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G7: अमेरिका और नाटो में बढ़ती कलह, ट्रंप की धमकी के चलते जी7 की बैठक में रूबियो की होगी अग्निपरीक्षा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वॉशिंगटन
Published by: Nitin Gautam
Updated Fri, 27 Mar 2026 12:11 PM IST
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सार
फ्रांस में आयोजित जी7 की बैठक ऐसे समय हो रही है, जब अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप पश्चिम एशिया संकट में मदद न करने के लिए नाटो की निंदा कर रहे हैं। पश्चिमी देश भी ईरान युद्ध से खुश नहीं है। ऐसे में मार्को रूबियो को जी7 देशों को ईरान युद्ध पर समर्थन जुटाने के लिए खासी मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है।
मार्को रुबियो, अमेरिकी विदेश मंत्री
- फोटो : ANI
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विस्तार
अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो फ्रांस में आयोजित हो रहे जी-7 सम्मेलन में शिरकत करने के लिए अमेरिका से रवाना हो गए हैं। मार्को रूबियो को इस जी7 सम्मेलन में ईरान युद्ध के लिए जी7 देशों का समर्थन जुटाने की मुश्किल चुनौती है, खासकर तब जब अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप नाटो पर तीखा हमला कर रहे हैं। वहीं पश्चिमी देशों में ईरान के खिलाफ युद्ध को लेकर शंका की स्थिति बनी हुई है और अधिकतर देश इस पर आपत्ति जता चुके हैं।
नाटो देशों को जमकर लताड़ रहे ट्रंप
अमेरिका पर निर्भरता कम कर रहे नाटो देश
फ्रांस रवाना होने से पहले रूबियो ने कहा कि वह जी-7 देशों के विदेश मंत्रियों के साथ अच्छी बैठकों की उम्मीद कर रहे हैं। बाद में उन्होंने एक्स पर लिखा कि वह वैश्विक सुरक्षा चिंताओं, पश्चिम एशिया की स्थिति और रूस-यूक्रेन युद्ध पर चर्चा करेंगे। इससे पहले नाटो महासचिव मार्क रुते ने कहा कि नाटो के सदस्य रक्षा खर्च बढ़ा रहे हैं और अब अमेरिका की सैन्य शक्ति पर अत्यधिक निर्भरता कम करने की दिशा में बदलाव आ रहा है। उन्होंने यह भी दोहराया कि ईरान को परमाणु हथियार हासिल नहीं करने दिए जा सकते।
ये भी पढ़ें- अमेरिका को कितना भारी पड़ सकता है खर्ग पर हमला?: ईरान ने की द्वीप बचाने की तैयारियां, विशेषज्ञों ने बताए खतरे
फ्रांस ईरान युद्ध को लेकर नाराज
जी-7 बैठक की मेजबानी कर रहा फ्रांस, ईरान युद्ध को लेकर चिंतित है। फ्रांसीसी रक्षा प्रमुख जनरल फैबियन मैंडों ने आरोप लगाया कि अमेरिका ने सैन्य कार्रवाई शुरू करने से पहले सहयोगियों को जानकारी नहीं दी, जिससे उनकी सुरक्षा और हित प्रभावित हुए।
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नाटो देशों को जमकर लताड़ रहे ट्रंप
- नाटो के सदस्य देश ब्रिटेन, कनाडा, फ्रांस, जर्मनी और इटली, जी-7 का भी हिस्सा हैं, जबकि जापान इस सैन्य गठबंधन में शामिल नहीं है। रूबियो जब फ्रांस के लिए के लिए वॉशिंगटन से रवाना हुए, ठीक उससे कुछ घंटे पहले ही ट्रंप ने ईरान युद्ध में अमेरिका और इस्राइल का साथ न देने के लिए नाटो देशों की आलोचना की। ट्रंप ने कहा, 'हम नाटो से बहुत निराश हैं, क्योंकि नाटो ने बिल्कुल कुछ नहीं किया।' ट्रंप ने ये भी कहा कि, 'हम नाटो की रक्षा के लिए हैं, लेकिन वे हमारी रक्षा के लिए नहीं हैं।'
- ऐसे में रूबियो का फ्रांस दौरा, यूरोपीय सहयोगियों के साथ रिश्तों को संतुलित करने की दिशा में भी अहम होगा।
- नाटो और अमेरिका के बीच बीते कुछ समय से तनाव बना हुआ है। दरअसल ग्रीनलैंड को लेकर ट्रंप के रुख और रूस-यूक्रेन युद्ध में अमेरिका को लेकर भी यूरोप परेशान है। अब पश्चिम एशिया का मौजूदा संघर्ष इस तनाव को और बढ़ा रहा है।
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अमेरिका पर निर्भरता कम कर रहे नाटो देश
फ्रांस रवाना होने से पहले रूबियो ने कहा कि वह जी-7 देशों के विदेश मंत्रियों के साथ अच्छी बैठकों की उम्मीद कर रहे हैं। बाद में उन्होंने एक्स पर लिखा कि वह वैश्विक सुरक्षा चिंताओं, पश्चिम एशिया की स्थिति और रूस-यूक्रेन युद्ध पर चर्चा करेंगे। इससे पहले नाटो महासचिव मार्क रुते ने कहा कि नाटो के सदस्य रक्षा खर्च बढ़ा रहे हैं और अब अमेरिका की सैन्य शक्ति पर अत्यधिक निर्भरता कम करने की दिशा में बदलाव आ रहा है। उन्होंने यह भी दोहराया कि ईरान को परमाणु हथियार हासिल नहीं करने दिए जा सकते।
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फ्रांस ईरान युद्ध को लेकर नाराज
जी-7 बैठक की मेजबानी कर रहा फ्रांस, ईरान युद्ध को लेकर चिंतित है। फ्रांसीसी रक्षा प्रमुख जनरल फैबियन मैंडों ने आरोप लगाया कि अमेरिका ने सैन्य कार्रवाई शुरू करने से पहले सहयोगियों को जानकारी नहीं दी, जिससे उनकी सुरक्षा और हित प्रभावित हुए।