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Pakistan: रूस ने पाकिस्तान को क्यों दिया सस्ते दाम पर कच्चा तेल, क्या भारत से रिश्तों पर पड़ेगा असर?
Mon, 12 Jun 2023 12:37 PM IST
हिमांशु मिश्रा
स्पेशल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
स्पेशल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: हिमांशु मिश्रा
Updated Mon, 12 Jun 2023 12:37 PM IST
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सार
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भारत-रूस और पाकिस्तान
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अमर उजाला
विस्तार
पाकिस्तान में पहली बार रूस से कच्चे तेल की खेप रविवार को कराची बंदरगाह पहुंची। पहली खेप में 45 हजार मीट्रिक टन कच्चा तेल है। आर्थिक संकट, महंगाई और राजनीतिक उथल-पुथल से जूझ रहे पाकिस्तान के लिए इसे बड़ी राहत माना जा रहा है। यूक्रेन से युद्ध शुरू होने के बाद अब तक भारत को ही रूस सस्ते दाम पर कच्चा तेल देता था। अब पाकिस्तान भी इस सूची में शामिल हो गया है। इसे भारत के लिए बड़ा झटका कहा जा रहा है।सवाल उठ रहा है कि आखिर रूस ने पाकिस्तान को सस्ते दाम पर तेल क्यों दिया? क्या इसका भारत और रूस के रिश्तों पर भी कोई असर पड़ेगा? चीन की इस समझौते में क्या भूमिका रही? आइए समझते हैं...
पहले जानिए पाकिस्तान के प्रधानमंत्री ने क्या कहा?
रूस से सस्ते दामों पर कच्चे तेल की पहली खेप पाकिस्तान पहुंचने की जानकारी प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने दी। शहबाज ने लिखा, 'मैंने देश से किया अपना एक और वादा पूरा कर दिया है। यह बताते हुए खुशी हो रही है कि रूस के सस्ते तेल की पहली खेप कराची पहुंच चुकी है और कल से इसे जहाज से उतारने की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी। यह एक बदलाव का दिन है। हम समृद्धि, आर्थिक विकास और ऊर्जा सुरक्षा की दिशा में एक कदम और आगे बढ़े हैं।' उन्होंने आगे कहा, 'यह रूस और पाकिस्तान के बीच नए रिश्तों की शुरुआत है।'
रूस से सस्ते दामों पर कच्चे तेल की पहली खेप पाकिस्तान पहुंचने की जानकारी प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने दी। शहबाज ने लिखा, 'मैंने देश से किया अपना एक और वादा पूरा कर दिया है। यह बताते हुए खुशी हो रही है कि रूस के सस्ते तेल की पहली खेप कराची पहुंच चुकी है और कल से इसे जहाज से उतारने की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी। यह एक बदलाव का दिन है। हम समृद्धि, आर्थिक विकास और ऊर्जा सुरक्षा की दिशा में एक कदम और आगे बढ़े हैं।' उन्होंने आगे कहा, 'यह रूस और पाकिस्तान के बीच नए रिश्तों की शुरुआत है।'
रूस ने पाकिस्तान को क्यों दिया सस्ते दाम पर तेल?
