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कुंडली का दशम भाव और आपका करियर, ग्रहों के अनुसार कैसे चुनें कार्यक्षेत्र
ज्योतिष डेस्क, अमर उजाला
Published by: Vinod Shukla
Updated Tue, 21 Apr 2026 03:10 PM IST
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सार
कुंडली का दशम भाव बहुत ही महत्वपूर्ण भाव होता है। यह करियर, सफलता और पद-प्रतिष्ठा से जुड़ा हुआ होता है। यहां बैठे ग्रह के आधार पर करियर के दिशा मालूम होती है।
कुंडली में कैसे बनता है नौकरी के योग
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
ज्योतिष में 9 ग्रहों, 12 भावों और 12 राशियों के आपसी संबंध के योग का ज्योतिषीय गणना करके भविष्यवाणी की जाती है। कुंडली में कुल 12 भाव होते हैं और हर एक भाव का संबंध जीवन के किसी न किसी हिस्से से जरूर जुड़ी हुई होती है। कुंडली का दशम भाव बहुत ही महत्वपूर्ण भाव होता है। यह केंद्र का भाव होता है जिस कर्म भाव भी कहा जाता है। इस भाव से जातक के करियर,नौकरी, अधिकार, प्रतिष्ठा और सफलता का विचार किया जाता है। दशम भाव में विराजमान ग्रह या फिर इस भाव में दूसरे ग्रहों की द्दष्टि से करियर की दिशा के बारे में महत्वपूर्ण जानकारियां मिलती है। इस भाव का अध्ययन करके करियर की सही दिशा के बारे में जान सकते हैं। आइए जानते है दशम भाव में बैठे ग्रहों के अनुसार कौन सा करियर आपके लिए शुभ और बेहतरीन साबित हो सकता है।
सूर्य- शासन सत्ता और प्रशासन
अगर किसी जातक की कुंडली के दशम भाव में सूर्य की स्थिति अच्छी है तो जातक को प्रशासनिक क्षेत्रों में बड़ी उपलब्धि हासिल होती है। ऐसे लोग कार्यक्षेत्र में अच्छा नेतृत्व करते हैं। ये लोग सरकारी सेवाओं में, राजनीति और प्रबंधन के क्षेत्र में बड़ी कामयाबी मिलती है।
चंद्रमा- कला और भावनात्मक
ज्योतिष में चंद्रमा को मन और जल का कारक माना जाात है। दशम भाव में चंद्रमा के होने से जातक बहुत ही संवेदनशील और रचनात्मक होता है। ऐसे लोगों का करियर होटल मैनेजमेंट, इंजीनियरिंग, कला, मनोविज्ञान और नर्सिंग में खूब चमकता है।
मंगल- ऊर्जा और जोश
ज्योतिष में मंगल ग्रह जोश और ऊर्जा कारक ग्रह माना जाता है। दशम भाव में मंगल के विराजमान होने पर व्यक्ति कार्यक्षेत्र में चुनौतियों से नहीं घबरता है। ऐसे लोगों का कार्यक्षेत्र सेना, पुलिस, डॉक्टर, इंजीनियरिंग, खेल और रियल एस्टेट में होता है।
बुध- बुद्धि और व्यापार
ज्योतिष में बुध ग्रह को संचार, व्यापार और तर्क का कारक ग्रह माना जाता है। दशम भाव में बुध के होने से व्यक्ति बहुत तेज दिमाग वाला और कुशाग्र बुद्धि वाला होता है। ऐसे लोगों का करियर बैंकिंग, लेखन, व्यापार, पत्रकारिता और कम्पूटर प्रोग्रामिंग के क्षेत्र में बनता है।
ज्योतिष में गुरु को शुभता, विस्तार और सम्मान का कारक ग्रह माना जाता है। दशम भाव में गुरु के विराजमान होने पर व्यक्ति का समाज में बड़ा नाम और ऊंचा पद प्राप्त करता है। ऐसे लोगों का करियर शिक्षा, कानून और वित्तीय सलाहकार के रूप में बनता है।
