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Explainer: कौन हैं हूती, जिन पर लाल सागर में भारतीय जहाज को निशाना बनाने का शक; पश्चिम एशिया में कितने ताकतवर?
Wed, 05 Aug 2026 12:42 PM IST
कीर्तिवर्धन मिश्र
स्पेशल डेस्क, अमर उजाला
स्पेशल डेस्क, अमर उजाला
Published by: कीर्तिवर्धन मिश्र
Updated Wed, 05 Aug 2026 12:42 PM IST
सार
लाल सागर में भारतीय वाणिज्यिक पोत एमएसवी फैज-ए-नूर ऑलिया पर हमले के पीछे यमन के हूती विद्रोहियों पर शक है। जानिए कौन हैं हूती लड़ाके, यमन में कैसे मजबूत हुए और पश्चिम एशिया संकट में इनकी क्या भूमिका है?
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हूती विद्रोही।
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
पश्चिम एशिया में अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध भले ही थोड़ा धीमा पड़ा है, लेकिन होर्मुज जलडमरूमध्य और लाल सागर से आने वाले जहाजों की आवाजाही अब भी बुरी तरह प्रभावित है। इस बीच मंगलवार को लाल सागर में एक भारतीय झंडे वाले वाणिज्यिक पोत पर हमला हुआ था। पहले तो यह साफ नहीं हुआ कि युद्ध क्षेत्र से दूर इस अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में भारत के जहाज पर किसने हमला किया। हालांकि, यमन की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्य सरकार ने आरोप लगाया है कि इस हमले के लिए 'हूती' विद्रोही संगठन जिम्मेदार हैं।
गौरतलब है कि लाल सागर में हुए इस हमले के बाद कार्गो जहाज एमएसवी फैज-ए-नूर ऑलिया यमन के जलक्षेत्र के पास डूब गया था। इसमें सवार 14 क्रू सदस्यों में से 13 भारतीय और एक यमन का नागरिक था, जिन्हें सुरक्षित बचा लिया गया। यमन की सरकार ने इस घटना को लेकर हूतियों पर निशाना साधा और नौसेना और कोस्ट गार्ड की मदद से पीड़ितों के लिए राहत-बचाव कार्य चलाया।
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गौरतलब है कि लाल सागर में हुए इस हमले के बाद कार्गो जहाज एमएसवी फैज-ए-नूर ऑलिया यमन के जलक्षेत्र के पास डूब गया था। इसमें सवार 14 क्रू सदस्यों में से 13 भारतीय और एक यमन का नागरिक था, जिन्हें सुरक्षित बचा लिया गया। यमन की सरकार ने इस घटना को लेकर हूतियों पर निशाना साधा और नौसेना और कोस्ट गार्ड की मदद से पीड़ितों के लिए राहत-बचाव कार्य चलाया।
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आइये जानते हैं कि ये 'हूती' कौन हैं? अमेरिका-ईरान युद्ध में इनकी क्या भूमिका है? लाल सागर में ये कितने ताकतवर हैं?
हूती यमन में मौजूद एक सशस्त्र समूह है। संगठन का नाम इसके संस्थापक हुसैन बदरेद्दीन अल-हूती के नाम पर रखा गया है। दरअसल, 1990 के दशक में उत्तर यमन में हूती परिवार ने शिया इस्लाम के जायदी संप्रदाय के लिए एक मजहबी पुनरुद्धार आंदोलन की स्थापना की थी। यह वही हूती परिवार था जिसने कभी यमन पर शासन किया था। जैसे-जैसे सरकार के साथ टकराव बढ़ता गया, उन्होंने यमन की राष्ट्रीय सेना के साथ कई गुरिल्ला युद्ध लड़े। इसके अलावा हूतियों का सुन्नी शक्ति का केंद्र माने जाने वाले सऊदी अरब के साथ एक सीमा संघर्ष भी हुआ।
आज हूतियों के पास अनुमानित 20,000 लड़ाके हैं। इसकी अधिकांश मौजूदगी यमन में पश्चिम में है। वहीं इसका प्रभाव यमन के लाल सागर तट तक है।
पहले जानें- कौन हैं हूती, यमन से इनका क्या कनेक्शन?
हूती यमन में मौजूद एक सशस्त्र समूह है। संगठन का नाम इसके संस्थापक हुसैन बदरेद्दीन अल-हूती के नाम पर रखा गया है। दरअसल, 1990 के दशक में उत्तर यमन में हूती परिवार ने शिया इस्लाम के जायदी संप्रदाय के लिए एक मजहबी पुनरुद्धार आंदोलन की स्थापना की थी। यह वही हूती परिवार था जिसने कभी यमन पर शासन किया था। जैसे-जैसे सरकार के साथ टकराव बढ़ता गया, उन्होंने यमन की राष्ट्रीय सेना के साथ कई गुरिल्ला युद्ध लड़े। इसके अलावा हूतियों का सुन्नी शक्ति का केंद्र माने जाने वाले सऊदी अरब के साथ एक सीमा संघर्ष भी हुआ।
आज हूतियों के पास अनुमानित 20,000 लड़ाके हैं। इसकी अधिकांश मौजूदगी यमन में पश्चिम में है। वहीं इसका प्रभाव यमन के लाल सागर तट तक है।
कैसे ताकतवर हुए हूती?
