{"_id":"697531fdc1fd4418ad097d80","slug":"trump-heaps-praise-on-uk-troops-following-furore-over-afghanistan-comments-2026-01-25","type":"story","status":"publish","title_hn":"अफगानिस्तान पर ट्रंप का यू-टर्न: ब्रिटिश सैनिकों को बताया 'दुनिया के महानतम योद्धा', स्टार्मर ने की थी आलोचना","category":{"title":"World","title_hn":"दुनिया","slug":"world"}}
अफगानिस्तान पर ट्रंप का यू-टर्न: ब्रिटिश सैनिकों को बताया 'दुनिया के महानतम योद्धा', स्टार्मर ने की थी आलोचना
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, लंदन
Published by: पवन पांडेय
Updated Sun, 25 Jan 2026 02:26 AM IST
विज्ञापन
सार
Trump Heaps Praise UK Troops: अफगानिस्तान में नाटो की कार्रवाई को लेकर अपने बयान पर बवाल मचने के बाद अब डोनाल्ड ट्रंप ने ब्रिटिश सैनिकों की तारीफ की है। ट्रंप के ताजा बयान को ब्रिटिश सैनिकों के सम्मान में एक नरमी के तौर पर देखा जा रहा है, लेकिन उन्होंने अपने पुराने विवादित शब्दों के लिए अब तक साफ तौर पर माफी नहीं मांगी है।
डोनाल्ड ट्रंप, अमेरिकी राष्ट्रपति
- फोटो : ANI
विज्ञापन
विस्तार
अफगानिस्तान युद्ध को लेकर दिए गए अपने बयानों पर ब्रिटेन में भारी नाराजगी झेलने के बाद अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अब ब्रिटिश सैनिकों की खुलकर तारीफ की है। उन्होंने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में ब्रिटेन के सैनिकों को बहादुर और महान योद्धा बताते हुए कहा कि अमेरिका और ब्रिटेन की सेनाओं के बीच का रिश्ता कभी टूट नहीं सकता।
यह भी पढ़ें - अमेरिकी प्रवासन नीति पर सवाल: मिनियापोलिस में ट्रंप के अफसरों ने एक और व्यक्ति को मारी गोली, राज्य में तनाव
स्टार्मर से बातचीत के बाद बदला ट्रंप का सुर
ट्रंप ने यह बात ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीएर स्टार्मर से बातचीत के बाद कही। उन्होंने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'ट्रुथ सोशल' पर लिखा, 'यूनाइटेड किंगडम के महान और बेहद बहादुर सैनिक हमेशा अमेरिका के साथ रहेंगे।' उन्होंने अफगानिस्तान युद्ध में मारे गए 457 ब्रिटिश सैनिकों और गंभीर रूप से घायल हुए जवानों को 'दुनिया के सबसे महान योद्धाओं में से' बताया। साथ ही कहा कि ब्रिटेन की सेना 'दिल और आत्मा से भरी हुई है' और अमेरिका को छोड़कर 'कोई भी उसके बराबर नहीं है।'
दावोस में ट्रंप के बयान से मचा था बवाल
यह बयान ट्रंप के उस पुराने बयान से कुछ अलग था, जो उन्होंने इसी हफ्ते स्विट्जरलैंड के दावोस में एक न्यूज चैनल को दिए इंटरव्यू में दिया था। उस समय उन्होंने कहा था कि उन्हें यकीन नहीं है कि नाटो के बाकी 31 देश जरूरत पड़ने पर अमेरिका का साथ देंगे। उन्होंने यह भी कहा था कि इन देशों के सैनिक 'फ्रंट लाइन से थोड़ा दूर' रहते हैं। इन टिप्पणियों को ब्रिटेन में बहुत अपमानजनक और दुखद माना गया, खासकर उन परिवारों ने इसका कड़ा विरोध किया जिनके अपने लोग अफगानिस्तान युद्ध में मारे गए या गंभीर रूप से घायल हुए।
स्टार्मर ने की थी ट्रंप के बयान की आलोचना
ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीएर स्टार्मर ने ट्रंप के पुराने बयान को 'अपमानजनक और बेहद शर्मनाक' बताया था। उन्होंने कहा था कि ऐसे शब्द उन परिवारों को बहुत चोट पहुंचाते हैं जिन्होंने अपने प्रियजनों को युद्ध में खोया है। हालांकि, ट्रंप ने अपने नए बयान में सीधे तौर पर माफी नहीं मांगी और न ही अपने पुराने बयान को वापस लिया। लेकिन उन्होंने ब्रिटिश सैनिकों की बहादुरी की जमकर सराहना की।
ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कार्यालय (10 डाउनिंग स्ट्रीट) ने बताया कि ट्रंप और स्टार्मर के बीच हुई बातचीत में अफगानिस्तान के साथ-साथ यूक्रेन युद्ध और आर्कटिक क्षेत्र की सुरक्षा जैसे मुद्दों पर भी चर्चा हुई। एक बयान में कहा गया, 'प्रधानमंत्री ने उन बहादुर ब्रिटिश और अमेरिकी सैनिकों की बात उठाई, जिन्होंने अफगानिस्तान में कंधे से कंधा मिलाकर लड़ाई लड़ी। उनमें से कई कभी घर वापस नहीं लौट सके। हमें उनके बलिदान को कभी नहीं भूलना चाहिए।'
यह भी पढ़ें - Bangladesh: बांग्लादेश में मजबूत होता दिख रहा जमात गठबंधन, लेबर पार्टी के साथ 11 पहुंची घटक दलों की संख्या
