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भारत के बाद अब चीन जाएंगे नेपाली विदेश मंत्री: द्विपक्षीय संबंधों पर होगी चर्चा, क्या है यात्रा के मायने?

पीटीआई, काठमांडू। Published by: राकेश कुमार Updated Mon, 08 Jun 2026 03:43 PM IST
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सार

नेपाल के विदेश मंत्री शिसिर खनाल 15-16 जून को अपने पहले आधिकारिक चीन दौरे पर जा रहे हैं। अपनी इस दो दिवसीय यात्रा के दौरान वह चीनी विदेश मंत्री वांग यी और कम्युनिस्ट पार्टी के नेता लिउ हैक्सिंग से मुलाकात करेंगे। इससे ठीक पहले वह पांच से सात जून तक भारत की सफल यात्रा संपन्न कर चुके हैं।
 

nepal foreign minister shisir khanal to visit china in-mid june
शिसिर खनाल, विदेश मंत्री, नेपाल - फोटो : @अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार

नेपाल के विदेश मंत्री शिसिर खनाल जल्द ही चीन की आधिकारिक यात्रा पर जाने वाले हैं। उनके सचिवालय ने सोमवार को इस बात की पुष्टि की है। विदेश मंत्री का कार्यभार संभालने के बाद यह उनका पहला चीन दौरा होगा। सचिवालय से मिली जानकारी के मुताबिक, विदेश मंत्री शिसिर खनाल 15 से 16 जून तक चीन के दो दिवसीय दौरे पर रहेंगे।


दो दिवसीय दौरे का पूरा कार्यक्रम
इस संक्षिप्त लेकिन बेहद महत्वपूर्ण यात्रा के दौरान वह कई उच्च स्तरीय बैठकें करेंगे। वह चीन के विदेश मंत्री वांग यी के साथ द्विपक्षीय वार्ता करेंगे। इसके अलावा, चीनी कम्युनिस्ट पार्टी के अंतरराष्ट्रीय विभाग के प्रमुख लिउ हैक्सिंग से भी उनकी मुलाकात होने की उम्मीद है। अपनी इस यात्रा के दौरान वह चीन में रहने वाले नेपाली प्रवासियों के एक कार्यक्रम में भी शामिल होंगे और उनसे बातचीत करेंगे।
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भारत यात्रा के तुरंत बाद चीन का रुख
विदेश मंत्री शिसिर खनाल का यह चीन दौरा उनके भारत दौरे के तुरंत बाद हो रहा है। वह पांच से सात जून तक भारत की तीन दिवसीय आधिकारिक यात्रा पर थे। काठमांडू लौटने के बाद उन्होंने अपनी भारत यात्रा को बेहद 'सफल और फलदायी' बताया था। उन्होंने कहा था कि इस यात्रा से दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने की दिशा में ठोस कदम उठाए गए हैं। भारत दौरे के ठीक बाद चीन जाने के उनके इस फैसले को कूटनीतिक हलकों में बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। वह 16 जून को वापस काठमांडू लौट आएंगे।

दोनों दौरों के कूटनीतिक मायने और एजेंडा
विशेषज्ञों के अनुसार, शिसिर खनाल का यह कदम नेपाल की संतुलित विदेश नीति को बता रहा है। वह किसी एक देश की तरफ झुकाव नहीं रखना चाहते हैं। भारत दौरे में उन्होंने द्विपक्षीय बातचीत से सीमा विवाद सुलझाने पर जोर दिया था। इसके साथ ही दोनों देशों के बीच व्यापार और बिजली निर्यात पर बात हुई थी। अब चीन दौरे में वह बुनियादी ढांचा परियोजनाओं पर चर्चा करेंगे। नेपाल के नए राजनेता अब विकास की कूटनीति पर भरोसा कर रहे हैं। वे भारत से रिश्ते मजबूत रखकर चीन से आर्थिक फायदा लेना चाहते हैं।
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