध का प्राथमिक शिकार है।
विज्ञापन


पाकिस्तान का साप्ताहिक पेट्रोलियम आयात बिल 30 करोड़ डॉलर से बढ़कर 80 करोड़ डॉलर हो गया है, जो 167 फीसदी की वृद्धि है। बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड 112 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर निकल गया है। होर्मुज जलडमरूमध्य के बंद होने से माल ढुलाई लागत और बीमा प्रीमियम रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंच गए हैं। यह ऊर्जा झटका पाकिस्तान की वृहद अर्थव्यवस्था में फैल रहा है, जिससे बढ़ती महंगाई, चालू खाता घाटा, विदेशी मुद्रा भंडार में कमी और मुद्रा का अवमूल्यन हो रहा है। कराची बंदरगाह पर भी लॉजिस्टिक्स संकट बढ़ रहा है।
विज्ञापन


आयात बोझ और निर्यात पर प्रभाव

अप्रैल 2026 में, प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने सार्वजनिक रूप से पुष्टि की थी कि पाकिस्तान का साप्ताहिक पेट्रोलियम आयात बिल 30 करोड़ डॉलर से बढ़कर 80 करोड़ डॉलर हो गया है। यह 167 फीसदी की वृद्धि है। इससे सालाना करीब 26 अरब डॉलर का अतिरिक्त बोझ पड़ेगा। यह आंकड़ा पाकिस्तान के वित्त वर्ष 2024-25 के कुल व्यापारिक निर्यात राजस्व 29.8 अरब डॉलर के लगभग बराबर है। देश एक ही वस्तु श्रेणी में अपने पूरे निर्यात क्षेत्र के बराबर आयात देयता उत्पन्न कर रहा है, वह भी गंभीर भंडार संकट के समय।
विज्ञापन
विज्ञापन


 85 से 90 फीसदी पेट्रोलियम आवश्यकताएं आयात से पूरी

लेख में कहा गया है, "पाकिस्तान का वार्षिक तेल बोझ अब उसकी कुल निर्यात आय के करीब पहुंच गया है। यह केवल मूल्य समायोजन नहीं है - यह संरचनात्मक अनुपात की एक तनावपूर्ण घटना है, जो मौजूदा संकट से दशकों पहले की कमजोरियों को उजागर करती है।" पाकिस्तान की 85 से 90 फीसदी पेट्रोलियम आवश्यकताएं आयात से पूरी होती हैं। ये आयात मुख्य रूप से खाड़ी देशों से होते हैं, जिनकी निर्यात लॉजिस्टिक्स पूरी तरह से अबाधित होर्मुज जलडमरूमध्य पर निर्भर करती है। देश के पास कोई तुलनीय वैकल्पिक आपूर्ति विकल्प या कार्यशील रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार नहीं है।


घरेलू कीमतों पर व्यापक असर

यह संरचनात्मक निर्भरता एक उच्च पास-थ्रू वातावरण उत्पन्न करती है। इसका अर्थ है कि अंतरराष्ट्रीय तेल कीमतों में वृद्धि तेजी और व्यापक रूप से घरेलू ईंधन कीमतों, परिवहन लागत, बिजली शुल्क और उपभोक्ता कीमतों में प्रसारित होती है।


 
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get latest World News headlines in Hindi related political news, sports news, Business news all breaking news and live updates. Stay updated with us for all latest Hindi news.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed