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Easter Attacks Probe: अब विदेश यात्रा नहीं कर पाएंगे पूर्व राष्ट्रपति गोटाबाया राजपक्षे, कोर्ट ने लगाई रोक
पीटीआई, कोलंबो।
Published by: निर्मल कांत
Updated Wed, 03 Jun 2026 04:04 PM IST
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सार
Easter Attacks Probe: श्रीलंका की अदालत ने 2019 के ईस्टर बम धमाकों की जांच के चलते पूर्व राष्ट्रपति गोटाबाया राजपक्षे समेत कुछ पूर्व सैन्य अधिकारियों की विदेश यात्रा पर रोक लगा दी है। जांच एजेंसियों को आशंका है कि इनके देश छोड़ने से जांच प्रभावित हो सकती है। मामले में पूर्व खुफिया प्रमुख सुरेश सल्ले को भी संदिग्ध मानकर हिरासत में रखा गया है। पढ़िए रिपोर्ट-
श्रीलंका के पूर्व राष्ट्रपति गोटाबाया राजपक्षे
- फोटो : ANI
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विस्तार
श्रीलंका की एक कोर्ट ने 2019 के ईस्टर आतंकी हमले की जांच के सिलसिले में पूर्व राष्ट्रपति गोटाबाया राजपक्षे और दो पूर्व सैन्य अधिकारियों के विदेश यात्रा करने पर रोक लगा दी है।
कोलंबो फोर्ट मजिस्ट्रेट अदालत ने यह आदेश आपराधिक जांच विभाग (सीआईडी) की ओर से दायर याचिका पर विचार करने के बाद दिया। सीआईडी 21 अप्रैल 2019 को हुए आत्मघाती बम धमाकों की जांच कर रही है। इन धमाकों में देशभर के चर्चों और लग्जरी होटलों को निशाना बनाया गया था। हमलों में 11 भारतीयों समेत 270 लोगों की मौत हुई थी।
यह यात्रा प्रतिबंध सेना के कर्नल मोहम्मद अंसार और पूर्व खुफिया अधिकारी प्रेमानंद उदालागामा उर्फ सिल्वा पर भी लागू होगा।
मजिस्ट्रेट पसान अमरसेकरा ने यह आदेश उस समय जारी किया, जब राज्य की खुफिया एजेंसी के पूर्व प्रमुख सुरेश सल्ले से जुड़े मामले की सुनवाई अदालत में हुई। सुरेश सल्ले को इस मामले में संदिग्ध माना गया है। हमलों के कथित मुख्य साजिशकर्ता का पता लगाने की जांच के तहत उन्हें 25 फरवरी को गिरफ्तार किया गया था और फिलहाल उन्हें हिरासत में रखा गया है।
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हमले के समय सल्ले विदेश में एक राजनयिक पद पर कार्यरत थे। वर्ष 2015 से पहले महिंदा राजपक्षे सरकार के दौरान वह राज्य खुफिया सेवा के प्रमुख रह चुके थे। पुलिस ने कोर्ट को बताया कि यदि गोटाबाया राजपक्षे और दोनों सैन्य अधिकारी देश छोड़कर चले जाते हैं, तो चल रही जांच प्रभावित हो सकती है।
गोटाबाया राजपक्षे पर क्या आरोप हैं?
पूर्व राष्ट्रपति महिंदा राजपक्षे के छोटे भाई गोटाबाया राजपक्षे ने बम धमाकों के कुछ समय बाद राष्ट्रपति पद के लिए अपनी उम्मीदवारी की घोषणा की थी। बाद में उन्होंने नवंबर 2019 का राष्ट्रपति चुनाव जीत लिया था। जांचकर्ताओं का आरोप है कि ईस्टर हमलों का इस्तेमाल ऐसा असुरक्षा का माहौल बनाने के लिए किया गया हो सकता है, जिससे गोटाबाया राजपक्षे के चुनाव अभियान को फायदा मिला। हालांकि, कोर्ट में अब तक ऐसा कोई आरोप साबित नहीं हुआ है।
जुलाई 2022 में श्रीलंका के कई दशकों के सबसे गंभीर आर्थिक संकट के दौरान बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शनों के बाद गोटाबाया राजपक्षे को राष्ट्रपति पद से इस्तीफा देना पड़ा था। उनके आलोचकों ने उनकी सरकार पर आर्थिक कुप्रबंधन और भ्रष्टाचार के आरोप लगाए थे। गोटाबाया राजपक्षे ने बम धमाकों से जुड़ी किसी भी साजिश में शामिल होने के आरोपों से बार-बार इनकार किया है।
किसने किए थे हमले?
