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क्या है ऑपरेशन हार्ड बॉल?: लॉरेंस-गोल्डी गैंग पर बड़ी कार्रवाई, अमेरिका-कनाडा-यूरोप में 24 गुर्गे गिरफ्तार

Wed, 08 Jul 2026 05:55 AM IST
Devesh Tripathi वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वॉशिंगटन
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वॉशिंगटन Published by: Devesh Tripathi Updated Wed, 08 Jul 2026 05:55 AM IST
सार

अमेरिका में संघीय ग्रैंड जूरी ने लॉरेंस बिश्नोई और उसके कथित सहयोगियों के खिलाफ नौ आरोपों वाला अभियोग दायर किया है। अभियोजकों का आरोप है कि जेल में रहते हुए भी उसने कई देशों में फैले आपराधिक नेटवर्क का संचालन किया और हत्या, रंगदारी, मादक पदार्थों की तस्करी, अपहरण तथा अन्य गंभीर अपराधों की साजिश रची। आरोपपत्र में गोल्डी बराड़ और रोहित गोदारा को उसके प्रमुख सहयोगियों के रूप में नामित किया गया है।

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लॉरेंस बिश्नोई पर अमेरिका में कार्रवाई - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

अमेरिका, कनाडा और यूरोप में लॉरेंस बिश्नोई और गोल्डी बराड़ समेत भारतीय अपराधियों के तीन गिरोहों के खिलाफ अभियान में 24 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। इनमें से बिश्नोई-बराड़ गिरोह पर खालिस्तान समर्थक आतंकी हरदीप सिंह निज्जर की 2023 में हुई हत्या की साजिश रचने का आरोप लगाया गया है।
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छापे में करीब 1,000 किलोग्राम कोकीन, एक किलोग्राम हेरोइन, 40,000 डॉलर नकद और करीब एक दर्जन हथियार जब्त किए। एफबीआई, लॉस एंजिल्स पुलिस, रॉयल कैनेडियन माउंटेड पुलिस और कई अन्य देशों की सुरक्षा एजेंसियों ने अभियान में समन्वित कार्रवाई की। अभियान को ऑपरेशन हार्ड बॉल नाम दिया गया।
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बिश्नोई गैंग समेत किन गिरोहों पर की गई कार्रवाई?
अमेरिकी अधिकारियों ने तीनों गिरोहों के खिलाफ तीन आरोपपत्र दायर किए हैं, जिनमें कुल 37 लोगों को आरोपी बनाया है। अधिकारियों ने बताया कि कैलिफोर्निया में 11 गिरफ्तारियां हुईं, जबकि बाकी गिरफ्तारियां इंडियाना, जॉर्जिया, कनाडा और स्पेन में हुईं। दस आरोपी अब भी फरार हैं। बिश्नोई-बराड़ के अलावा जग्गू भगवानपुरिया और रविंदर सिंह ढांडा गिरोहों को भी निशाना बनाया। जून, 2023 को ब्रिटिश कोलंबिया के सरे में दो बंदूकधारियों ने निज्जर की गोली मारकर हत्या कर दी थी।
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लॉरेंस बिश्नोई के प्रतिद्वंद्वी जग्गू भगवानपुरिया सिंडिकेट पर पैसे लेकर हत्या करने और ड्रग्स की तस्करी करने के आरोप हैं। कनाडा में रहने वाले रविंदर सिंह ढांडा के नेतृत्व वाले तीसरे नेटवर्क पर आरोप है कि वह ट्रकों के जरिये हर हफ्ते कैलिफोर्निया से कनाडा में सैकड़ों किलो कोकीन, मेथामफेटामाइन की तस्करी करते थे।

बिश्नोई गैंग पर क्यों लगा निज्जर हत्याकांड का आरोप?
अभियान में सबसे अहम घटनाक्रम लॉरेंस गैंग के खिलाफ की गई कार्रवाई है। बिश्नोई भारत की जेल में बंद है और उस पर निज्जर की हत्या का आदेश देने का आरोप लगाया गया है। अमेरिकी आरोप-पत्र के अनुसार, बिश्नोई और उसके अमेरिकी सहयोगी सतिंदरजीत सिंह उर्फ गोल्डी बराड़ ने इस हत्या का निर्देश दिया था। 18 जून, 2023 को सरे, ब्रिटिश कोलंबिया में दो बंदूकधारियों ने 45 वर्षीय निज्जर की गोली मारकर हत्या कर दी थी।

खालिस्तान समर्थक चरमपंथ को लेकर भारत-कनाडा के बीच बढ़ते तनाव के बीच कनाडाई अधिकारी लंबे समय से इस हत्या की जांच कर रहे थे। कैलिफोर्निया के केंद्रीय जिले के अटॉर्नी कार्यालय ने कहा कि आरोप-पत्र में जिन अपराधों का जिक्र है, उनमें भारत के पंजाब के एक प्रमुख राजनीतिक और धार्मिक नेता की हत्या भी शामिल है। अटॉर्नी कार्यालय के दस्तावेजों में उसकी पहचान निज्जर के तौर पर की गई है।

कनाडा ने बिश्नोई गैंग को आतंकी संगठन कर रखा है घोषित
कनाडा ने सितंबर, 2025 में बिश्नोई गैंग को आतंकवादी संगठन घोषित किया था। इस गैंग पर कैलिफोर्निया और कनाडा में लोगों से जबरन वसूली करने, लॉस एंजिल्स इलाके में प्रतिद्वंद्वियों से सैकड़ों किलोग्राम कोकीन चुराने और भारतीय मूल के मशहूर लोगों को धमकाने के आरोप भी हैं। एक मामले में, बिश्नोई ने कनाडा में रहने वाले एक भारतीय मूल के एक्टर और सिंगर के घर पर हुई गोलीबारी की जिम्मेदारी ली थी।

भारतीय समुदाय में डर व हिंसा फैला रहे थे ये गिरोह
अमेरिकी अधिकारियों ने बताया, ये गिरोह भारतीय समुदाय के लोगों में डर और हिंसा फैला रहे हैं। फर्स्ट असिस्टेंट अमेरिकी अटॉर्नी बिल एसेली ने कहा, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपराध करने वाले गिरोहों को कानून का सामना करना होगा। इन गिरोहों पर लगाए गए आरोपों में रैकेट चलाने की साजिश, जबरन वसूली और ड्रग्स की तस्करी शामिल है। दोषी पाए जाने पर कई आरोपियों को उम्रकैद की सजा हो सकती है।


लंबे समय से कार्रवाई की मांग करता रहा है भारत
भारत सरकार लंबे समय से इन गिरोहों के खिलाफ कार्रवाई की मांग करती रही है। भारतीय अधिकारियों का लंबे समय से यह पक्ष रहा है कि कनाडा खालिस्तान-समर्थक चरमपंथियों और उनसे जुड़े आपराधिक गैंग के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने में नाकाम रहा है, जिससे उन्हें भारतीय राजनयिकों, समुदाय के लोगों और विरोधियों को धमकाने का मौका मिला है। आपराधिक गिरोहों के खिलाफ की गई इस कार्रवाई से भारत की चिंता कम करने में मदद मिलेगी।
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