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West Asia: ईरान से बातचीत के बीच रिपोर्ट का बड़ा दावा, पश्चिम एशिया में 10,000 अतिरिक्त सैनिक भेज सकता है US
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वॉशिंगटन
Published by: अमन तिवारी
Updated Fri, 27 Mar 2026 12:24 PM IST
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सार
पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि अमेरिका 10,000 अतिरिक्त सैनिक भेजने की योजना बना रहा है। ईरान से बातचीत जारी रहने के बावजूद यह कदम उठाया जा सकता है। क्षेत्र में पहले से सैन्य गतिविधियां तेज हैं और हालात लगातार बिगड़ते जा रहे हैं।
अमेरिका, ईरान और इस्राइल का झंडा
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच एक रिपोर्ट्स में दावा किया गया गया है कि अमेरिका पश्चिम एशिया में 10,000 अतिरिक्त जमीनी सैनिक भेजने की योजना बना रहा है। रिपोर्ट में कहा गया है कि ईरान के साथ बातचीत चलने के बावजूद अमेरिका यह बड़ा कदम उठा सकता है। यरूशलेम पोस्ट ने वॉल स्ट्रीट जर्नल की एक रिपोर्ट के हवाले से यह जानकारी दी है।
रिपोर्ट में क्या?
रिपोर्ट में युद्ध विभाग के अधिकारियों का हवाला देते हुए बताया गया, इस नई तैनाती में पैदल सेना और बख्तरबंद गाड़ियां शामिल हो सकती हैं। अमेरिका की 82वीं एयरबोर्न डिवीजन पहले से ही इस क्षेत्र में मौजूद है। विशेषज्ञों का कहना है कि इस डिवीजन की तैनाती का सीधा उद्देश्य ईरान के रणनीतिक हितों, जैसे कि खर्ग द्वीप, को निशाना बनाना है। हालांकि रिपोर्ट में कहा गया है कि यह स्पष्ट नहीं है कि अतिरिक्त सेना को कहां भेजा जाएगा या तैनात किया जाएगा।
क्या बोले व्हाइट हाउस प्रेस सचिव?
व्हाइट हाउस की उप प्रेस सचिव अन्ना केली ने इस मामले पर कहा कि सैनिकों की तैनाती से जुड़ी कोई भी आधिकारिक घोषणा युद्ध विभाग ही करेगा। उन्होंने साफ किया कि राष्ट्रपति ट्रंप के पास सभी सैन्य विकल्प उपलब्ध रहते हैं। दूसरी ओर, अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने इस रिपोर्ट पर कोई भी टिप्पणी करने से मना कर दिया है।
ये भी पढ़ें: G7: जी7 की बैठक से अलग कनाडा की विदेश मंत्री से मिले जयशंकर, पश्चिम एशिया और होर्मुज संकट पर हुई बात
यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आए हैं जब अमेरिका-इस्राइल और ईरान के बीच चल रहा यह संघर्ष अब चौथे हफ्ते में प्रवेश कर चुका है। राष्ट्रपति ट्रंप ने हाल ही में ईरान के खिलाफ सैन्य अभियानों में थोड़ी राहत देने के संकेत दिए थे। उन्होंने बताया कि ईरान ने अपने ऊर्जा ठिकानों पर होने वाले अमेरिकी हमलों को सात दिनों के लिए रोकने की मांग की थी। ट्रंप ने इस समय सीमा को बढ़ाकर 10 दिन कर दिया है, जो 6 अप्रैल तक रहेगी। इसके बावजूद अमेरिका और इस्राइल की संयुक्त सेना के हमले लगातार जारी हैं।
ऑपरेशन ट्रू प्रॉमिस 4 की 83वीं लहर शुरू
इस बीच, जवाब में ईरान की 'इस्लामिक रिवोल्यूशन गार्ड्स कॉर्प्स' (आईआरजीसी) ने शुक्रवार तड़के 'ऑपरेशन ट्रू प्रॉमिस 4' की 83वीं लहर शुरू करने का एलान किया। ईरान ने आधुनिक मिसाइलों और ड्रोनों की मदद से क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी और इस्राइली सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया है।
क्षेत्र में बिगड़ते सुरक्षा हालातों के बीच ईरान ने संयुक्त राष्ट्र को उन मीडिया रिपोर्टों की जानकारी दी है, जिनमें ईरानी नेताओं की हत्या की साजिश का जिक्र है। इन रिपोर्टों के अनुसार, अमेरिका और इस्राइल ईरान के संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाकेर गालिबाफ और विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची की हत्या की योजना बना रहे हैं। संयुक्त राष्ट्र में ईरान के राजदूत अमीर सईद इरावानी ने इस पर गहरी चिंता जताई है। उन्होंने गुरुवार को संयुक्त राष्ट्र महासचिव और सुरक्षा परिषद के अध्यक्ष को पत्र लिखकर इस खतरे से अवगत कराया।
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रिपोर्ट में क्या?