अल-कायदा और तालिबान के खिलाफ नाटो की कार्रवाई
असलियत यह है कि 9/11 हमलों के बाद अक्तूबर 2001 में अमेरिका ने अफगानिस्तान में अल-कायदा और तालिबान के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय गठबंधन बनाकर कार्रवाई शुरू की थी। इस अभियान में अमेरिका के साथ दर्जनों देशों की सेनाएं शामिल थीं, जिनमें नाटो के देश भी थे। यह पहली बार था जब नाटो का सामूहिक रक्षा नियम लागू किया गया था। अफगानिस्तान में करीब 1.5 लाख से ज्यादा ब्रिटिश सैनिकों ने सेवा दी थी। अमेरिका के बाद ब्रिटेन की सेना वहां सबसे बड़ी संख्या में मौजूद थी। ट्रंप के पुराने बयान पर सिर्फ ब्रिटेन ही नहीं, बल्कि इटली और फ्रांस ने भी नाराजगी जताई है। इन दोनों देशों ने इसे 'अस्वीकार्य' बताया।
अन्य वीडियो
Trending Videos
यह भी पढ़ें - अमेरिकी प्रवासन नीति पर सवाल: मिनियापोलिस में ट्रंप के अफसरों ने एक और व्यक्ति को मारी गोली, राज्य में तनाव
विज्ञापन
विज्ञापन
स्टार्मर से बातचीत के बाद बदला ट्रंप का सुर
ट्रंप ने यह बात ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीएर स्टार्मर से बातचीत के बाद कही। उन्होंने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'ट्रुथ सोशल' पर लिखा, 'यूनाइटेड किंगडम के महान और बेहद बहादुर सैनिक हमेशा अमेरिका के साथ रहेंगे।' उन्होंने अफगानिस्तान युद्ध में मारे गए 457 ब्रिटिश सैनिकों और गंभीर रूप से घायल हुए जवानों को 'दुनिया के सबसे महान योद्धाओं में से' बताया। साथ ही कहा कि ब्रिटेन की सेना 'दिल और आत्मा से भरी हुई है' और अमेरिका को छोड़कर 'कोई भी उसके बराबर नहीं है।'
दावोस में ट्रंप के बयान से मचा था बवाल
यह बयान ट्रंप के उस पुराने बयान से कुछ अलग था, जो उन्होंने इसी हफ्ते स्विट्जरलैंड के दावोस में एक न्यूज चैनल को दिए इंटरव्यू में दिया था। उस समय उन्होंने कहा था कि उन्हें यकीन नहीं है कि नाटो के बाकी 31 देश जरूरत पड़ने पर अमेरिका का साथ देंगे। उन्होंने यह भी कहा था कि इन देशों के सैनिक 'फ्रंट लाइन से थोड़ा दूर' रहते हैं। इन टिप्पणियों को ब्रिटेन में बहुत अपमानजनक और दुखद माना गया, खासकर उन परिवारों ने इसका कड़ा विरोध किया जिनके अपने लोग अफगानिस्तान युद्ध में मारे गए या गंभीर रूप से घायल हुए।
स्टार्मर ने की थी ट्रंप के बयान की आलोचना
ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीएर स्टार्मर ने ट्रंप के पुराने बयान को 'अपमानजनक और बेहद शर्मनाक' बताया था। उन्होंने कहा था कि ऐसे शब्द उन परिवारों को बहुत चोट पहुंचाते हैं जिन्होंने अपने प्रियजनों को युद्ध में खोया है। हालांकि, ट्रंप ने अपने नए बयान में सीधे तौर पर माफी नहीं मांगी और न ही अपने पुराने बयान को वापस लिया। लेकिन उन्होंने ब्रिटिश सैनिकों की बहादुरी की जमकर सराहना की।
ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कार्यालय (10 डाउनिंग स्ट्रीट) ने बताया कि ट्रंप और स्टार्मर के बीच हुई बातचीत में अफगानिस्तान के साथ-साथ यूक्रेन युद्ध और आर्कटिक क्षेत्र की सुरक्षा जैसे मुद्दों पर भी चर्चा हुई। एक बयान में कहा गया, 'प्रधानमंत्री ने उन बहादुर ब्रिटिश और अमेरिकी सैनिकों की बात उठाई, जिन्होंने अफगानिस्तान में कंधे से कंधा मिलाकर लड़ाई लड़ी। उनमें से कई कभी घर वापस नहीं लौट सके। हमें उनके बलिदान को कभी नहीं भूलना चाहिए।'
यह भी पढ़ें - Bangladesh: बांग्लादेश में मजबूत होता दिख रहा जमात गठबंधन, लेबर पार्टी के साथ 11 पहुंची घटक दलों की संख्या
अल-कायदा और तालिबान के खिलाफ नाटो की कार्रवाई
असलियत यह है कि 9/11 हमलों के बाद अक्तूबर 2001 में अमेरिका ने अफगानिस्तान में अल-कायदा और तालिबान के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय गठबंधन बनाकर कार्रवाई शुरू की थी। इस अभियान में अमेरिका के साथ दर्जनों देशों की सेनाएं शामिल थीं, जिनमें नाटो के देश भी थे। यह पहली बार था जब नाटो का सामूहिक रक्षा नियम लागू किया गया था। अफगानिस्तान में करीब 1.5 लाख से ज्यादा ब्रिटिश सैनिकों ने सेवा दी थी। अमेरिका के बाद ब्रिटेन की सेना वहां सबसे बड़ी संख्या में मौजूद थी। ट्रंप के पुराने बयान पर सिर्फ ब्रिटेन ही नहीं, बल्कि इटली और फ्रांस ने भी नाराजगी जताई है। इन दोनों देशों ने इसे 'अस्वीकार्य' बताया।
अन्य वीडियो