यमन में 2014 के अंत में युद्ध शुरू हुआ, उसके बाद राजधानी सना पर हूतियों ने कब्जा कर लिया। हूतियों ने उत्तर के अधिकांश भाग और अन्य बड़ी आबादी वाले जगहों पर नियंत्रण स्थापित कर लिया। उधर देश में सत्ता चला रही सरकार ने खुद को अदन में स्थापित कर लिया। इस सरकार को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त थी।
लाल सागर में कितने खतरनाक हैं हूती?
लाल सागर यूरोप को एशिया और पूर्वी अफ्रीका से जोड़ने वाला सबसे अहम जलमार्ग है। स्वेज नहर के दक्षिण में स्थित लाल सागर दुनिया के सबसे घने शिपिंग चैनलों में से एक है। लाल सागर यमन समुद्र के दक्षिण-पूर्वी तट पर स्थित है, जहां यह अदन की खाड़ी से मिलता है।
अमेरिका-ईरान युद्ध के शुरू होने से काफी पहले से हूती विद्रोही लाल सागर में कारोबारी जहाजों को निशाना बना रहे हैं। इसकी पहली शुरुआत हुई 2023 में इस्राइल-हमास युद्ध के बाद, जब फलस्तीन के गाजा में इस्राइल की कार्रवाई के खिलाफ हूतियों ने लाल सागर पर मिसाइलों और ड्रोन से वाणिज्यिक पोतों को निशाना बनाया। इनमें से अधिकांश हमलों को अमेरिका और इस्राइली सेनाओं ने जवाबी कार्रवाई करके असफल कर दिया। हालांकि, कुछ हमले निशाने पर लगे और जहाजों और उनमें सवार क्रू को रेस्क्यू करना पड़ा।
इसके बाद विद्रोहियों ने इस्राइली कारोबारी से जुड़े जहाज को जब्त कर लिया। इस दौरान इस संगठन ने हेलीकॉप्टर का इस्तेमाल किया और चालक दल का अपहरण कर लिया। संगठन ने कहा कि इस्राइल या उसके सहयोगियों से जुड़े सभी जहाज सीधा लक्ष्य बनाए जाएंगे। इसके बाद जहाजों पर कई हमले हुए, जिनमें से अधिकांश में सफलता नहीं मिली। हालांकि, कई शिपिंग कंपनियों ने लाल सागर मार्ग को छोड़ दक्षिण अफ्रीका के केप ऑफ गुड होप का रास्ता अपनाया जिससे जहाजों के यात्रा के समय और लागत दोनों में काफी वृद्धि हुई।
हूतियों और ईरान के बीच का जुड़ाव रणनीतिक, सैन्य और वैचारिक स्तर का है, लेकिन इसके साथ ही हूतियों की अपनी स्थानीय प्राथमिकताएं भी काम करती हैं।
ईरान की प्रतिरोध की धुरी का हिस्सा हैं हूती
हूती खुद को उस समूह का एक अहम सदस्य मानते हैं, जिसे ईरान प्रतिरोध की धुरी कहता है। वे पश्चिम एशिया में ईरान समर्थित ताकतों के उस व्यापक नेटवर्क का हिस्सा हैं, जिसमें गाजा में हमास, लेबनान में हिजबुल्ला और इराक के सशस्त्र विद्रोही समूह शामिल हैं। इस यमनी उग्रवादी समूह को ईरान का खुला समर्थन हासिल है।
ईरान से क्या है हूतियों का जुड़ाव?
