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Sheikh Hasina: शेख हसीना के ट्रायल पर ब्रिटिश लॉ फर्म का सवाल, बताया अन्यायपूर्ण; दोबारा सुनवाई की मांग तेज
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, ढाका
Published by: Shivam Garg
Updated Thu, 02 Apr 2026 04:57 AM IST
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सार
ब्रिटिश लॉ फर्म ने बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के ट्रायल को चुनौती दी है। इसे अवैध और पक्षपातपूर्ण बताते हुए पुनः सुनवाई की मांग की गई।
शेख हसीना
- फोटो : एएनआई (फाइल)
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विस्तार
बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के खिलाफ चलाए गए ट्रायल को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है। एक प्रमुख ब्रिटिश लॉ फर्म किंग्सले नेपले ने इस मामले में हस्तक्षेप करते हुए ट्रायल की निष्पक्षता और वैधता पर गंभीर सवाल उठाए हैं।
लंदन स्थित इस लॉ फर्म ने बांग्लादेश के इंटरनेशनल क्राइम्स ट्रिब्यूनल को नोटिस भेजकर कहा है कि हसीना के खिलाफ सुनवाई अन्यायपूर्ण और अवैध परिस्थितियों में की गई। फर्म ने दो हफ्तों के भीतर जवाब मांगा है।
'अनुपस्थिति में सुनवाई, अधिकारों का उल्लंघन'
लॉ फर्म का आरोप है कि 78 वर्षीय हसीना के खिलाफ ट्रायल उनकी अनुपस्थिति में चलाया गया, जो अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत उनके मौलिक अधिकारों का उल्लंघन है। नोटिस में कहा गया कि उन्हें सबूतों तक पहुंच, आरोपों की जानकारी और अपना पक्ष रखने का उचित मौका नहीं दिया गया।
राजनीतिक माहौल पर उठे सवाल
फर्म ने दावा किया कि ट्रायल ऐसे समय हुआ जब देश में राजनीतिक तनाव चरम पर था। हसीना की पार्टी अवामी लीग पर प्रतिबंध लगा दिया गया था और उनके समर्थकों के खिलाफ कार्रवाई हो रही थी। गौरतलब है कि ट्रिब्यूनल ने 17 नवंबर को हसीना को दोषी ठहराते हुए मौत की सजा सुनाई थी। उन पर 2024 में हुए छात्र आंदोलन के दौरान हिंसा भड़काने और करीब 1400 लोगों की मौत के लिए जिम्मेदार ठहराया गया।
न्यायिक प्रक्रिया पर गंभीर आरोप
ब्रिटिश लॉ फर्म ने ट्रिब्यूनल की स्वतंत्रता पर भी सवाल उठाए। उनका कहना है कि जजों की नियुक्ति पारदर्शी नहीं थी और कुछ सदस्यों के राजनीतिक संबंध थे, जिससे निष्पक्षता प्रभावित हुई। फर्म ने मांग की है कि हसीना की सजा को रद्द कर अंतरराष्ट्रीय मानकों के तहत दोबारा निष्पक्ष सुनवाई कराई जाए। साथ ही, अवामी लीग से जुड़े लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की भी अपील की गई है।
अंतरराष्ट्रीय संगठनों की चिंता
इस मामले को लेकर ह्यूमन राइट्स वॉच, एमनेस्टी इंटरनेशनल और अन्य अंतरराष्ट्रीय संगठनों ने भी चिंता जताई है। उनका कहना है कि इतनी तेजी से हुई सुनवाई और प्रक्रिया में पारदर्शिता की कमी न्यायिक व्यवस्था पर सवाल खड़े करती है।
गौरतलब है कि हसीना 2024 में छात्र आंदोलन के बाद सत्ता से हट गई थीं और भारत आ गई थीं। इसके बाद उनके खिलाफ मानवता के खिलाफ अपराध के तहत मामला दर्ज किया गया।
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लंदन स्थित इस लॉ फर्म ने बांग्लादेश के इंटरनेशनल क्राइम्स ट्रिब्यूनल को नोटिस भेजकर कहा है कि हसीना के खिलाफ सुनवाई अन्यायपूर्ण और अवैध परिस्थितियों में की गई। फर्म ने दो हफ्तों के भीतर जवाब मांगा है।
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'अनुपस्थिति में सुनवाई, अधिकारों का उल्लंघन'
लॉ फर्म का आरोप है कि 78 वर्षीय हसीना के खिलाफ ट्रायल उनकी अनुपस्थिति में चलाया गया, जो अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत उनके मौलिक अधिकारों का उल्लंघन है। नोटिस में कहा गया कि उन्हें सबूतों तक पहुंच, आरोपों की जानकारी और अपना पक्ष रखने का उचित मौका नहीं दिया गया।
राजनीतिक माहौल पर उठे सवाल
फर्म ने दावा किया कि ट्रायल ऐसे समय हुआ जब देश में राजनीतिक तनाव चरम पर था। हसीना की पार्टी अवामी लीग पर प्रतिबंध लगा दिया गया था और उनके समर्थकों के खिलाफ कार्रवाई हो रही थी। गौरतलब है कि ट्रिब्यूनल ने 17 नवंबर को हसीना को दोषी ठहराते हुए मौत की सजा सुनाई थी। उन पर 2024 में हुए छात्र आंदोलन के दौरान हिंसा भड़काने और करीब 1400 लोगों की मौत के लिए जिम्मेदार ठहराया गया।
न्यायिक प्रक्रिया पर गंभीर आरोप
ब्रिटिश लॉ फर्म ने ट्रिब्यूनल की स्वतंत्रता पर भी सवाल उठाए। उनका कहना है कि जजों की नियुक्ति पारदर्शी नहीं थी और कुछ सदस्यों के राजनीतिक संबंध थे, जिससे निष्पक्षता प्रभावित हुई। फर्म ने मांग की है कि हसीना की सजा को रद्द कर अंतरराष्ट्रीय मानकों के तहत दोबारा निष्पक्ष सुनवाई कराई जाए। साथ ही, अवामी लीग से जुड़े लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की भी अपील की गई है।
अंतरराष्ट्रीय संगठनों की चिंता
इस मामले को लेकर ह्यूमन राइट्स वॉच, एमनेस्टी इंटरनेशनल और अन्य अंतरराष्ट्रीय संगठनों ने भी चिंता जताई है। उनका कहना है कि इतनी तेजी से हुई सुनवाई और प्रक्रिया में पारदर्शिता की कमी न्यायिक व्यवस्था पर सवाल खड़े करती है।
गौरतलब है कि हसीना 2024 में छात्र आंदोलन के बाद सत्ता से हट गई थीं और भारत आ गई थीं। इसके बाद उनके खिलाफ मानवता के खिलाफ अपराध के तहत मामला दर्ज किया गया।
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