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US: सुप्रीम फैसले के बावजूद वसूला जा रहा ट्रंप का अवैध टैरिफ, अमेरिकी आयातकों पर बढ़ा 8.2 अरब डॉलर का दबाव
अमर उजाला नेटवर्क
Published by: लव गौर
Updated Tue, 24 Feb 2026 04:08 AM IST
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सार
सुप्रीम फैसले के बाद भी सीबीपी ने कार्गो प्रणाली सेवा को अपडेट नहीं किया है। रोजर्स एंड ब्राउन कस्टम ब्रोकर्स की ऑपरेशंस डायरेक्टर लॉरी मुलिन्स के मुताबिक कस्टम्स ने अभी तक आईईईपीए टैरिफ कोड रिपोर्ट करने की अनिवार्यता नहीं हटाई है। जब तक सिस्टम में बदलाव नहीं होता, माल की रिलीज के लिए ये टैरिफ दर्ज करना जरूरी बना हुआ है।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप।
- फोटो : पीटीआई
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विस्तार
अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट द्वारा राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के पारस्परिक टैरिफ को अवैध करार देने के बावजूद, अमेरिकी आयातकों को देश में आ रहे माल पर शुल्क चुकाना पड़ रहा है। कारण यह है कि यूएस कस्टम्स एंड बॉर्डर प्रोटेक्शन (सीबीपी) ने अब तक अपने कार्गो सिस्टम मैसेजिंग सर्विस (सीएसएमएस) में जरूरी तकनीकी बदलाव लागू नहीं किए हैं।
सीबीपी की इस देरी का सीधा असर हजारों कंटेनरों पर पड़ा है। ट्रेड डेटा प्लेटफॉर्म विजन के अनुसार शुक्रवार से रविवार के बीच अमेरिकी बंदरगाहों पर पहुंचे लगभग 2,11,000 कंटेनर जिनकी कुल अनुमानित कीमत करीब 8.2 अरब डॉलर है, अब भी इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पावर्स एक्ट (आईईईपीए) के तहत लगाए गए टैरिफ के दायरे में आ रहे हैं।
सुप्रीम फैसले के बाद भी सीबीपी ने कार्गो प्रणाली सेवा को अपडेट नहीं किया है। रोजर्स एंड ब्राउन कस्टम ब्रोकर्स की ऑपरेशंस डायरेक्टर लॉरी मुलिन्स के मुताबिक कस्टम्स ने अभी तक आईईईपीए टैरिफ कोड रिपोर्ट करने की अनिवार्यता नहीं हटाई है। जब तक सिस्टम में बदलाव नहीं होता, माल की रिलीज के लिए ये टैरिफ दर्ज करना जरूरी बना हुआ है।
अराजकता हैं नए 15 फीसदी वैश्विक आयात शुल्क, खतरे में व्यापार समझौता: यूरोपीय संघ
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा सभी आयातों पर तत्काल प्रभाव से 15 प्रतिशत वैश्विक टैरिफ लागू करने के फैसले ने यूरोप में गहरी चिंता पैदा कर दी है। यूरोपीय संघ (ईयू) और ब्रिटेन के अधिकारियों ने इसे वैश्विक व्यापार व्यवस्था के लिए बड़ा झटका बताया है। यूरोपीय संसद की व्यापार समिति ने इसे अमेरिकी प्रशासन की शुद्ध टैरिफ अराजकता करार दिया।ब्रसेल्स ने साफ संकेत दिया है कि अमेरिका के साथ पिछले वर्ष हुए व्यापार समझौते अब खतरे में पड़ सकते हैं।
ये भी पढ़ें: 'टैरिफ से खेलोगे तो पड़ेगा महंगा': ट्रंप ने क्यों कई देशों को दी भारी शुल्क की धमकी? सुप्रीम कोर्ट पर भी बरसे
सीएनबीसी के अनुसार यूरोप और लंदन में अधिकारियों ने वैश्विक व्यापार संबंधों में इस नए उलटफेर पर हैरानी और चिंता जताई। उनका कहना है कि ट्रंप की नई नीति पिछले साल अमेरिका के साथ किए गए व्यापार समझौतों को कमजोर कर सकती है। यूरोपीय संघ के अधिकांश निर्यात पहले ही 15 प्रतिशत शुल्क के दायरे में हैं, जबकि ब्रिटेन के उत्पादों पर 10 प्रतिशत टैरिफ लगता है। अब दोनों पक्षों ने व्हाइट हाउस से स्पष्ट करने को कह है कि नई नीति उनके मौजूदा समझौतों को व्यवहार में कैसे प्रभावित करेगी।
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सीबीपी की इस देरी का सीधा असर हजारों कंटेनरों पर पड़ा है। ट्रेड डेटा प्लेटफॉर्म विजन के अनुसार शुक्रवार से रविवार के बीच अमेरिकी बंदरगाहों पर पहुंचे लगभग 2,11,000 कंटेनर जिनकी कुल अनुमानित कीमत करीब 8.2 अरब डॉलर है, अब भी इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पावर्स एक्ट (आईईईपीए) के तहत लगाए गए टैरिफ के दायरे में आ रहे हैं।
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सुप्रीम फैसले के बाद भी सीबीपी ने कार्गो प्रणाली सेवा को अपडेट नहीं किया है। रोजर्स एंड ब्राउन कस्टम ब्रोकर्स की ऑपरेशंस डायरेक्टर लॉरी मुलिन्स के मुताबिक कस्टम्स ने अभी तक आईईईपीए टैरिफ कोड रिपोर्ट करने की अनिवार्यता नहीं हटाई है। जब तक सिस्टम में बदलाव नहीं होता, माल की रिलीज के लिए ये टैरिफ दर्ज करना जरूरी बना हुआ है।
अराजकता हैं नए 15 फीसदी वैश्विक आयात शुल्क, खतरे में व्यापार समझौता: यूरोपीय संघ
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा सभी आयातों पर तत्काल प्रभाव से 15 प्रतिशत वैश्विक टैरिफ लागू करने के फैसले ने यूरोप में गहरी चिंता पैदा कर दी है। यूरोपीय संघ (ईयू) और ब्रिटेन के अधिकारियों ने इसे वैश्विक व्यापार व्यवस्था के लिए बड़ा झटका बताया है। यूरोपीय संसद की व्यापार समिति ने इसे अमेरिकी प्रशासन की शुद्ध टैरिफ अराजकता करार दिया।ब्रसेल्स ने साफ संकेत दिया है कि अमेरिका के साथ पिछले वर्ष हुए व्यापार समझौते अब खतरे में पड़ सकते हैं।
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सीएनबीसी के अनुसार यूरोप और लंदन में अधिकारियों ने वैश्विक व्यापार संबंधों में इस नए उलटफेर पर हैरानी और चिंता जताई। उनका कहना है कि ट्रंप की नई नीति पिछले साल अमेरिका के साथ किए गए व्यापार समझौतों को कमजोर कर सकती है। यूरोपीय संघ के अधिकांश निर्यात पहले ही 15 प्रतिशत शुल्क के दायरे में हैं, जबकि ब्रिटेन के उत्पादों पर 10 प्रतिशत टैरिफ लगता है। अब दोनों पक्षों ने व्हाइट हाउस से स्पष्ट करने को कह है कि नई नीति उनके मौजूदा समझौतों को व्यवहार में कैसे प्रभावित करेगी।
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