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बाजार के उतार-चढ़ाव से हैं परेशान? बिजनेस साइकिल इन्वेस्टिंग बन सकता है मुनाफे का नया मंत्र

Media Solutions Initiative Published by: मार्केटिंग डेस्क Updated Mon, 02 Feb 2026 02:37 PM IST
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अंकुल मित्तल - फोटो : amarujala.com
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शेयर बाजार में निवेश करना केवल शेयरों के भाव पर नजर रखना नहीं है, बल्कि अर्थव्यवस्था की चाल को समझना भी है। बदलती आर्थिक परिस्थितियों और ग्लोबल अनिश्चितता के बीच, 'बिजनेस साइकिल इन्वेस्टिंग' एक रणनीतिक विकल्प के रूप में उभर रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि बाजार की भविष्यवाणी करने के बजाय, अर्थव्यवस्था को 'पढ़ना' लंबी अवधि में वेल्थ क्रिएशन की कुंजी है।

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क्या है बिजनेस साइकिल इन्वेस्टिंग? 
अर्थव्यवस्था कभी भी एक सीधी रेखा में नहीं बढ़ती। यह अलग-अलग चक्रों  से गुजरती है- कभी इसमें तेजी आती है, तो कभी सुस्ती, कभी रिकवरी होती है, तो कभी गिरावट। हर चरण में लोगों और व्यवसायों के व्यवहार का एक पैटर्न होता है। 'बिजनेस साइकिल इन्वेस्टिंग' इसी विचार पर आधारित है कि इकोनॉमी के अलग-अलग चरणों में कुछ विशिष्ट सेक्टर ही बेहतर प्रदर्शन करते हैं।
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जब अर्थव्यवस्था में तेजी होती है, तो लोग खर्च करते हैं और कंपनियां विस्तार करती हैं। वहीं, गिरावट के दौर में लोग सतर्क हो जाते हैं और खर्च कम कर देते हैं। इन संकेतों को पहचानकर सही समय पर सही सेक्टर में निवेश करना ही इस रणनीति का सार है।

विशेषज्ञ की राय- अर्थव्यवस्था पर रखें नजर 
इस रणनीति के महत्व को समझाते हुए एफसी एंड संस प्राइवेट लिमिटेड के अंकुर मित्तल कहते हैं, "बिजनेस साइकिल इन्वेस्टिंग का अर्थ है बाजार के अल्पकालिक बदलावों की चिंता करने के बजाय पूरी अर्थव्यवस्था पर नजर रखना। महंगाई, ब्याज दरें, सरकारी खर्च और फैक्टरी आउटपुट जैसे आंकड़े हमें बताते हैं कि हम इकोनॉमी के किस चरण में हैं। इसके बाद निवेशक स्थिति के अनुसार अलग-अलग क्षेत्रों में अपने निवेश को समायोजित कर सकते हैं।"

मौजूदा दौर में क्यों है यह जरूरी? 
अंकुर मित्तल के अनुसार, आज के दौर में यह रणनीति और भी अधिक उपयोगी हो गई है क्योंकि अर्थव्यवस्था तेजी से बदल रही है। पहले का समय शांत था, महंगाई कम थी और राजनीति स्थिर थी, जिससे बाजार में लंबे समय तक स्थिरता रहती थी। लेकिन अब उच्च मुद्रास्फीति, ब्याज दरों में उतार-चढ़ाव और वैश्विक तनाव के कारण बाजार में हलचल ज्यादा है। ऐसे में, निवेश को स्थिर मानने के बजाय बदलाव के लिए तैयार रहना जरूरी है।

रिटेल निवेशकों के लिए क्या है रास्ता? 
रिटेल निवेशकों के लिए म्यूचुअल फंड इस रणनीति को अपनाने का सबसे अच्छा माध्यम हैं। भारत में लगभग 18 फंड इस रणनीति का पालन करते हैं। आंकड़ों पर नजर डालें तो जनवरी 2021 में लॉन्च हुए आईसीआईसीआई प्रूडेंशियल बिजनेस साइकिल फंड ने लगातार बेहतर प्रदर्शन किया है। 31 दिसंबर 2025 तक के आंकड़ों के मुताबिक इसका एक साल का सीएजीआर 15.59%, तीन साल का सीएजीआर 22.59% और शुरुआत से अब तक का सीएजीआर 21.02% है। इस फंड ने इन समयावधियों में अपने बेंचमार्क से 4 से 8 प्रतिशत अंक अधिक रिटर्न दिया है।

बाजार के लीडर्स अर्थव्यवस्था के साथ बदलते रहते हैं। जो निवेशक बदलाव के साथ अपने पोर्टफोलियो को एडजस्ट करना सीख जाते हैं, वे मुश्किल दौर को बेहतर तरीके से संभाल सकते हैं। इसलिए, केवल बाजार के सूचकांक को देखने के बजाय, पूरी आर्थिक साइकिल को समझना आज की जरूरत है।

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