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POK में शटर डाउन से हड़कंप: मीरपुर से मुजफ्फराबाद तक हिंसा? प्रदर्शनकारियों ने किसे दिया 72 घंटे का समय?
Mon, 06 Jul 2026 05:18 PM IST
प्रशांत तिवारी
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला
Published by: प्रशांत तिवारी
Updated Mon, 06 Jul 2026 05:18 PM IST
सार
पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (पीओके) में लोगों ने शटर-डाउन स्ट्राइक की और जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (जेएएसी) के आह्वान पर आयोजित प्रदर्शनों में हिस्सा लिया। इस दौरान कई इलाकों, खासकर मीरपुर जिले में, प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच हिंसक झड़पें हुईं।
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पीओके में प्रदर्शन
- फोटो : आईएएनएस/ अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (पीओके) में जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (JAAC) के आह्वान पर हुए शटर-डाउन आंदोलन के दौरान कई इलाकों में प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच हिंसक झड़पें हुईं। मीरपुर और मुजफ्फराबाद समेत कई स्थानों पर लोग घायल हुए, कई प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया गया और इंटरनेट बंदी लगातार 30वें दिन भी जारी रही। JAAC ने सरकार को अपनी मांगें मानने के लिए 8 जुलाई तक का सरकार को अल्टीमेटम दिया है।
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कहां हुई सबसे ज्यादा हिंसा?
सूत्रों और स्थानीय लोगों के मुताबिक, रविवार को मीरपुर जिले के ददयाल शहर में हुई झड़पों में कुछ पुलिसकर्मियों समेत करीब एक दर्जन लोग घायल हो गए। झड़पें सबसे पहले ददयाल के अंब गांव में शुरू हुईं। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, शुरुआती झड़प में कम से कम तीन लोग घायल हुए। पाकिस्तानी अखबार डॉन की रिपोर्ट के अनुसार, शाम को एक और झड़प हुई, जिसके बाद गंभीर रूप से घायल एक प्रदर्शनकारी को मीरपुर के अस्पताल में भर्ती कराया गया।
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कितनों की हालत गंभीर?
मीरपुर डिविजनल हेडक्वार्टर अस्पताल के अधिकारियों ने डॉन को बताया कि अस्पताल में चार घायलों को लाया गया, जिनमें से दो की हालत गंभीर बनी हुई है। वहीं, मीरपुर जिले के खलीकाबाद इलाके में महिलाओं ने भी प्रदर्शन किया। इस्लामगढ़ और चकसवारी में भी विरोध प्रदर्शन हुए, हालांकि वहां किसी तरह की हिंसा की सूचना नहीं मिली। भीमबेर जिले की समाहनी घाटी में तीन अलग-अलग स्थानों पर पुरुषों और महिलाओं ने प्रदर्शन किया। वहीं, बरनाला सबडिवीजन के मोयेल गांव में बड़ी संख्या में महिलाओं और बच्चों ने शांतिपूर्ण विरोध दर्ज कराया।
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मुजफ्फराबाद में बाजार बंद
मुजफ्फराबाद में लगभग सभी बाजार बंद रहे। सार्वजनिक परिवहन ठप रहने और निजी वाहनों की आवाजाही बेहद कम होने के कारण शहर की सड़कें लगभग सुनसान नजर आईं। मुजफ्फराबाद के विभिन्न इलाकों में पुलिस ने फ्लैग मार्च किया। हालांकि एयरपोर्ट चौक पर प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच झड़प हो गई। पुलिस ने भीड़ को तितर-बितर करने के लिए आंसू गैस के गोले छोड़े। इस प्रदर्शन में करीब एक दर्जन महिलाएं भी शामिल थीं, जो कथित तौर पर घन चत्तर गांव से आई थीं। पुलिस सूत्रों के अनुसार, चार पुरुषों और तीन महिलाओं को हिरासत में लिया गया।
झड़प के बाद दिखें तबाही के निशान
घटनास्थल के वीडियो में सड़क किनारे एक खाई में करीब एक दर्जन मोटरसाइकिलें और कुछ फर्नीचर पड़े दिखाई दिए। झड़प के बाद सड़क पर कई क्षतिग्रस्त वाहन भी नजर आए। बाद में लोगों ने पुलिस पर अत्यधिक बल प्रयोग का आरोप लगाते हुए धरना दिया। डॉन की रिपोर्ट के मुताबिक, पुलिस ने तारिकाबाद और लोअर चत्तर इलाकों में कई युवाओं को हिरासत में लिया। आरोप है कि उन्होंने आसपास की पहाड़ियों से पत्थर फेंके और सड़क जाम करने की कोशिश की थी।
सरकार को कब तक का दिया अल्टीमेटम?
रविवार शाम आयोजित बैठक में जेएएसी की कोर कमेटी के सदस्य इम्तियाज असलम ने सरकार को संगठन की मांगों का चार्टर लागू करने और मौजूदा हालात का समाधान निकालने के लिए 8 जुलाई तक का अंतिम अल्टीमेटम दिया। उन्होंने कहा, 'यदि सरकार ने 8 जुलाई तक हमारी मांगें नहीं मानीं, तो 9 जुलाई को जेएएसी के धरने के एक महीने पूरे होने पर हम अपने अगले कदम की घोषणा करेंगे।'
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पीओके में क्यों है तनाव?
गौरतलब है कि रविवार को लगातार 30वें दिन भी पीओके में इंटरनेट सेवाएं बंद रहीं। पाकिस्तानी अधिकारियों ने 5 जून को जेएएसी को गैरकानूनी संगठन घोषित कर दिया था। इसके बाद से पूरे पीओके में तनाव और अशांति बढ़ गई है। जेएएसी की प्रमुख मांगों में पीओके की विधायी विधानसभा की उन 12 आरक्षित सीटों को समाप्त करना भी शामिल है, जो पाकिस्तान में बसे कश्मीरी शरणार्थियों के लिए निर्धारित हैं।