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World: 'भारत से विवाद हल करने में तीसरे पक्ष की जरूरत नहीं', नेपाल की संसद में विदेश मंत्री का बड़ा बयान
पीटीआई, नई दिल्ली
Published by: नितिन गौतम
Updated Thu, 11 Jun 2026 06:39 AM IST
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अफगानिस्तान के पश्चिमी शहर हेरात में महिलाओं की कथित गिरफ्तारी के विरोध में हुए प्रदर्शन पर की गई हिंसक कार्रवाई में कम से कम एक व्यक्ति की मौत हो गई है। संयुक्त राष्ट्र के अफगानिस्तान मिशन ने बुधवार को इसकी पुष्टि की। हेरात इलाके में ड्रेस कोड नियमों के उल्लंघन के आरोप में 30 महिलाओं की गिरफ्तारी की गई थी। इन गिरफ्तारियों के खिलाफ मंगलवार को 100-150 लोग विरोध प्रदर्शन कर रहे थे। आरोप है कि इस दौरान तालिबान पुलिस ने भीड़ पर गोलीबारी की।
गोली लगने से कम से कम एक किशोर की मौत हुई है, जबकि कई अन्य लोग घायल हुए हैं। कुछ प्रदर्शनकारियों को लाठियों से पीटे जाने की भी रिपोर्ट है। साल 2021 में अमेरिकी नेतृत्व वाली सेनाओं की वापसी के बाद अफगानिस्तान पर तालिबान का शासन है। इसके बाद सरकार ने इस्लामी कानून (शरीयत) की सख्त व्याख्या पर आधारित कई नियम लागू किए हैं। देश में विरोध-प्रदर्शन दुर्लभ हैं और सरकार के खिलाफ असहमति को लगभग बर्दाश्त नहीं किया जाता।
महिलाओं और लड़कियों पर कई सख्त प्रतिबंध लगाए गए हैं, जिनमें प्राथमिक शिक्षा के बाद पढ़ाई पर रोक और सार्वजनिक स्थानों पर ड्रेस कोड शामिल है। नियमों के अनुसार महिलाओं को पूर्ण हिजाब—सिर से पैर तक ढका हुआ वस्त्र और चेहरा ढकने वाला नकाब—पहनकर ही बाहर निकलने की अनुमति है।
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गोली लगने से कम से कम एक किशोर की मौत हुई है, जबकि कई अन्य लोग घायल हुए हैं। कुछ प्रदर्शनकारियों को लाठियों से पीटे जाने की भी रिपोर्ट है। साल 2021 में अमेरिकी नेतृत्व वाली सेनाओं की वापसी के बाद अफगानिस्तान पर तालिबान का शासन है। इसके बाद सरकार ने इस्लामी कानून (शरीयत) की सख्त व्याख्या पर आधारित कई नियम लागू किए हैं। देश में विरोध-प्रदर्शन दुर्लभ हैं और सरकार के खिलाफ असहमति को लगभग बर्दाश्त नहीं किया जाता।
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महिलाओं और लड़कियों पर कई सख्त प्रतिबंध लगाए गए हैं, जिनमें प्राथमिक शिक्षा के बाद पढ़ाई पर रोक और सार्वजनिक स्थानों पर ड्रेस कोड शामिल है। नियमों के अनुसार महिलाओं को पूर्ण हिजाब—सिर से पैर तक ढका हुआ वस्त्र और चेहरा ढकने वाला नकाब—पहनकर ही बाहर निकलने की अनुमति है।
भारत से विवाद हल करने में तीसरे पक्ष की जरूरत नहीं : नेपाल
नेपाल के विदेश मंत्री शिशिर खनाल ने बुधवार को देश की संसद में स्पष्ट किया कि सरकार ने भारत के साथ सीमा विवाद को सुलझाने के लिए किसी तीसरे पक्ष की मध्यस्थता न तो मांगी है और न ही वह इसका समर्थन करती है। यह स्पष्टीकरण 31 मई को प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह के बयानों के बाद मचे राजनीतिक हंगामे को शांत करने के लिए दिया गया। पीएम के बयानों की विपक्ष ने कड़ी आलोचना की थी और उनके इस्तीफे की मांग भी उठी थी। खनाल ने कहा कि नेपाल और भारत के बीच सीमा को लेकर चल रहे विवाद पर दोनों देशों का एक संयुक्त कार्य समूह विचार करेगा।
चीनी विदेश मंत्रालय के साथ भारतीय दूत विक्रम की बैठक
चीन में भारत के राजदूत विक्रम दोराईस्वामी ने बुधवार को बीजिंग में चाइनीज पीपल्स एसोसिएशन फॉर फ्रेंडशिप विद फॉरेन कंट्रीज के अध्यक्ष यांग वानमिंग से मुलाकात की और दोनों देशों के लोगों के बीच आपसी संबंधों को मजबूत करने पर चर्चा की। चाइनीज पीपल्स एसोसिएशन फॉर फ्रेंडशिप विद फॉरेन कंट्रीज चीन के विदेश मंत्रालय से जुड़ी संस्था है। यह चीन और दूसरे देशों के लोगों के बीच आपसी मेल-जोल पर ध्यान देती है। भारतीय दूतावास की पोस्ट के अनुसार, दोराईस्वामी और यांग ने भारत-चीन के बीच लोगों के आपसी मेल-जोल की पुरानी परंपरा और सांस्कृतिक, शैक्षिक व युवाओं के बीच बातचीत को बढ़ाने के तरीकों पर चर्चा की।