ईस्टर हमले स्थानीय इस्लामी चरमपंथी संगठन नेशनल तौहीद जमात ने किए थे, जिसका संबंध आईएसआईएस से बताया गया था। हमलावरों ने कोलंबो और देश के अन्य हिस्सों में स्थित तीन चर्चों और तीन लग्जरी होटलों को निशाना बनाया था।
ये भी पढ़ें: यूएस के साथ जंग में ईरान की अनोखी रणनीति, सूचना युद्ध से दुनिया को दिए पांच बड़े संदेश
इस हमले ने श्रीलंका की सुरक्षा व्यवस्था की गंभीर खामियों को उजागर कर दिया था। उस समय राष्ट्रपति मैत्रीपाला सिरिसेना के नेतृत्व वाली सरकार पर आरोप लगा था कि भारत की ओर से संभावित आतंकी हमले की पहले से दी गई खुफिया चेतावनियों के बावजूद उसने हमलों को रोकने के लिए पर्याप्त कार्रवाई नहीं की। राष्ट्रपति अनुरा कुमारा दिसानायके के नेतृत्व वाली मौजूदा नेशनल पीपुल्स पावर (एनपीपी) सरकार ने 2024 के अंत में ईस्टर आतंकी हमले की जांच फिर से शुरू की थी। सरकार का कहना है कि पहले राजनीतिक प्रभाव के कारण मामले को दबाने की कोशिश की गई थी।
कोलंबो फोर्ट मजिस्ट्रेट अदालत ने यह आदेश आपराधिक जांच विभाग (सीआईडी) की ओर से दायर याचिका पर विचार करने के बाद दिया। सीआईडी 21 अप्रैल 2019 को हुए आत्मघाती बम धमाकों की जांच कर रही है। इन धमाकों में देशभर के चर्चों और लग्जरी होटलों को निशाना बनाया गया था। हमलों में 11 भारतीयों समेत 270 लोगों की मौत हुई थी।
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यह यात्रा प्रतिबंध सेना के कर्नल मोहम्मद अंसार और पूर्व खुफिया अधिकारी प्रेमानंद उदालागामा उर्फ सिल्वा पर भी लागू होगा।
मजिस्ट्रेट पसान अमरसेकरा ने यह आदेश उस समय जारी किया, जब राज्य की खुफिया एजेंसी के पूर्व प्रमुख सुरेश सल्ले से जुड़े मामले की सुनवाई अदालत में हुई। सुरेश सल्ले को इस मामले में संदिग्ध माना गया है। हमलों के कथित मुख्य साजिशकर्ता का पता लगाने की जांच के तहत उन्हें 25 फरवरी को गिरफ्तार किया गया था और फिलहाल उन्हें हिरासत में रखा गया है।
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हमले के समय सल्ले विदेश में एक राजनयिक पद पर कार्यरत थे। वर्ष 2015 से पहले महिंदा राजपक्षे सरकार के दौरान वह राज्य खुफिया सेवा के प्रमुख रह चुके थे। पुलिस ने कोर्ट को बताया कि यदि गोटाबाया राजपक्षे और दोनों सैन्य अधिकारी देश छोड़कर चले जाते हैं, तो चल रही जांच प्रभावित हो सकती है।
गोटाबाया राजपक्षे पर क्या आरोप हैं?
पूर्व राष्ट्रपति महिंदा राजपक्षे के छोटे भाई गोटाबाया राजपक्षे ने बम धमाकों के कुछ समय बाद राष्ट्रपति पद के लिए अपनी उम्मीदवारी की घोषणा की थी। बाद में उन्होंने नवंबर 2019 का राष्ट्रपति चुनाव जीत लिया था। जांचकर्ताओं का आरोप है कि ईस्टर हमलों का इस्तेमाल ऐसा असुरक्षा का माहौल बनाने के लिए किया गया हो सकता है, जिससे गोटाबाया राजपक्षे के चुनाव अभियान को फायदा मिला। हालांकि, कोर्ट में अब तक ऐसा कोई आरोप साबित नहीं हुआ है।
जुलाई 2022 में श्रीलंका के कई दशकों के सबसे गंभीर आर्थिक संकट के दौरान बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शनों के बाद गोटाबाया राजपक्षे को राष्ट्रपति पद से इस्तीफा देना पड़ा था। उनके आलोचकों ने उनकी सरकार पर आर्थिक कुप्रबंधन और भ्रष्टाचार के आरोप लगाए थे। गोटाबाया राजपक्षे ने बम धमाकों से जुड़ी किसी भी साजिश में शामिल होने के आरोपों से बार-बार इनकार किया है।
किसने किए थे हमले?
ईस्टर हमले स्थानीय इस्लामी चरमपंथी संगठन नेशनल तौहीद जमात ने किए थे, जिसका संबंध आईएसआईएस से बताया गया था। हमलावरों ने कोलंबो और देश के अन्य हिस्सों में स्थित तीन चर्चों और तीन लग्जरी होटलों को निशाना बनाया था।
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इस हमले ने श्रीलंका की सुरक्षा व्यवस्था की गंभीर खामियों को उजागर कर दिया था। उस समय राष्ट्रपति मैत्रीपाला सिरिसेना के नेतृत्व वाली सरकार पर आरोप लगा था कि भारत की ओर से संभावित आतंकी हमले की पहले से दी गई खुफिया चेतावनियों के बावजूद उसने हमलों को रोकने के लिए पर्याप्त कार्रवाई नहीं की। राष्ट्रपति अनुरा कुमारा दिसानायके के नेतृत्व वाली मौजूदा नेशनल पीपुल्स पावर (एनपीपी) सरकार ने 2024 के अंत में ईस्टर आतंकी हमले की जांच फिर से शुरू की थी। सरकार का कहना है कि पहले राजनीतिक प्रभाव के कारण मामले को दबाने की कोशिश की गई थी।