इसे समझने के लिए हमने विदेश मामलों के जानकार डॉ. आदित्य पटेल से बात की। उन्होंने कहा, 'ऐसा नहीं है कि पाकिस्तान ने सस्ते दाम पर तेल आसानी से हासिल किया है। इसके लिए साल 2022 से ही पाकिस्तान की पूरी हुकूमत लगी हुई थी।’
‘जब रूस और यूक्रेन का युद्ध शुरू हुआ तो उसके ठीक बाद तत्कालीन पाकिस्तानी प्रधानमंत्री इमरान खान रूस के दौरे पर पहुंच गए थे। इस दौरान उन्होंने रूस की जमकर तारीफ की थी। वहीं, भारत की बात करें तो भारत ने सस्ते दाम पर रूस से तेल लेना काफी पहले से शुरू कर दिया था। वह भी तब जब दुनिया का एक दूसरा बड़ा हिस्सा भारत के इस कदम के खिलाफ था।'
डॉ. आदित्य आगे कहते हैं, ‘पाकिस्तान के इस समझौते में चीन ने बड़ी ही चालाकी से पाकिस्तान की मदद है। उसने इस समझौते के लिए रूस से सिफारिश की। चीन जानता है कि अगर पाकिस्तान काफी कमजोर हुआ तो इसका सीधा असर पड़ेगा। भारत इससे और अधिक मजबूत होगा। ऐसे में चीन ने रूस से सस्ते दाम पर पाकिस्तान को तेल दिलवाने में मदद की।’
‘उधर, रूस भी अभी आर्थिक तौर पर मजबूत होने की कोशिश कर रहा है। कई देशों ने रूस से व्यापारिक रिश्ते खत्म कर दिए हैं। ऐसे में रूस चाहता है कि जितने ज्यादा से ज्यादा देश उससे तेल खरीदें उसे उतना ही फायदा होगा।'
उन्होंने आगे कहा, 'रूस कभी भी पाकिस्तान को सस्ते दामों पर तेल देने के लिए राजी नहीं था। यही कारण है कि जब पाकिस्तान ने तेल के दामों पर 30 प्रतिशत की छूट मांगी तो पहले रूस ने मना कर दिया। बाद में पाकिस्तान ने चीन का सहारा लिया।'
इसे समझने के लिए हमने विदेश मामलों के जानकार डॉ. आदित्य पटेल से बात की। उन्होंने कहा, 'ऐसा नहीं है कि पाकिस्तान ने सस्ते दाम पर तेल आसानी से हासिल किया है। इसके लिए साल 2022 से ही पाकिस्तान की पूरी हुकूमत लगी हुई थी।’
‘जब रूस और यूक्रेन का युद्ध शुरू हुआ तो उसके ठीक बाद तत्कालीन पाकिस्तानी प्रधानमंत्री इमरान खान रूस के दौरे पर पहुंच गए थे। इस दौरान उन्होंने रूस की जमकर तारीफ की थी। वहीं, भारत की बात करें तो भारत ने सस्ते दाम पर रूस से तेल लेना काफी पहले से शुरू कर दिया था। वह भी तब जब दुनिया का एक दूसरा बड़ा हिस्सा भारत के इस कदम के खिलाफ था।'
डॉ. आदित्य आगे कहते हैं, ‘पाकिस्तान के इस समझौते में चीन ने बड़ी ही चालाकी से पाकिस्तान की मदद है। उसने इस समझौते के लिए रूस से सिफारिश की। चीन जानता है कि अगर पाकिस्तान काफी कमजोर हुआ तो इसका सीधा असर पड़ेगा। भारत इससे और अधिक मजबूत होगा। ऐसे में चीन ने रूस से सस्ते दाम पर पाकिस्तान को तेल दिलवाने में मदद की।’
‘उधर, रूस भी अभी आर्थिक तौर पर मजबूत होने की कोशिश कर रहा है। कई देशों ने रूस से व्यापारिक रिश्ते खत्म कर दिए हैं। ऐसे में रूस चाहता है कि जितने ज्यादा से ज्यादा देश उससे तेल खरीदें उसे उतना ही फायदा होगा।'
उन्होंने आगे कहा, 'रूस कभी भी पाकिस्तान को सस्ते दामों पर तेल देने के लिए राजी नहीं था। यही कारण है कि जब पाकिस्तान ने तेल के दामों पर 30 प्रतिशत की छूट मांगी तो पहले रूस ने मना कर दिया। बाद में पाकिस्तान ने चीन का सहारा लिया।'
तो क्या भारत और रूस के रिश्तों पर इसका असर पड़ेगा?
