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तालिबानी शासन के पांच साल: अफगान महिलाओं से छिना पढ़ने, काम करने और सपने देखने का हक; कैसे जिंदा हैं उम्मीदें?
Wed, 12 Aug 2026 02:12 AM IST
हिमांशु सिंह चंदेल
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, काबुल
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, काबुल
Published by: हिमांशु सिंह चंदेल
Updated Wed, 12 Aug 2026 02:12 AM IST
सार
तालिबान शासन के पांच साल पूरे होने के बीच अफगान महिलाओं की जिंदगी पर लगी पाबंदियों की दर्दनाक तस्वीर सामने आई। पूर्व महिला सैनिक से वर्दी छीन ली गई तो सोफिया मालेक चोरी-छिपे पढ़ाई और लेखन जारी रख रही हैं। विदेश पहुंच चुकी महिलाएं भी पीछे छूटी सहेलियों को याद कर रही हैं। सवाल है कि जब पढ़ाई, नौकरी और आजादी के रास्ते बंद हों, तब क्या सपनों को भी रोका जा सकता है? आइए, विस्तार से पूरे मामले को जानते हैं...
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अफगानिस्तान में महिलाओं के लिए हर कदम पर डर
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
अफगानिस्तान में तालिबान शासन के पांच साल पूरे होने के बीच वहां की लड़कियों और महिलाओं की जिंदगी पर पाबंदियों की तस्वीर सामने आई है। पढ़ाई, नौकरी और आजादी के रास्ते बंद होने के बावजूद कई महिलाएं अपने सपनों को बचाने की कोशिश कर रही हैं। बल्ख की 23 वर्षीय सोफिया मालेक चोरी-छिपे ऑनलाइन कक्षाएं लेकर साहित्य पढ़ रही हैं और उपन्यास लिख रही हैं, जबकि हेरात की पूर्व महिला सैनिक पारस्तो को अपनी वर्दी तक छोड़नी पड़ी। इन महिलाओं की कहानियां बताती हैं कि पाबंदियों के बीच भी पढ़ने, लिखने और अपने पैरों पर खड़े होने की इच्छा खत्म नहीं हुई है।
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तालिबान के शासन में महिलाओं की जिंदगी कैसे बदल गई?
तालिबान के सत्ता में आने के बाद अफगानिस्तान में लड़कियों और महिलाओं के सामने कई तरह की पाबंदियां खड़ी हो गईं। पढ़ाई और काम के अवसर सीमित हुए तो उनके लिए सामान्य जीवन जीना भी मुश्किल हो गया। कई महिलाओं को अपने पुराने काम और पहचान से हाथ धोना पड़ा। हेरात की रहने वाली पारस्तो छह साल तक समर्पित सैनिक के तौर पर अफगानिस्तान की सेवा कर चुकी थीं। लेकिन तालिबान के सत्ता में आने के बाद उन्हें और उनकी महिला साथियों को बुलाकर वर्दी सौंपने के लिए कहा गया। उनके मुताबिक, वर्दी छिनने का एहसास ऐसा था जैसे उनसे जीने का अधिकार ही छीन लिया गया हो।
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