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Lanka: 'श्रीलंकाई तमिलों की रक्षा के लिए उतारें साझा राष्ट्रपति उम्मीदवार', CV विग्नेश्वर की पार्टियों से अपील
Wed, 27 Dec 2023 07:32 PM IST
आदर्श शर्मा
वर्ल्ड न्यूज, अमर उजाला, कोलंबो
वर्ल्ड न्यूज, अमर उजाला, कोलंबो
Published by: आदर्श शर्मा
Updated Wed, 27 Dec 2023 07:32 PM IST
सार
तमिलों की रक्षा के लिए श्रीलंका की तमिल पार्टियों को साथ आना होगा। यह बात श्रीलंका उत्तरी प्रांत के पूर्व मुख्यमंत्री सीवी विग्नेश्वर ने कही है। उन्होंने कहा कि सभी तमिल पार्टियों को साझा राष्ट्रपति उम्मीवार उतारना चाहिए।
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सीवी विग्नेश्वरन
- फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
भारत के पड़ोसी देश श्रीलंका में तमिलों को लेकर राजनीति थमने का नाम नहीं ले रही हैं। उत्तरी प्रांत के पूर्व मुख्यमंत्री सीवी विग्नेश्वर ने मंगलवार को जाफना में पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि तमिल के हितों की रक्षा तब होगी, जब तमिल पार्टियां अपने निजी उम्मीदवारों को मैदान में उतारने के बदलते राष्ट्रपति चुनाव में एक साझा उम्मीदवार को खड़ा करें। बता दें सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश सीवी विग्नेश्वरन ने 2013 और 2018 के बीच उत्तरी प्रांत के मुख्यमंत्री के रूप में कार्य किया।
तमिल हितों के लिए चुनाव लड़ने को तैयार-विग्नेश्वरन
तमिल मक्कल थेसिया कूटन (टीएमटीके) नेता सीवी विग्नेश्वरन ने दावा किया कि तमिल उम्मीदवार बनने के लिए मुझमें योग्यताएं हैं। अगर तमाम तमिल पार्टियां मुझे राष्ट्रपति चुनाव लड़ने के लिए आमंत्रित करती हैं, तो वह चुनाव लड़ने के लिए तैयार हैं। साथ ही उन्होंने दावा किया कि विक्रमसिंघे के अगले चुनाव में आवश्यक 50 प्रतिशत वोट जीतने की संभावना बहुत कम है क्योंकि सिंहली बहुसंख्यक समुदाय की पार्टियों का प्रतिनिधित्व करने वाले कम से कम चार उम्मीदवार होंगे। राजनीतिक समीकरणों पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि दक्षिणी पार्टियों से चार उम्मीदवार होंगे, इसलिए किसी भी पार्टी के लिए 50 फीसदी वोट हासिल करना मुश्किल होगा।
विक्रमसिंघे की जीत मुश्किल- विग्नेश्वरन
पत्रकारों से बातचीत करते हुए विग्नेश्वरन ने कहा कि विभाजित तमिल वोट के बजाए एक आम तमिल उम्मीदवार बेहतर चुनावी प्रभाव पैदा करेगा। बता दें विक्रमसिंघे अगले साल नवंबर में अपना अस्थायी कार्यकाल समाप्त होने के बाद फिर से राष्ट्रपति चुने जाने की उम्मीद कर रहे हैं।
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राजनीतिक पर्यवेक्षकों ने कही यह बात
राजनीतिक जानकारों की मानें तो विक्रमसिंघे श्रीलंका की दिवालिया अर्थव्यवस्था के संचालन से मतदाताओं को प्रभावित करने में कामयाब रहे हैं। हालांकि, अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) के आदेश पर कड़े आर्थिक सुधार चुनावों में उनकी लोकप्रियता में बाधा बन सकते हैं।
क्या कहता है श्रीलंका का संविधान
श्रीलंका के संविधान के मुताबिक, अगले राष्ट्रपति चुनाव की घोषणा सितंबर 2024 तक की जानी चाहिए और नवंबर के अंत से पहले होनी चाहिए। गोटबाया राजपक्षे के शेष कार्यकाल को भरने के लिए रानिल विक्रमसिंघे को 20 जुलाई, 2022 को राष्ट्रपति के रूप में नियुक्त किया गया था, जिन्हें एक लोकप्रिय विद्रोह में सत्ता से बाहर कर दिया गया था।
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तमिल हितों के लिए चुनाव लड़ने को तैयार-विग्नेश्वरन
तमिल मक्कल थेसिया कूटन (टीएमटीके) नेता सीवी विग्नेश्वरन ने दावा किया कि तमिल उम्मीदवार बनने के लिए मुझमें योग्यताएं हैं। अगर तमाम तमिल पार्टियां मुझे राष्ट्रपति चुनाव लड़ने के लिए आमंत्रित करती हैं, तो वह चुनाव लड़ने के लिए तैयार हैं। साथ ही उन्होंने दावा किया कि विक्रमसिंघे के अगले चुनाव में आवश्यक 50 प्रतिशत वोट जीतने की संभावना बहुत कम है क्योंकि सिंहली बहुसंख्यक समुदाय की पार्टियों का प्रतिनिधित्व करने वाले कम से कम चार उम्मीदवार होंगे। राजनीतिक समीकरणों पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि दक्षिणी पार्टियों से चार उम्मीदवार होंगे, इसलिए किसी भी पार्टी के लिए 50 फीसदी वोट हासिल करना मुश्किल होगा।
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विक्रमसिंघे की जीत मुश्किल- विग्नेश्वरन
पत्रकारों से बातचीत करते हुए विग्नेश्वरन ने कहा कि विभाजित तमिल वोट के बजाए एक आम तमिल उम्मीदवार बेहतर चुनावी प्रभाव पैदा करेगा। बता दें विक्रमसिंघे अगले साल नवंबर में अपना अस्थायी कार्यकाल समाप्त होने के बाद फिर से राष्ट्रपति चुने जाने की उम्मीद कर रहे हैं।
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राजनीतिक पर्यवेक्षकों ने कही यह बात
राजनीतिक जानकारों की मानें तो विक्रमसिंघे श्रीलंका की दिवालिया अर्थव्यवस्था के संचालन से मतदाताओं को प्रभावित करने में कामयाब रहे हैं। हालांकि, अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) के आदेश पर कड़े आर्थिक सुधार चुनावों में उनकी लोकप्रियता में बाधा बन सकते हैं।
क्या कहता है श्रीलंका का संविधान
श्रीलंका के संविधान के मुताबिक, अगले राष्ट्रपति चुनाव की घोषणा सितंबर 2024 तक की जानी चाहिए और नवंबर के अंत से पहले होनी चाहिए। गोटबाया राजपक्षे के शेष कार्यकाल को भरने के लिए रानिल विक्रमसिंघे को 20 जुलाई, 2022 को राष्ट्रपति के रूप में नियुक्त किया गया था, जिन्हें एक लोकप्रिय विद्रोह में सत्ता से बाहर कर दिया गया था।