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Hindi News ›   World ›   Major US move on Tibet: New bill introduced in the Senate; is there a plan to corner China?

तिब्बत को लेकर अमेरिका का बड़ा फैसला: सीनेट में पेश किया नया विधेयक, क्या चीन को घेरने की है तैयारी?

Wed, 12 Aug 2026 07:59 AM IST
अस्मिता त्रिपाठी एएनआई, वाशिंगटन
एएनआई, वाशिंगटन Published by: अस्मिता त्रिपाठी Updated Wed, 12 Aug 2026 07:59 AM IST
सार

अमेरिकी सीनेट में तिब्बत के भविष्य को सुनिश्चित करने वाला AFTA विधेयक पेश हुआ। इसका उद्देश्य तिब्बती लोगों के आत्मनिर्णय के अधिकार और लोकतांत्रिक नेतृत्व का समर्थन करना है। बिल में केंद्रीय तिब्बती प्रशासन को अंतरराष्ट्रीय मंचों पर पर्यवेक्षक का दर्जा दिलाने  बात कही गई है। आईए जानतें हैं कि इस बिल में और क्या- क्या है? 

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Major US move on Tibet: New bill introduced in the Senate; is there a plan to corner China?
तिब्बत पर अमेरिका का बड़ा कदम - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

अमेरिकी सीनेट ने तिब्बत के भविष्य को सुनिश्चित करने वाला अधिनियम (एएफटीए) पेश किया है। इसका उद्देश्य तिब्बती लोगों और उनके लोकतांत्रिक रूप से निर्वाचित नेतृत्व के साथ वाशिंगटन की भागीदारी को मजबूत करना है। इसके साथ ही उनके आत्मनिर्णय के अधिकार का समर्थन करना है।

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सीनेटर जेफ मर्कले (डी-ओआर) और जिम रिस्क (आर-आईडी) की ओर से पेश किए गए इस विधेयक को सीनेटर टिम केन (डी-वीए), टॉड यंग (आर-आईएन), जैकी रोसेन (डी-एनवी) और रिक स्कॉट (आर-एफएल) ने सह-प्रायोजित किया है। सीनेट का विधेयक तिब्बत के भविष्य को सुनिश्चित करने वाले अधिनियम का पूरक विधेयक है। 

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कार्यकारी निदेशक ने विधेयक पर क्या कहा? 
तिब्बत के लिए अंतरराष्ट्रीय अभियान के कार्यकारी निदेशक रयान फायरेसी ने विधेयक पेश किए जाने का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि यह कानून इस बात को मान्यता देता है कि तिब्बती लोगों को अपने भविष्य का निर्धारण करने में अपनी बात रखने का अधिकार होना चाहिए।

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इस विधेयक का मूलभूत सिद्धांत क्या है? 
उन्होंने आगे कहा, 'इंटरनेशनल कैंपेन फॉर तिब्बत इस विधेयक को जल्द पारित कराने के लिए कांग्रेस के साथ मिलकर काम करने के लिए तत्पर है। यह विधेयक एक मूलभूत सिद्धांत को मान्यता देता है कि तिब्बती लोगों को खुद अपने भविष्य का निर्णय करना चाहिए।


'अश्योरिंग द फ्यूचर ऑफ तिब्बत एक्ट' के तहत संयुक्त राज्य अमेरिका की नीति तिब्बती लोगों के साथ सीधे और उनके लोकतांत्रिक रूप से निर्वाचित नेतृत्व के माध्यम से संपर्क बनाए रखना अनिवार्य होगा। यह अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत तिब्बती लोगों के मौलिक और  मानवाधिकारों के स्वतंत्र प्रयोग का समर्थन करता है, जिसमें आत्मनिर्णय का अधिकार भी शामिल है। 

तिब्बत और चीन विवाद पर क्या कहा? 
इस विधेयक में यह भी कहा गया है कि केंद्रीय तिब्बती प्रशासन दलाई लामा की ओर से स्थापित तिब्बती लोगों के शासन की निरंतरता का प्रतिनिधित्व करता है। उन्होंने आगे कहा, 'यह विधेयक इस बात की पुष्टि करता है कि तिब्बत और चीन के बीच विवाद का समाधान करना संयुक्त राज्य अमेरिका के रणनीतिक हित में है। 

इस विधेयक में क्या है? 
फायरेसी ने कहा, 'यह अमेरिकी सरकार को निर्देश देता है कि वह संयुक्त राष्ट्र प्रणाली के साथ-साथ अन्य संबंधित अंतरराष्ट्रीय निकायों में सीटीए को पर्यवेक्षक का दर्जा दिलाने के लिए पैरवी करे। साथ ही, यह अमेरिकी सरकार को सीटीए के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ संवाद स्थापित करने का निर्देश देता है। दशकों से, परम पावन दलाई लामा तिब्बतियों को आवाज देने और उनकी स्वतंत्रता और गरिमा की आकांक्षाओं को संरक्षित करने वाले लोकतांत्रिक संस्थानों के निर्माण के लिए काम कर रहे हैं।'

उन्होंने आगे कहा, 'केंद्रीय तिब्बती प्रशासन उस दृष्टिकोण की लोकतांत्रिक अभिव्यक्ति है। ऐसे समय में जब चीन तिब्बती पहचान को मिटाने के अपने अभियान को तेज कर रहा है, यह विधेयक एक सशक्त संदेश देता है कि तिब्बती आंदोलन की लोकतांत्रिक संस्थाओं और तिब्बती लोगों के आत्मनिर्णय के अधिकार के लिए अमेरिका का समर्थन अटूट है।'

 

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