हूतियों और ईरान के बीच का जुड़ाव रणनीतिक, सैन्य और वैचारिक स्तर का है, लेकिन इसके साथ ही हूतियों की अपनी स्थानीय प्राथमिकताएं भी काम करती हैं।
ईरान की प्रतिरोध की धुरी का हिस्सा हैं हूती
हूती खुद को उस समूह का एक अहम सदस्य मानते हैं, जिसे ईरान प्रतिरोध की धुरी कहता है। वे पश्चिम एशिया में ईरान समर्थित ताकतों के उस व्यापक नेटवर्क का हिस्सा हैं, जिसमें गाजा में हमास, लेबनान में हिजबुल्ला और इराक के सशस्त्र विद्रोही समूह शामिल हैं। इस यमनी उग्रवादी समूह को ईरान का खुला समर्थन हासिल है।
हूती विद्रोहियों का प्रभाव।
- फोटो : अमर उजाला
आधुनिक हथियार और सैन्य स्तर पर काफी मजबूत हैं हूती
द न्यूयॉर्क टाइम्स के मुताबिक, ईरान के समर्थन ने हूतियों को एक साधारण और खराब संगठित विद्रोही समूह से बदलकर क्षेत्र में एक शक्तिशाली सैन्य ताकत के रूप में स्थापित किया है। इस समर्थन के कारण ही वे आज क्रूज और बैलिस्टिक मिसाइलों तथा लंबी दूरी के ड्रोनों के आधुनिक हथियार भंडार से लैस हैं।
सऊदी अरब की बढ़ती ताकत को नियंत्रित करने में हूती अहम
विश्लेषकों का कहना है कि ईरान ने संभवतः हूतियों को लाल सागर में जहाजों की आवाजाही बाधित करने के लिए प्रोत्साहित किया है, क्योंकि इससे तेहरान और हूती दोनों के हितों को फायदा होता है। ईरान के लिए हूतियों की ओर से सऊदी तेल टैंकरों पर हमले करना वैश्विक ऊर्जा बाजार को अस्थिर करना और अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप पर दबाव बनाने का एक प्रभावी तरीका है। वहीं हूतियों के लिए ये हमले सऊदी अरब से वित्तीय और राजनीतिक रियायतें हासिल करने के लिए दबाव बनाने का एक जरिया हैं।
द न्यूयॉर्क टाइम्स के मुताबिक, ईरान के समर्थन ने हूतियों को एक साधारण और खराब संगठित विद्रोही समूह से बदलकर क्षेत्र में एक शक्तिशाली सैन्य ताकत के रूप में स्थापित किया है। इस समर्थन के कारण ही वे आज क्रूज और बैलिस्टिक मिसाइलों तथा लंबी दूरी के ड्रोनों के आधुनिक हथियार भंडार से लैस हैं।
सऊदी अरब की बढ़ती ताकत को नियंत्रित करने में हूती अहम
विश्लेषकों का कहना है कि ईरान ने संभवतः हूतियों को लाल सागर में जहाजों की आवाजाही बाधित करने के लिए प्रोत्साहित किया है, क्योंकि इससे तेहरान और हूती दोनों के हितों को फायदा होता है। ईरान के लिए हूतियों की ओर से सऊदी तेल टैंकरों पर हमले करना वैश्विक ऊर्जा बाजार को अस्थिर करना और अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप पर दबाव बनाने का एक प्रभावी तरीका है। वहीं हूतियों के लिए ये हमले सऊदी अरब से वित्तीय और राजनीतिक रियायतें हासिल करने के लिए दबाव बनाने का एक जरिया हैं।
हूतियों के इन हमलों से ईरान को भी काफी फायदा पहुंचता है, क्योंकि यह संगठन सऊदी से जुड़े ठिकानों पर हमले और यमन में उससे लगातार मुकाबले में जुटा रहा है। इससे ईरान को क्षेत्र में सऊदी की बढ़ती ताकत को नियंत्रित करने में मदद मिलती है। इसलिए हूतियों का मजबूत होना ईरान के लिए फायदेमंद है।
हूतियों के पास यमन में घरेलू स्वायत्तता भी
ईरान से गहरे संबंधों के बावजूद हूती यमन का एक विशिष्ट स्थानीय गुट भी हैं, जिनकी अपनी प्राथमिकताएं हैं। विशेषज्ञ बताते हैं कि हूती न तो यमन में सीधे तौर पर ईरानी हितों के वाहक हैं और न ही वे तेहरान के प्रभाव से पूरी तरह स्वतंत्र हैं। वे हमेशा तेहरान के प्रति अपनी वफादारी और यमन के घरेलू राजनीतिक समीकरणों के बीच संतुलन बनाकर चलते हैं।
हूतियों ने ईरान के साथ इस गठबंधन का इस्तेमाल अपनी ताकत बढ़ाने, प्रतिद्वंद्वी ताकतों को दूर रखने और उत्तरी यमन में एक वास्तविक सरकार के रूप में खुद को स्थापित करने के लिए किया है। हाल ही में ईरानी अधिकारियों ने भी हूतियों को यमन के वैध शासन के रूप में बुलाना शुरू किया है, जो हूतियों को एक राष्ट्रीय और क्षेत्रीय शक्ति के रूप में स्थापित करने के लिए ईरान के मौन समर्थन को दर्शाता है।
हूतियों के पास यमन में घरेलू स्वायत्तता भी
ईरान से गहरे संबंधों के बावजूद हूती यमन का एक विशिष्ट स्थानीय गुट भी हैं, जिनकी अपनी प्राथमिकताएं हैं। विशेषज्ञ बताते हैं कि हूती न तो यमन में सीधे तौर पर ईरानी हितों के वाहक हैं और न ही वे तेहरान के प्रभाव से पूरी तरह स्वतंत्र हैं। वे हमेशा तेहरान के प्रति अपनी वफादारी और यमन के घरेलू राजनीतिक समीकरणों के बीच संतुलन बनाकर चलते हैं।
हूतियों ने ईरान के साथ इस गठबंधन का इस्तेमाल अपनी ताकत बढ़ाने, प्रतिद्वंद्वी ताकतों को दूर रखने और उत्तरी यमन में एक वास्तविक सरकार के रूप में खुद को स्थापित करने के लिए किया है। हाल ही में ईरानी अधिकारियों ने भी हूतियों को यमन के वैध शासन के रूप में बुलाना शुरू किया है, जो हूतियों को एक राष्ट्रीय और क्षेत्रीय शक्ति के रूप में स्थापित करने के लिए ईरान के मौन समर्थन को दर्शाता है।
हूती विद्रोही।
- फोटो : अमर उजाला
अब अमेरिका-ईरान युद्ध में क्या रही है इनकी भूमिका?
