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सौरमंडल: सतह से 4 करोड़ डिग्री तक अधिक गर्म है सूर्य की बाहरी परत; भारत के आदित्य एल-1 का डाटा, नियमों पर सवाल

Sat, 15 Aug 2026 03:07 PM IST
ज्योति भास्कर एजेंसी, नई दिल्ली।
एजेंसी, नई दिल्ली। Published by: ज्योति भास्कर Updated Sat, 15 Aug 2026 03:07 PM IST
सार

सौरमंडल और अंतरिक्ष के रहस्यों को जानने के लिए वैज्ञानिक लगातार अध्ययन कर रहे हैं। भारतीय अंतरिक्ष एजेंसी- ISRO ने सूर्य की सतह का अध्ययन करने के लिए आदित्य-एल1 मिशन भेजा है। इससे मिले डाटा के मुताबिक सूर्य की बाहरी परत सतह से 4 करोड़ डिग्री तक ज्यादा गर्म है।

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Sun outer layer study 40 million degrees more heat than surface Aditya-L1 Data India study and physics theory
आदित्य एल-1 मिशन से मिला डाटा, सर्य की सतह का हो रहा अध्ययन - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स-एआई

विस्तार

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के पहले सौर मिशन आदित्य-एल1 ने सूरज से जुड़े एक सबसे बड़े और उलझे हुए रहस्य से पर्दा उठाया है। भारतीय खगोल भौतिकी संस्थान (आईआईए) के वैज्ञानिकों ने यह पता लगाया कि सूर्य का बाहरी हिस्सा यानी कोरोना उसकी सतह से लाखों गुना ज्यादा गर्म क्यों रहता है और सौर तूफानों के दौरान भारी मात्रा में ऊर्जा गंवाने के बाद भी वह अपनी ठंडक या ऊर्जा को कैसे बरकरार रखता है।

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क्या सूर्य का सबसे बड़ा रहस्य सुलझा?
अध्ययन का नेतृत्व करने वाले प्रो. आर. रमेश के अनुसार, वैज्ञानिकों ने दो प्रमुख तंत्रों (मैकेनिज्म) का अध्ययन किया। इसमें पहला, सूर्य की सतह की खौलती हुई गतिविधियों से पैदा होने वाली तरंगें और दूसरा, सूर्य के वायुमंडल में उलझे हुए चुंबकीय क्षेत्र रेखाओं का टूटना और फिर से जुड़ना।

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  • सूर्य की सतह की खौलती हुई गतिविधियों से पैदा होने वाली तरंगों का हुआ अध्ययन, वैज्ञानिक बोले, चुंबकीय रेखाओं का टूटना और जुड़ना है असली ताकत।
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सूर्य की सतह का तापमान कितना?
द एस्ट्रोफिजिकल जर्नल लेटर्स पत्रिका में प्रकाशित अध्ययन के मुताबिक, सामान्य नियमों के विपरीत, सूर्य की सतह का तापमान लगभग 5,500 डिग्री सेल्सियस है, जबकि इसके केंद्र (कोर) का तापमान 1.5 करोड़ डिग्री सेल्सियस है। हालांकि, हैरानी वाली बात ये है कि सतह से बहुत दूर स्थित कोरोना का तापमान 20 लाख से 40 लाख डिग्री सेल्सियस तक पहुंच जाता है।


आदित्य -एल1 पर लगे विजिबल एमिशन लाइन के डेटा का इस्तेमाल
5 अगस्त 2024 को हुए एक शक्तिशाली सौर विस्फोट का अध्ययन करने के लिए आदित्य-एल1 पर लगे विजिबल एमिशन लाइन कोरोनाग्राफ के डेटा का उपयोग किया गया। इसमें पता चला कि सतह की तरंगें कोरोना की कुल ऊर्जा जरूरत का मात्र सात फीसदी हिस्सा ही योगदान देती हैं। वहीं, शेष 93 फीसदी ऊर्जा का मुख्य स्रोत चुंबकीय क्षेत्र रेखाओं का पुनः जुड़ना है। विस्फोट के बाद लगभग 10 घंटों के भीतर इन रेखाओं ने अपनी स्थिति पुनः प्राप्त कर ली और ऊर्जा की भरपाई कर ली।

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