सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   World ›   Trump U-Turn on Iran War: Rising Costs, Oil Crisis and Fear of Endless Conflict

Trump Iran War U-Turn: ईरान से जंग में ट्रंप ने क्यों लिया यू-टर्न? भारी खर्च, तेल संकट और अंतहीन युद्ध का डर

वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वॉशिंगटन Published by: Shivam Garg Updated Tue, 24 Mar 2026 04:56 AM IST
विज्ञापन
सार

ईरान को तबाह करने की चेतावनी देने के सिर्फ 36 घंटे बाद ही ट्रंप ने रुख क्यों बदल लिया? क्या महंगे युद्ध, तेल संकट और सहयोगियों के दबाव ने अमेरिका को पीछे हटने पर मजबूर कर दिया-यही अब सबसे बड़ा सवाल है।

Trump U-Turn on Iran War: Rising Costs, Oil Crisis and Fear of Endless Conflict
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप - फोटो : पीटीआई
विज्ञापन

विस्तार

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 36 घंटे पहले ही ईरान को पूरी तरह बर्बाद करने की धमकी दी थी, अचानक युद्ध-विराम और सार्थक बातचीत की ओर मुड़ गए। दरअसल, ट्रंप अपने ही जाल में फंस गए हैं। अचानक क्या हो गया, आइए जानते हैं इसे...

Trending Videos


इस युद्ध में अमेरिका को रोजाना करीब 1.38 अरब डॉलर खर्च करना पड़ रहा है। शुरुआती 6 दिनों में ही 11.3 अरब डॉलर और अगले 12 दिनों में 16.5 अरब डॉलर खर्च हो चुके हैं। पेंटागन ने 200 अरब डॉलर से अधिक की राशि और मांगी है। इसे कांग्रेस यानी संसद से पारित कराना होगा, जिसके पारित होने की उम्मीद कम है।
विज्ञापन
विज्ञापन


नाटो ने बनाई दूरी, पूरे विश्व में अप्रत्याशित ऊर्जा संकट
कायर एवं कागजी शेर जैसे संबोधन सुनने के बाद भी नाटो समेत सहयोगी देश साथ नहीं आए। 22 देशों ने होर्मुज पर समन्वय के लिए हस्ताक्षर किए। किसी ने युद्धपोत नहीं भेजे। कतर में एलएनजी बंद होने व पांच साल तक अप्रत्याशित संकट से यूरोप में गैस की कीमतें 35% बढ़ गईं। जापान को रणनीतिक भंडार निकालना पड़ा। विचलित अमेरिका चीन व रूस को मजबूत करता है।

तेल दबाव का मुख्य बिंदु है... खाड़ी देशों में अशांति के मायने हैं, कीमतों में भारी उछाल। दुनियाभर में असर दिखने लगा है। अमेरिकी अर्थव्यवस्था पर सीधा असर होने लगा है।

अभी हीलियम, फिर सेमीकंडक्टर
ताइवान करीब 97 प्रतिशत ऊर्जा आयात करता है। उसका एलएनजी भंडार सिर्फ 11 दिन का है। कतर वैश्विक हीलियम का एक तिहाई हिस्सा आपूर्ति करता है, जिसकी सेमीकंडक्टर की चिप बनाने में जरूरत होती है। हीलियम होर्मुज के पीछे संग्रहित है। उर्वरकों का भी संकट होगा। हर एनवीडिया जीपीयू, हर एपल चिप, हर एआई क्लस्टर ह्सिनचू स्थित निर्माण संयंत्र पर निर्भर है, जहां गैस की उपलब्धता कुछ ही दिन की है। ऊर्जा रोटेशन के कारण तकनीक ठप होने से सात प्रमुख देशों को अरबों का नुकसान हुआ है।

सबसे भीषण ऊर्जा संकट
अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी के मुताबिक, नौ देशों में 40 ऊर्जा भंडार युद्ध में बुरी तरह क्षतिग्रस्त हुए हैं। वैश्विक तेल आपूर्ति रोज 11 मिलियन बैरल घटी। यह 1970 के संकटों से अधिक गंभीर है। कोई देश अछूता नहीं। एजेंसी ने युद्ध को आधुनिक इतिहास का सबसे भीषण ऊर्जा संकट बताया। फेडरल रिजर्व ने ब्याज दर में कटौती की संभावनाएं ही नहीं, अमेरिकियों को राहत की उम्मीदें भी खत्म कर दीं।

खाड़ी देशों का दबाव वास्तविक
सऊदी अरब व संयुक्त अरब अमीरात जैसे देश पूर्ण युद्ध नहीं चाहते। वे असुरक्षित हैं और यह बात ट्रंप को स्पष्ट कर दी है।

ईरान आसान निशाना नहीं
ईरान ने मिसाइलों, प्रॉक्सी हथियारों और तेल मार्गों को अवरुद्ध करके बराबरी की जवाबी कार्रवाई करने की क्षमता दिखाई।

खफा अमेरिकी छवि की चिंता
पेट्रोल के दाम 93 सेंट प्रति गैलन बढ़ गए। 66% अमेरिकी इसे अपनी मर्जी का युद्ध कहते हैं। 60% विरोध में हैं। 57% मानते हैं, हालात बिगड़ रहे हैं। ट्रंप बिना नतीजे के किसी भी संघर्ष को बर्दाश्त नहीं कर सकते। छवि मायने रखती है।

लोकप्रियता नहीं बढ़ी... अमेरिका में आशंका है कि युद्ध लंबा खिंच सकता है। ट्रंप एकमात्र ऐसे राष्ट्रपति हैं, जिनकी लोकप्रियता में युद्ध से कोई वृद्धि नहीं हुई।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get latest World News headlines in Hindi related political news, sports news, Business news all breaking news and live updates. Stay updated with us for all latest Hindi news.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

एप में पढ़ें

Followed