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दक्षिण कोरिया के चुनावों पर उठे कई बड़े सवाल?: मतपत्र खत्म होने से मचा बवाल, संसदीय जांच की मांग तेज
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, सियोल
Published by: हिमांशु सिंह चंदेल
Updated Mon, 08 Jun 2026 03:50 PM IST
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सार
South Korea Elections: दक्षिण कोरिया के स्थानीय चुनावों में कई मतदान केंद्रों पर मतपत्रों की कमी ने बड़ा राजनीतिक विवाद खड़ा कर दिया है। सत्तारूढ़ डेमोक्रेटिक पार्टी और विपक्षी पीपुल पावर पार्टी ने संसदीय जांच की मांग की है। चुनावी अव्यवस्था, धांधली के आरोप और पुलिस हस्तक्षेप के बाद चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं।
दक्षिण कोरिया चुनाव
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
दक्षिण कोरिया में स्थानीय चुनावों के दौरान कई मतदान केंद्रों पर मतपत्रों की कमी का मामला अब बड़ा राजनीतिक विवाद बन गया है। सत्तारूढ़ डेमोक्रेटिक पार्टी और मुख्य विपक्षी पीपुल पावर पार्टी ने इस पूरे मामले की संसदीय जांच की मांग की है। चुनाव के दौरान मतदाताओं को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा, जिससे चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता और प्रशासनिक तैयारियों पर सवाल उठने लगे हैं। अब दोनों दल इस मामले में अलग-अलग प्रस्ताव लेकर सामने आए हैं, हालांकि जांच के तरीके और दायरे को लेकर उनके बीच मतभेद भी साफ दिखाई दे रहे हैं।
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क्या मतपत्रों की कमी ने चुनाव प्रक्रिया को प्रभावित किया?
स्थानीय चुनावों के दौरान सियोल के एक दर्जन से ज्यादा मतदान केंद्रों पर मतपत्र खत्म होने की खबर सामने आई। इसके कारण कई जगह मतदान प्रक्रिया बाधित हो गई और मतदाताओं को लंबा इंतजार करना पड़ा। सियोल के सोंगपा वार्ड में तो हालात इतने बिगड़ गए कि चुनावी धांधली के आरोप लगने लगे और विरोध प्रदर्शन शुरू हो गया। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस को हस्तक्षेप करना पड़ा। बाद में पुलिस सुरक्षा के बीच मतपेटियों को मतगणना केंद्र तक पहुंचाया गया।
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क्या विपक्ष ने सरकार और चुनाव आयोग को घेरा?
मुख्य विपक्षी पीपुल पावर पार्टी ने इस मामले को गंभीर चुनावी विफलता बताते हुए 18 सदस्यीय विशेष समिति बनाने का प्रस्ताव रखा है। पार्टी चाहती है कि 60 दिनों तक पूरी घटना की जांच हो। विपक्ष का कहना है कि यह सिर्फ मतपत्रों की कमी का मामला नहीं, बल्कि मतदाताओं के अधिकारों के उल्लंघन और चुनावी व्यवस्था की बड़ी लापरवाही का उदाहरण है। विपक्ष ने मतदान केंद्रों से मतपेटियां हटाने के दौरान पुलिस कार्रवाई की भी जांच की मांग की है। साथ ही स्वतंत्र अभियोजन जांच के लिए अलग विधेयक लाने की तैयारी भी शुरू कर दी गई है।
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क्या सत्तारूढ़ पार्टी ने भी माना चुनावी कुप्रबंधन?
सत्तारूढ़ डेमोक्रेटिक पार्टी ने भी माना कि चुनाव प्रबंधन में गंभीर गड़बड़ी हुई है। पार्टी के सांसद चेओन जून-हो ने कहा कि राष्ट्रीय निर्वाचन आयोग को पहले से मतपत्रों की कमी की आशंका थी, लेकिन समय पर उचित कदम नहीं उठाए गए। उन्होंने कहा कि इसी लापरवाही के कारण चुनाव प्रक्रिया पर अनावश्यक संदेह पैदा हुआ। पार्टी का कहना है कि संसदीय जांच के जरिए चुनाव आयोग की संरचनात्मक कमजोरियों और प्रशासनिक कमियों की पहचान की जाएगी, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाएं दोबारा न हों।क्या जनता का भरोसा बचाना अब सबसे बड़ी चुनौती बन गया है?
दक्षिण कोरिया में चुनावी प्रक्रिया हमेशा पारदर्शिता और तकनीकी व्यवस्था के लिए जानी जाती रही है। लेकिन इस घटना के बाद जनता के बीच अविश्वास बढ़ा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अगर इस मामले की निष्पक्ष जांच नहीं हुई तो इसका असर आने वाले राष्ट्रीय चुनावों पर भी पड़ सकता है। दोनों दल अब जनता को यह भरोसा दिलाने की कोशिश कर रहे हैं कि मतदान अधिकार पूरी तरह सुरक्षित रहेंगे और चुनावी व्यवस्था में सुधार किया जाएगा।क्या संसद में जल्द होगा बड़ा फैसला?
अब इस पूरे मामले पर दक्षिण कोरिया की संसद में बड़ा फैसला होने की संभावना है। दोनों दल जांच को लेकर बातचीत जारी रखे हुए हैं। माना जा रहा है कि जल्द ही प्रस्ताव को पूर्ण सदन में मतदान के लिए लाया जा सकता है। अगर संसदीय जांच शुरू होती है तो चुनाव आयोग के कई अधिकारियों से पूछताछ हो सकती है। दक्षिण कोरिया की राजनीति में यह मामला अब सिर्फ चुनावी गड़बड़ी नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक व्यवस्था की विश्वसनीयता से जुड़ा बड़ा मुद्दा बन चुका है।