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फ्लाइट से उतरते ही क्यों बिगड़ जाता है पेट? शोध में चौंकाने वाला खुलासा; सामने आई 'गट जेट लैग' की सच्चाई

Mon, 27 Jul 2026 07:00 AM IST
प्रशांत तिवारी अमर उजाला नेटवर्क
अमर उजाला नेटवर्क Published by: प्रशांत तिवारी Updated Mon, 27 Jul 2026 07:00 AM IST
सार

पोलैंड की व्रोकलॉ मेडिकल यूनिवर्सिटी के शोध में सामने आया है कि लंबी दूरी की हवाई यात्राओं के दौरान कई टाइम जोन पार करने से केवल जेट लैग ही नहीं, बल्कि 'गट जेट लैग' भी हो सकता है। इससे आंतों में बैक्टीरिया का संतुलन बिगड़ने, पाचन संबंधी समस्याएं, नींद में गड़बड़ी और ऊर्जा में कमी जैसी परेशानियां हो सकती हैं। विशेषज्ञ यात्रा से पहले समयानुसार दिनचर्या अपनाने, पर्याप्त पानी पीने और स्थानीय समय के अनुसार भोजन करने की सलाह देते हैं।

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Why does stomach upset after getting off flight study reveals surprising finding truth about gut jet lag
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

लंबी दूरी की हवाई यात्रा के बाद होने वाला जेट लैग केवल नींद और थकान तक सीमित नहीं रहता, बल्कि यह आंतों में मौजूद बैक्टीरिया के संतुलन को भी प्रभावित करता है। पोलैंड की व्रोकलॉ मेडिकल यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं के अनुसार, कई टाइम जोन पार करने पर शरीर की जैविक घड़ी के साथ आंतों के सूक्ष्मजीवों की दैनिक लय भी बिगड़ जाती है।

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क्या है 'गट जेट लैग' और शरीर पर इसका क्या असर पड़ता है?
न्यूट्रिएंट्स पत्रिका में प्रकाशित रिपोर्ट में इस स्थिति को 'गट जेट लैग' कहा गया है। अध्ययन के अनुसार, मस्तिष्क में मौजूद जैविक घड़ी नींद, भूख और हार्मोन को नियंत्रित करती है, जबकि आंतों के बैक्टीरिया भी दिन-रात के अनुसार सक्रिय रहते हैं। यात्रा के दौरान रोशनी, नींद और भोजन का समय अचानक बदलने से गट-ब्रेन एक्सिस प्रभावित होता है। इसके कारण पाचन संबंधी समस्याएं, खराब नींद और ऊर्जा में कमी जैसी दिक्कतें सामने आ सकती हैं।
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यात्रा से पहले क्या तैयारी करने से 'गट जेट लैग' से बचा जा सकता है?
विशेषज्ञों के अनुसार, इससे बचाव के लिए यात्रा से कुछ दिन पहले ही गंतव्य के समय के अनुसार सोने-जागने का अभ्यास करना चाहिए। उड़ान के दौरान और वहां पहुंचने के बाद स्थानीय समय के अनुसार भोजन करना चाहिए तथा रात में भारी भोजन से बचना चाहिए। पर्याप्त पानी पीना, नियमित नींद लेना और दिन में प्राकृतिक रोशनी के संपर्क में रहना शरीर को नई दिनचर्या के अनुरूप ढालने में मदद करता है। आवश्यकता पड़ने पर विशेषज्ञ की सलाह से प्रोबायोटिक्स का भी उपयोग किया जा सकता है।
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आखिर किन समस्याओं का करना पड़ सकता है सामना?
भोजन के समय में अचानक बदलाव से पाचन एंजाइमों और पित्त के स्राव पर असर पड़ता है। इससे पेट फूलना, भारीपन, भूख में बदलाव और कब्ज जैसी समस्याएं हो सकती हैं। इसके अलावा, लाभकारी बैक्टीरिया द्वारा बनने वाले शॉर्ट-चेन फैटी एसिड का उत्पादन भी प्रभावित होता है, जो आंतों की सुरक्षा और ऊर्जा चयापचय के लिए बेहद जरूरी हैं। शोधकर्ताओं के अनुसार, इसका असर खिलाड़ियों, विमान कर्मियों और शिफ्ट में काम करने वाले लोगों पर अपेक्षाकृत अधिक पड़ता है।

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