रिपोर्ट में युद्ध विभाग के अधिकारियों का हवाला देते हुए बताया गया, इस नई तैनाती में पैदल सेना और बख्तरबंद गाड़ियां शामिल हो सकती हैं। अमेरिका की 82वीं एयरबोर्न डिवीजन पहले से ही इस क्षेत्र में मौजूद है। विशेषज्ञों का कहना है कि इस डिवीजन की तैनाती का सीधा उद्देश्य ईरान के रणनीतिक हितों, जैसे कि खर्ग द्वीप, को निशाना बनाना है। हालांकि रिपोर्ट में कहा गया है कि यह स्पष्ट नहीं है कि अतिरिक्त सेना को कहां भेजा जाएगा या तैनात किया जाएगा।
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क्या बोले व्हाइट हाउस प्रेस सचिव?
व्हाइट हाउस की उप प्रेस सचिव अन्ना केली ने इस मामले पर कहा कि सैनिकों की तैनाती से जुड़ी कोई भी आधिकारिक घोषणा युद्ध विभाग ही करेगा। उन्होंने साफ किया कि राष्ट्रपति ट्रंप के पास सभी सैन्य विकल्प उपलब्ध रहते हैं। दूसरी ओर, अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने इस रिपोर्ट पर कोई भी टिप्पणी करने से मना कर दिया है।
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यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आए हैं जब अमेरिका-इस्राइल और ईरान के बीच चल रहा यह संघर्ष अब चौथे हफ्ते में प्रवेश कर चुका है। राष्ट्रपति ट्रंप ने हाल ही में ईरान के खिलाफ सैन्य अभियानों में थोड़ी राहत देने के संकेत दिए थे। उन्होंने बताया कि ईरान ने अपने ऊर्जा ठिकानों पर होने वाले अमेरिकी हमलों को सात दिनों के लिए रोकने की मांग की थी। ट्रंप ने इस समय सीमा को बढ़ाकर 10 दिन कर दिया है, जो 6 अप्रैल तक रहेगी। इसके बावजूद अमेरिका और इस्राइल की संयुक्त सेना के हमले लगातार जारी हैं।
ऑपरेशन ट्रू प्रॉमिस 4 की 83वीं लहर शुरू
इस बीच, जवाब में ईरान की 'इस्लामिक रिवोल्यूशन गार्ड्स कॉर्प्स' (आईआरजीसी) ने शुक्रवार तड़के 'ऑपरेशन ट्रू प्रॉमिस 4' की 83वीं लहर शुरू करने का एलान किया। ईरान ने आधुनिक मिसाइलों और ड्रोनों की मदद से क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी और इस्राइली सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया है।
क्षेत्र में बिगड़ते सुरक्षा हालातों के बीच ईरान ने संयुक्त राष्ट्र को उन मीडिया रिपोर्टों की जानकारी दी है, जिनमें ईरानी नेताओं की हत्या की साजिश का जिक्र है। इन रिपोर्टों के अनुसार, अमेरिका और इस्राइल ईरान के संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाकेर गालिबाफ और विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची की हत्या की योजना बना रहे हैं। संयुक्त राष्ट्र में ईरान के राजदूत अमीर सईद इरावानी ने इस पर गहरी चिंता जताई है। उन्होंने गुरुवार को संयुक्त राष्ट्र महासचिव और सुरक्षा परिषद के अध्यक्ष को पत्र लिखकर इस खतरे से अवगत कराया।
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