1. पहले सीमित स्तर पर दिया ईरान का साथइस युद्ध के शुरुआती महीनों में हूतियों की भागीदारी काफी सीमित और बेहद सतर्क रही थी। माना जा रहा था कि पिछले साल अमेरिका और इस्राइल की तरफ से किए गए हफ्तों लंबे हवाई हमलों की वजह से हूती कमजोर पड़ गए थे। इस वजह से वे अपने सीमित सैन्य संसाधनों और हथियारों के भंडार को बहुत सोच-समझकर खर्च कर रहे थे।
हालांकि, हाल के दिनों में हूतियों ने अपनी इस सतर्कता को छोड़कर युद्ध में एक बड़ा और खतरनाक प्रवेश किया है। इस नए मोर्चे की शुरुआत तब हुई जब यमन के साना अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर एक ईरानी विमान को उतारने की कोशिश को लेकर विवाद हुआ और हूतियों ने अमेरिका के सहयोगी सऊदी अरब पर हवाई अड्डे पर हमला करने का आरोप लगाया।
2. अब समुद्री नाकेबंदी और तेल टैंकरों पर हमले तक पहुंची बात
हूतियों ने सऊदी अरब से जुड़े जहाजों के खिलाफ लाल सागर में समुद्री नाकेबंदी की घोषणा कर दी है। इसके तुरंत बाद उन्होंने लाल सागर में तेल टैंकरों पर मिसाइल और ड्रोन हमले किए हैं। इन हमलों के जवाब में सऊदी सैन्य गठबंधन ने यमन में हवाई हमले किए हैं, जिसके बाद हूतियों ने भी सऊदी किंगडम पर मिसाइलें और ड्रोन दागे हैं। इससे उनका एक दशक पुराना संघर्ष दोबारा पूरी तरह भड़कने की कगार पर पहुंच गया है।
चूंकि होर्मुज जलडमरूमध्य महीनों से बंद है, इसलिए लाल सागर सऊदी तेल और गैस के परिवहन का मुख्य वैकल्पिक मार्ग बन चुका है। विश्लेषकों का मानना है कि ईरान के इशारे पर हूतियों की ओर से की जा रही यह नाकेबंदी वैश्विक ऊर्जा बाजारों को अस्थिर करने और अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप पर दबाव बनाने का एक बड़ा रणनीतिक जरिया बन गई है।
हूतियों ने सऊदी अरब से जुड़े जहाजों के खिलाफ लाल सागर में समुद्री नाकेबंदी की घोषणा कर दी है। इसके तुरंत बाद उन्होंने लाल सागर में तेल टैंकरों पर मिसाइल और ड्रोन हमले किए हैं। इन हमलों के जवाब में सऊदी सैन्य गठबंधन ने यमन में हवाई हमले किए हैं, जिसके बाद हूतियों ने भी सऊदी किंगडम पर मिसाइलें और ड्रोन दागे हैं। इससे उनका एक दशक पुराना संघर्ष दोबारा पूरी तरह भड़कने की कगार पर पहुंच गया है।
चूंकि होर्मुज जलडमरूमध्य महीनों से बंद है, इसलिए लाल सागर सऊदी तेल और गैस के परिवहन का मुख्य वैकल्पिक मार्ग बन चुका है। विश्लेषकों का मानना है कि ईरान के इशारे पर हूतियों की ओर से की जा रही यह नाकेबंदी वैश्विक ऊर्जा बाजारों को अस्थिर करने और अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप पर दबाव बनाने का एक बड़ा रणनीतिक जरिया बन गई है।