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Romania Visit: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को रोमानिया में मिला बड़ा शैक्षणिक सम्मान, शिक्षा और एआई पर क्या कहा?
Fri, 24 Jul 2026 10:34 PM IST
हिमांशु सिंह चंदेल
पीटीआई, रोमानिया
पीटीआई, रोमानिया
Published by: हिमांशु सिंह चंदेल
Updated Fri, 24 Jul 2026 10:34 PM IST
सार
Romania Visit President Droupadi Murmu: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को रोमानिया की राजधानी बुखारेस्ट स्थित बुखारेस्ट यूनिवर्सिटी ऑफ इकोनॉमिक स्टडीज ने अपनी सर्वोच्च शैक्षणिक उपाधि ‘डॉक्टर होनोरिस कॉसा’ से सम्मानित किया। सम्मान स्वीकार करते हुए उन्होंने शिक्षा, भारत-रोमानिया संबंधों और ‘वसुधैव कुटुंबकम्’ की भावना पर अपने विचार रखे। आइए, विस्तार से जानते है कि उन्होंने अपने संबोधन में क्या-क्या कहा?
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रोमानिया में राष्ट्रपति मुर्मू का सम्मान
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
रोमानिया की राजकीय यात्रा पर पहुंचीं राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को शुक्रवार को बुखारेस्ट यूनिवर्सिटी ऑफ इकोनॉमिक स्टडीज (BUES) ने अपनी सर्वोच्च शैक्षणिक उपाधि 'डॉक्टर होनोरिस कॉसा' से सम्मानित किया। यह सम्मान शिक्षा, सार्वजनिक सेवा और अंतरराष्ट्रीय सहयोग में असाधारण योगदान देने वाले प्रतिष्ठित व्यक्तित्वों को दिया जाता है। सम्मान स्वीकार करते हुए राष्ट्रपति मुर्मू ने इसे अपने लिए गर्व का क्षण बताया और कहा कि वह इसे विनम्रता के साथ भारत के 140 करोड़ लोगों और भारत-रोमानिया की स्थायी मित्रता के सम्मान के रूप में स्वीकार करती हैं।
राष्ट्रपति ने अपने संबोधन में कहा कि शिक्षा उनके जीवन की सबसे परिवर्तनकारी शक्ति रही है। उन्होंने बताया कि उनका जन्म एक छोटे से गांव में सीमित संसाधनों वाले परिवार में हुआ था और वह अपने गांव की पहली लड़की थीं, जिसने कॉलेज में प्रवेश लिया। उन्होंने कहा कि इस अनुभव ने उन्हें सिखाया कि शिक्षा सबसे बड़ा समान अवसर देने वाला माध्यम है। शिक्षा यह नहीं देखती कि कोई कहां पैदा हुआ, बल्कि यह देखती है कि वह कितनी दूर तक आगे बढ़ने की इच्छा रखता है। उन्होंने यह भी कहा कि भारत में कुछ समय तक शिक्षक के रूप में काम करने का अवसर मिला, जहां उन्होंने देखा कि एक साधारण कक्षा भी किसी परिवार और धीरे-धीरे पूरे समाज का भविष्य बदल सकती है।
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राष्ट्रपति ने अपने संबोधन में कहा कि शिक्षा उनके जीवन की सबसे परिवर्तनकारी शक्ति रही है। उन्होंने बताया कि उनका जन्म एक छोटे से गांव में सीमित संसाधनों वाले परिवार में हुआ था और वह अपने गांव की पहली लड़की थीं, जिसने कॉलेज में प्रवेश लिया। उन्होंने कहा कि इस अनुभव ने उन्हें सिखाया कि शिक्षा सबसे बड़ा समान अवसर देने वाला माध्यम है। शिक्षा यह नहीं देखती कि कोई कहां पैदा हुआ, बल्कि यह देखती है कि वह कितनी दूर तक आगे बढ़ने की इच्छा रखता है। उन्होंने यह भी कहा कि भारत में कुछ समय तक शिक्षक के रूप में काम करने का अवसर मिला, जहां उन्होंने देखा कि एक साधारण कक्षा भी किसी परिवार और धीरे-धीरे पूरे समाज का भविष्य बदल सकती है।
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राष्ट्रपति ने शिक्षा को समाज की सबसे बड़ी ताकत क्यों बताया?
राष्ट्रपति मुर्मू ने कहा कि सार्वजनिक जीवन में उनके पूरे सफर के दौरान यह विश्वास बना रहा कि शिक्षा केवल किसी व्यक्ति की तरक्की का साधन नहीं है, बल्कि न्यायपूर्ण और समावेशी समाज की सबसे मजबूत नींव है। उन्होंने कहा कि आज जब दुनिया कृत्रिम बुद्धिमत्ता, डिजिटल तकनीक और तेज वैज्ञानिक प्रगति के दौर से गुजर रही है, तब विश्वविद्यालयों की जिम्मेदारी पहले से कहीं अधिक बढ़ गई है। उन्होंने कहा कि ज्ञान के साथ विवेक, नैतिकता और करुणा का होना भी उतना ही आवश्यक है।
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