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South Africa: जलवायु परिवर्तन से दक्षिणी अफ्रीका में भीषण बाढ़, 100 से ज्यादा लोगों की मौत, रिपोर्ट में खुलासा

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: प्रशांत तिवारी Updated Thu, 29 Jan 2026 12:25 PM IST
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सार

South Africa: दक्षिणी अफ्रीका में हालिया मूसलाधार बारिश और भीषण बाढ़ की घटना में 100 से अधिक लोगों की मौत हो गई। इसके साथ ही बाढ़ की वजह से करीब 3 लाख लोगों को अपना घर छोड़ना पड़ा है।

report reveals Severe floods in Southern Africa due to climate change killing more than 100 people
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : ANI
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विस्तार
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दक्षिणी अफ्रीका के कई हिस्सों में हाल ही में हुई मूसलाधार बारिश और भीषण बाढ़ को मानव-जनित जलवायु परिवर्तन ने खतरनाक बना दिया है। इस आपदा में 100 से अधिक लोगों की मौत हो गई, जबकि करीब 3 लाख लोगों को अपना घर छोड़ दूसरी जगह शिफ्ट होना पड़ा है। यह जानकारी गुरुवार को जारी एक रिपोर्ट में सामने आई है।
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सड़क और पुल बहे
रिपोर्ट में बताया गया है कि वर्ल्ड वेदर एट्रिब्यूशन द्वारा दक्षिण अफ्रीका, मोज़ाम्बिक और ज़िम्बाब्वे में हुई भारी बारिश का विश्लेषण किया गया है। अध्ययन के अनुसार, इन इलाकों में महज 10 दिनों के भीतर पूरे एक साल के बराबर बारिश रिकॉर्ड की गई। इसके कारण घरों, सड़कों, पुलों और अन्य बुनियादी ढांचे को भारी नुकसान पहुंचा है, जिसकी लागत लाखों डॉलर आंकी जा रही है। मोज़ाम्बिक में कई घर और इमारतें पूरी तरह पानी में डूब गईं, जबकि दक्षिण अफ्रीका के लिम्पोपो और म्पुमालांगा प्रांतों तथा ज़िम्बाब्वे के कुछ हिस्सों में सड़कें और पुल बह गए।
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ला नीना ने बनाया हालत गंभीर
रिपोर्ट में बताया गया है कि यह बारिश सामान्य नहीं थी। इतनी तेज बारिश आमतौर पर 50 साल में एक बार होती है, लेकिन अब ऐसे घटनाक्रम ज्यादा हिंसक हो रहे हैं। इस स्थिति को मौजूदा ला नीना मौसम प्रणाली ने और गंभीर बना दिया, जो आमतौर पर इस क्षेत्र में ज्यादा बारिश लाती है, लेकिन इस बार यह ज्यादा गर्म वातावरण में सक्रिय थी।

'बाढ़ में बदल गई बारिश'
रॉयल नीदरलैंड्स मौसम विज्ञान संस्थान के जलवायु शोधकर्ता और अध्ययन के सह-लेखक इज़िदीन पिंटो ने कहा कि जीवाश्म ईंधनों के लगातार इस्तेमाल से अत्यधिक बारिश की तीव्रता बढ़ रही है। हालिया बारिश की तीव्रता में करीब 40 प्रतिशत की बढ़ोतरी को जलवायु परिवर्तन के बिना समझाना संभव नहीं है। उनके अनुसार, जो बारिश पहले भी गंभीर होती, वह अब एक विनाशकारी बाढ़ में बदल गई है, जिससे निपटने के लिए लोग तैयार नहीं हैं। वैज्ञानिकों के लिए भी इस बार की बाढ़ की तीव्रता चौंकाने वाली रही।

मोजाम्बिक मौसम सेवा के शोधकर्ता बर्नार्डिनो न्हांतुम्बो ने बताया कि कुछ इलाकों में दो से तीन दिनों में उतनी बारिश हो गई, जितनी पूरे बरसाती मौसम में होती है। उन्होंने कहा कि मोजाम्बिक नौ अंतरराष्ट्रीय नदियों के निचले हिस्से में स्थित है, इसलिए भारी बारिश के साथ-साथ नदियों के तेज बहाव ने भी तबाही बढ़ा दी।

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मोजाम्बिक के कई हिस्से सबसे ज्यादा प्रभावित
इस आपदा से मोजाम्बिक के मध्य और दक्षिणी हिस्से सबसे ज्यादा प्रभावित हुए। गाज़ा प्रांत की राजधानी ज़ाइ-ज़ाइ और पास का शहर चोक्वे लंबे समय तक पानी में डूबे रहे। अधिकारियों का कहना है कि पूर्वानुमान के बावजूद नुकसान को पूरी तरह रोक पाना संभव नहीं था। शोधकर्ताओं ने अफ्रीका में ही जलवायु मॉडल विकसित करने की जरूरत पर भी जोर दिया है।

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'बढ़ सकती है बाढ़ की घटनाएं' 
इंपीरियल कॉलेज लंदन की प्रोफेसर फ्रिडेरिके ओटो ने कहा कि दुनिया में उपलब्ध अधिकांश जलवायु मॉडल अमेरिका, यूरोप और एशिया में विकसित किए गए हैं। अफ्रीका में कोई स्वतंत्र जलवायु मॉडल न होने के कारण इस क्षेत्र में जलवायु परिवर्तन के प्रभावों का सटीक आकलन करना मुश्किल हो जाता है। वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है कि अगर जलवायु परिवर्तन पर प्रभावी कदम नहीं उठाए गए, तो भविष्य में दक्षिणी अफ्रीका समेत दुनिया के कई हिस्सों में ऐसी जानलेवा बाढ़ की घटनाएं और बढ़ सकती हैं।

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