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US: ईरान के साथ सीजफायर राजनीतिक मजूबरी, पूर्व NSA ने ट्रंप सरकार की नीतियों को बताया खतरनाक
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वॉशिंगटन
Published by: अमन तिवारी
Updated Thu, 09 Apr 2026 07:38 AM IST
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सार
अमेरिका के पूर्व एनएसए जॉन बोल्टन ने ईरान-अमेरिका सीजफायर को राजनीतिक मजबूरी बताया है। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर यह समझौता टूटता है तो टकराव और गहरा सकता है। बोल्टन के मुताबिक, ट्रंप का फैसला घरेलू राजनीति और गैस कीमतों के दबाव में लिया गया है।
अमेरिका के पूर्व राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार जॉन बोल्टन
- फोटो : ANI
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विस्तार
अमेरिका के पूर्व राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए) जॉन बोल्टन ने एक बड़ी चेतावनी दी है। उन्होंने कहा कि ईरान के साथ हुआ मौजूदा युद्धविराम केवल राजनीतिक दबाव का नतीजा है। अगर यह समझौता लंबे समय तक नहीं टिका, तो अमेरिका, इस्राइल और ईरान के बीच संघर्ष और भी ज्यादा गहरा सकता है।
बोल्टन ने PTI वीडियोज को दिए एक इंटरव्यू में बताया कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने यह कदम घरेलू राजनीति की वजह से उठाया है। अमेरिका में पेट्रोल की बढ़ती कीमतें और ट्रंप की गिरती लोकप्रियता इसके पीछे मुख्य कारण हैं। बोल्टन का मानना है कि ट्रंप को डर था कि ईरान के साथ लंबा युद्ध उनकी छवि को और खराब कर सकता है। उनके अनुसार, ट्रंप अक्सर देश के हितों से ज्यादा अपने फायदे के बारे में सोचते हैं। अगर उनकी यह सोच जारी रही, तो अमेरिका को भविष्य में भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है।
बोल्टन ने रणनीतिक खतरे का जिक्र करते हुए कहा कि ईरान को हॉर्मुज जलडमरूमध्य पर कब्जा करने देना एक बड़ी गलती होगी। पिछले 50 वर्षों से अमेरिका की यह नीति रही है कि खाड़ी के तेल वाले रास्तों पर किसी एक देश का नियंत्रण न हो। अगर ईरान वहां सबसे ताकतवर खिलाड़ी बनता है, तो यह अमेरिका की बड़ी रणनीतिक हार होगी।
ये भी पढ़ें: निकले थे नायक बनने, बन गए पिछलग्गू: ट्रंप के हाथों कैसे कठपुतली बना पाकिस्तान? शहबाज केवल दर्शक; कहानी कुछ
इस युद्धविराम को कराने में पाकिस्तान, तुर्की और मिस्र ने भी पर्दे के पीछे से भूमिका निभाई है। बोल्टन ने कहा कि ट्रंप और पाकिस्तान के जनरल असीम मुनीर के बीच अच्छे संबंध हैं और ट्रंप उन्हें खुश करना चाहते थे। उन्होंने आगे कहा, अंतरराष्ट्रीय मामलों में ट्रंप के साथ यही दिक्कत है। उन्हें लगता है कि अगर किसी के साथ उनके अच्छे संबंध हैं, तो वह उस पर भरोसा कर सकते हैं, और वह व्यक्ति सही काम करेगा। बोल्टन ने यह भी कहा, हो सकता है चीन ने भी ईरान पर दबाव बनाया होगा ताकि तेल की सप्लाई का रास्ता खुल सके।
ईरान की मौजूदा स्थिति पर बोल्टन ने कहा कि अमेरिकी हमलों ने ईरान की सेना (आईआरजीसी) और वहां के नेतृत्व को काफी चोट पहुंचाई है। लेकिन खतरा अभी टला नहीं है। ईरान की सरकार अभी भी सत्ता में है। बोल्टन ने चेतावनी दी कि अगर ईरान पर से पाबंदियां हटती हैं, तो वह तेल से मिलने वाले पैसे का इस्तेमाल अपने परमाणु और मिसाइल कार्यक्रम को फिर से खड़ा करने में करेगा। यह पूरी दुनिया के लिए एक बड़ा खतरा बन सकता है। बता दें कि बोल्टन ने ट्रंप के पहले कार्यकाल के दौरान उनके राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार के तौर पर काम किया था। अमेरिकी राष्ट्रपति के साथ मतभेदों के चलते उन्हें अपने पद से इस्तीफा देना पड़ा था।
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बोल्टन ने PTI वीडियोज को दिए एक इंटरव्यू में बताया कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने यह कदम घरेलू राजनीति की वजह से उठाया है। अमेरिका में पेट्रोल की बढ़ती कीमतें और ट्रंप की गिरती लोकप्रियता इसके पीछे मुख्य कारण हैं। बोल्टन का मानना है कि ट्रंप को डर था कि ईरान के साथ लंबा युद्ध उनकी छवि को और खराब कर सकता है। उनके अनुसार, ट्रंप अक्सर देश के हितों से ज्यादा अपने फायदे के बारे में सोचते हैं। अगर उनकी यह सोच जारी रही, तो अमेरिका को भविष्य में भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है।
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बोल्टन ने रणनीतिक खतरे का जिक्र करते हुए कहा कि ईरान को हॉर्मुज जलडमरूमध्य पर कब्जा करने देना एक बड़ी गलती होगी। पिछले 50 वर्षों से अमेरिका की यह नीति रही है कि खाड़ी के तेल वाले रास्तों पर किसी एक देश का नियंत्रण न हो। अगर ईरान वहां सबसे ताकतवर खिलाड़ी बनता है, तो यह अमेरिका की बड़ी रणनीतिक हार होगी।
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इस युद्धविराम को कराने में पाकिस्तान, तुर्की और मिस्र ने भी पर्दे के पीछे से भूमिका निभाई है। बोल्टन ने कहा कि ट्रंप और पाकिस्तान के जनरल असीम मुनीर के बीच अच्छे संबंध हैं और ट्रंप उन्हें खुश करना चाहते थे। उन्होंने आगे कहा, अंतरराष्ट्रीय मामलों में ट्रंप के साथ यही दिक्कत है। उन्हें लगता है कि अगर किसी के साथ उनके अच्छे संबंध हैं, तो वह उस पर भरोसा कर सकते हैं, और वह व्यक्ति सही काम करेगा। बोल्टन ने यह भी कहा, हो सकता है चीन ने भी ईरान पर दबाव बनाया होगा ताकि तेल की सप्लाई का रास्ता खुल सके।
ईरान की मौजूदा स्थिति पर बोल्टन ने कहा कि अमेरिकी हमलों ने ईरान की सेना (आईआरजीसी) और वहां के नेतृत्व को काफी चोट पहुंचाई है। लेकिन खतरा अभी टला नहीं है। ईरान की सरकार अभी भी सत्ता में है। बोल्टन ने चेतावनी दी कि अगर ईरान पर से पाबंदियां हटती हैं, तो वह तेल से मिलने वाले पैसे का इस्तेमाल अपने परमाणु और मिसाइल कार्यक्रम को फिर से खड़ा करने में करेगा। यह पूरी दुनिया के लिए एक बड़ा खतरा बन सकता है। बता दें कि बोल्टन ने ट्रंप के पहले कार्यकाल के दौरान उनके राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार के तौर पर काम किया था। अमेरिकी राष्ट्रपति के साथ मतभेदों के चलते उन्हें अपने पद से इस्तीफा देना पड़ा था।
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