डॉ. आदित्य ने कहा, 'इसे आंकड़ों से समझना ज्यादा बेहतर होगा। साल 2021 में रूस ने भारत को 7.6 बिलियन डॉलर का माल एक्सपोर्ट किया। वहीं, भारत ने 3.68 बिलियन डॉलर का एक्सपोर्ट किया। पाकिस्तान और रूस के व्यापार पर नजर डालें तो अलग ही आंकड़ा दिखेगा। 2021 में ही रूस ने पाकिस्तान में 498 मिलियन डॉलर का एक्सपोर्ट किया, जबकि पाकिस्तान ने रूस को 323 मिलियन डॉलर का एक्सपोर्ट किया। कुल मिलाकर भारत के मुकाबले पाकिस्तान और रूस का व्यापारिक रिश्ता काफी कमजोर है। भारत दुनिया का सबसे बड़ा बाजार है और पूरी दुनिया को इस बाजार की जरूरत है। ऐसे में पाकिस्तान से बेहतर रिश्ता बनाने के लिए रूस कभी नहीं चाहेगा कि वह भारत से रिश्ता खराब करे।'
डॉ. आदित्य ने कहा, 'इसे आंकड़ों से समझना ज्यादा बेहतर होगा। साल 2021 में रूस ने भारत को 7.6 बिलियन डॉलर का माल एक्सपोर्ट किया। वहीं, भारत ने 3.68 बिलियन डॉलर का एक्सपोर्ट किया। पाकिस्तान और रूस के व्यापार पर नजर डालें तो अलग ही आंकड़ा दिखेगा। 2021 में ही रूस ने पाकिस्तान में 498 मिलियन डॉलर का एक्सपोर्ट किया, जबकि पाकिस्तान ने रूस को 323 मिलियन डॉलर का एक्सपोर्ट किया। कुल मिलाकर भारत के मुकाबले पाकिस्तान और रूस का व्यापारिक रिश्ता काफी कमजोर है। भारत दुनिया का सबसे बड़ा बाजार है और पूरी दुनिया को इस बाजार की जरूरत है। ऐसे में पाकिस्तान से बेहतर रिश्ता बनाने के लिए रूस कभी नहीं चाहेगा कि वह भारत से रिश्ता खराब करे।'
अब आगे क्या करेगा पाकिस्तान?
पाकिस्तान लंबे समय से आर्थिक संकट से जूझ रहा है। ऐसे में पाकिस्तान सरकार की कोशिश होगी कि वह ज्यादा से ज्यादा रूस से सस्ता तेल आयात करे। अनुमान है कि पाकिस्तान, रूस से हर दिन एक लाख बैरल तेल की खरीद कर सकता है।
पिछले साल पाकिस्तान ने 1,54,000 बैरल तेल प्रतिदिन खरीदा। इसमें से 80 प्रतिशत खरीद सऊदी अरब और अन्य खाड़ी देशों से की गई थी। अब पाकिस्तान रूस से एक लाख बैरल तेल प्रतिदिन खरीद सकता है। मतलब चीन और भारत के बाद पाकिस्तान रूस के तेल का सबसे बड़ा खरीददार बनकर उभरा रहा है।
हालांकि, इसका नकारात्मक असर भी पाकिस्तान पर पड़ सकता है। पाकिस्तान को कई बार सऊदी अरब और अन्य खाड़ी देशों से मदद मिली है। इन देशों ने इस्लामिक साझेदार होने के नाते पाकिस्तान की कई स्तर पर मदद की है। अब जब पाकिस्तान और इन खाड़ी देशाों के व्यापार पर असर पड़ेगा तो संभव है कि कूटनीतिक तौर पर भी पाकिस्तान को इसका नुकसान उठाना पड़ सकता है।
पाकिस्तान लंबे समय से आर्थिक संकट से जूझ रहा है। ऐसे में पाकिस्तान सरकार की कोशिश होगी कि वह ज्यादा से ज्यादा रूस से सस्ता तेल आयात करे। अनुमान है कि पाकिस्तान, रूस से हर दिन एक लाख बैरल तेल की खरीद कर सकता है।
पिछले साल पाकिस्तान ने 1,54,000 बैरल तेल प्रतिदिन खरीदा। इसमें से 80 प्रतिशत खरीद सऊदी अरब और अन्य खाड़ी देशों से की गई थी। अब पाकिस्तान रूस से एक लाख बैरल तेल प्रतिदिन खरीद सकता है। मतलब चीन और भारत के बाद पाकिस्तान रूस के तेल का सबसे बड़ा खरीददार बनकर उभरा रहा है।
हालांकि, इसका नकारात्मक असर भी पाकिस्तान पर पड़ सकता है। पाकिस्तान को कई बार सऊदी अरब और अन्य खाड़ी देशों से मदद मिली है। इन देशों ने इस्लामिक साझेदार होने के नाते पाकिस्तान की कई स्तर पर मदद की है। अब जब पाकिस्तान और इन खाड़ी देशाों के व्यापार पर असर पड़ेगा तो संभव है कि कूटनीतिक तौर पर भी पाकिस्तान को इसका नुकसान उठाना पड़ सकता है।