शुक्र- कला और सौंदर्य
ज्योतिष में शुक्र ग्रह को सुख, विलासिता, सौंदर्य और लग्जरी का कारक माना जाता है। अगर कुंडली के दशम भाव में शुक्र विराजमान होते हैं तो ऐसा व्यक्ति फैशन, अभिनय, संगीत, फिल्म इंडस्ट्री और लग्जरी चीजों के व्यापार में रहता है।
ज्योतिष में शनि को कर्म और मेहनत का कारक ग्रह माना जाता है। दशम भाव में शनि के होने पर व्यक्ति बहुत ज्यादा मेहनती होता है और इनको कार्यो में सफलता बहुत ही देर बाद ही मिलती है। ऐसे जातकों का करियर लोहा, तेल, खनन, न्यायपालिका और कृषि के क्षेत्रों में होता है।
राहु और केतु
कुंडली के दशम भाव में राहु होने से व्यक्ति को अचानक बड़ी सफलता करियर में प्राप्ति होती है। ऐसे लोग राजनीति, विदेशी व्यापार और आईटी सेक्टर तरक्की पाते हैं। वहीं केतु के दशम भाव में होने से धर्म-अध्यात्म और अनुसंधान मे रुचि पैदा होती है।
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ज्योतिष में चंद्रमा को मन और जल का कारक माना जाात है। दशम भाव में चंद्रमा के होने से जातक बहुत ही संवेदनशील और रचनात्मक होता है। ऐसे लोगों का करियर होटल मैनेजमेंट, इंजीनियरिंग, कला, मनोविज्ञान और नर्सिंग में खूब चमकता है।
मंगल- ऊर्जा और जोश
ज्योतिष में मंगल ग्रह जोश और ऊर्जा कारक ग्रह माना जाता है। दशम भाव में मंगल के विराजमान होने पर व्यक्ति कार्यक्षेत्र में चुनौतियों से नहीं घबरता है। ऐसे लोगों का कार्यक्षेत्र सेना, पुलिस, डॉक्टर, इंजीनियरिंग, खेल और रियल एस्टेट में होता है।
बुध- बुद्धि और व्यापार
ज्योतिष में बुध ग्रह को संचार, व्यापार और तर्क का कारक ग्रह माना जाता है। दशम भाव में बुध के होने से व्यक्ति बहुत तेज दिमाग वाला और कुशाग्र बुद्धि वाला होता है। ऐसे लोगों का करियर बैंकिंग, लेखन, व्यापार, पत्रकारिता और कम्पूटर प्रोग्रामिंग के क्षेत्र में बनता है।
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शुक्र- कला और सौंदर्य
ज्योतिष में शुक्र ग्रह को सुख, विलासिता, सौंदर्य और लग्जरी का कारक माना जाता है। अगर कुंडली के दशम भाव में शुक्र विराजमान होते हैं तो ऐसा व्यक्ति फैशन, अभिनय, संगीत, फिल्म इंडस्ट्री और लग्जरी चीजों के व्यापार में रहता है।
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शनि- न्याय और मेहनतज्योतिष में शनि को कर्म और मेहनत का कारक ग्रह माना जाता है। दशम भाव में शनि के होने पर व्यक्ति बहुत ज्यादा मेहनती होता है और इनको कार्यो में सफलता बहुत ही देर बाद ही मिलती है। ऐसे जातकों का करियर लोहा, तेल, खनन, न्यायपालिका और कृषि के क्षेत्रों में होता है।
राहु और केतु
कुंडली के दशम भाव में राहु होने से व्यक्ति को अचानक बड़ी सफलता करियर में प्राप्ति होती है। ऐसे लोग राजनीति, विदेशी व्यापार और आईटी सेक्टर तरक्की पाते हैं। वहीं केतु के दशम भाव में होने से धर्म-अध्यात्म और अनुसंधान मे रुचि पैदा होती है।

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