सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   World ›   protest in israel Ultra-orthodox protesters block roads and trains across country over military draft

सैनिकों की कमी से जूझ रहे इस्राइल में बवाल: सैन्य भर्ती के खिलाफ कट्टरपंथी यहूदी सड़कों पर उतरे, हिंसा-आगजनी

पीटीआई, तेल अवीव Published by: नितिन गौतम Updated Tue, 02 Jun 2026 09:36 AM IST
विज्ञापन
सार

बीते लंबे समय से युद्धों में फंसे इस्राइल की सेना अब सैनिकों की कमी से जूझ रही है और इसे लेकर कई विशेषज्ञ चिंता जता चुके हैं। हालांकि समस्या का हल निकालने के बजाय इस्राइली की जनता आपस में ही भिड़ गई है। दरअसल हजारों कट्टरपंथी यहूदियों ने सैन्य भर्ती के खिलाफ देशभर में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन किया। आइए जानते हैं कि क्या है ये पूरा मामला और इसके पीछे का विवाद

protest in israel Ultra-orthodox protesters block roads and trains across country over military draft
इस्राइली पीएम की बढ़ीं मुश्किलें - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन

विस्तार

इस्राइल में अनिवार्य सैन्य भर्ती के विरोध में सोमवार को हजारों अति-रूढ़िवादी (अल्ट्रा-ऑर्थोडॉक्स) यहूदियों ने देशभर में प्रदर्शन किया। जिससे हिंसा और बवाल की स्थिति बन गई। प्रदर्शनकारियों ने प्रमुख सड़कों और रेल मार्गों को अवरुद्ध कर दिया तथा कई स्थानों पर वाहनों में आग लगा दी, जिससे जनजीवन प्रभावित हुआ। इस्राइली पुलिस के अनुसार, प्रदर्शनकारियों ने कई प्रमुख चौराहों को जाम कर दिया और एक स्थान पर बस से उतरे एक सैनिक पर भी हमला किया। भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पुलिस को वाटर कैनन और घुड़सवार बल का सहारा लेना पड़ा।


विरोध प्रदर्शन के चलते इस्राइल में यातायात थमा
विरोध प्रदर्शन के कारण यरुशलम और तेल अवीव महानगरीय क्षेत्र समेत देश के मध्य हिस्से में यातायात व्यवस्था लगभग ठप हो गई। कई राजमार्ग बंद कर दिए गए और सार्वजनिक परिवहन सेवाएं बाधित रहीं। इस्राइल में अधिकांश यहूदी पुरुषों और महिलाओं के लिए सैन्य सेवा अनिवार्य है। हालांकि, राजनीतिक रूप से प्रभावशाली अल्ट्रा-ऑर्थोडॉक्स समुदाय को लंबे समय से धार्मिक शिक्षण संस्थानों में अध्ययन के आधार पर सैन्य सेवा से छूट मिलती रही है। अब इस छूट पर खतरा मंडरा रहा है।
विज्ञापन
विज्ञापन


आम नागरिक कट्टरपंथी यहूदियों को मिली छूट से नाराज
कई आम इस्राइली नागरिक इस व्यवस्था से नाराज हैं, क्योंकि लगातार सैन्य अभियानों के चलते इस्राइली सेना सैनिकों की कमी से जूझ रही है, जिससे सेना पर दबाव बढ़ रहा है। इस बीच भी अल्ट्रा-ऑर्थोडॉक्स समुदाय के अधिकांश युवा भर्ती से बाहर रहते हैं। यही मुद्दा प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की सत्तारूढ़ गठबंधन सरकार के लिए भी संकट बन गया है। अल्ट्रा-ऑर्थोडॉक्स दलों द्वारा समर्थन वापस लेने के बाद समय से पहले चुनाव की आशंका भी बढ़ गई है।
विज्ञापन
Trending Videos


क्या कहते हैं आंकड़े?
संसदीय समिति के आंकड़ों के अनुसार, हर साल करीब 13,000 अल्ट्रा-ऑर्थोडॉक्स युवा 18 वर्ष की भर्ती आयु तक पहुंचते हैं, लेकिन इनमें से 10 प्रतिशत से भी कम सेना में शामिल होते हैं। सैनिकों की भारी कमी से जूझ रही इस्राइली सेना अनिवार्य सैन्य सेवा की अवधि बढ़ाने पर विचार कर रही है। वर्तमान में अधिकांश यहूदी पुरुषों को लगभग तीन वर्ष और महिलाओं को दो वर्ष की अनिवार्य सैन्य सेवा देनी होती है, जिसके बाद रिजर्व ड्यूटी भी करनी पड़ती है।

कट्टरपंथी यहूदी प्रदर्शनकारी बोले- ये उनके अस्तित्व की लड़ाई
यरुशलम में प्रदर्शनकारी इजराइल ट्रॉपर ने कहा, 'यह समुदाय इसे अपने अस्तित्व की लड़ाई मानता है। सेना में शामिल होने का मतलब धर्म से समझौता करना है। हम अपना धर्म नहीं छोड़ना चाहते, इसलिए यह हमारे लिए जीवन-मरण का सवाल है।' कई प्रदर्शनकारियों ने ऐसे पोस्टर भी उठाए जिन पर लिखा था, 'हम जियोनिस्ट बनकर जीने से बेहतर यहूदी बनकर मरना पसंद करेंगे और हम जियोनिस्ट विचारधारा के लिए सेना में सेवा नहीं करेंगे।'

क्या है इस विवाद की वजह?
इस्राइल की आबादी का लगभग 13 प्रतिशत हिस्सा अल्ट्रा-ऑर्थोडॉक्स समुदाय का है और यह देश का सबसे तेजी से बढ़ता जनसमूह माना जाता है। 1948 में इस्राइल की स्थापना के समय से ही धार्मिक अध्ययन करने वाले छात्रों को सैन्य सेवा से छूट दी जाती रही है। इन छूटों और धार्मिक शिक्षण संस्थानों में पढ़ने वाले छात्रों को 26 वर्ष की आयु तक मिलने वाली सरकारी आर्थिक सहायता को लेकर लंबे समय से विवाद बना हुआ है। वर्तमान में इस्राइल गाजा, लेबनान और सीरिया में सैन्य मौजूदगी बनाए हुए है, जबकि ईरान के साथ संघर्ष की स्थिति ने भी सेना पर अतिरिक्त दबाव डाला है।

इस्राइली सुप्रीम कोर्ट कट्टरपंथी यहूदियों को मिली छूट को दे चुका है अवैध करार
इस्राइल के सर्वोच्च न्यायालय ने 2017 में इन छूटों को अवैध करार दिया था, लेकिन लगातार समय-विस्तार और सरकारी प्रक्रियाओं के कारण यह व्यवस्था अब तक जारी है। इस्राइल के अधिकांश यहूदियों के लिए सैन्य सेवा सामाजिक जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा और वयस्कता की पहचान मानी जाती है। वहीं, अल्ट्रा-ऑर्थोडॉक्स समुदाय को आशंका है कि सेना में भर्ती होने से उनके युवाओं पर धर्मनिरपेक्ष प्रभाव बढ़ेगा और उनकी पारंपरिक जीवनशैली प्रभावित होगी।
 
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get latest World News headlines in Hindi related political news, sports news, Business news all breaking news and live updates. Stay updated with us for all latest Hindi news.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

एप में पढ़ें

Followed