Shani Ki Dhaiya: साल 2026 में सिंह और धनु राशि के जातकों पर शनि की ढैय्या का प्रभाव बना रहेगा। ढैय्या का असर 3 जून 2027 तक रहने वाला है। ज्योतिषियों के अनुसार, शनि की ढैय्या कष्टकारी समय होता है, जिसमें व्यक्ति को कई तरह की परेशानियां झेलनी पड़ती हैं। यही नहीं यह समय जीवन में चुनौतियां, संघर्ष और धैर्य की परीक्षा लेने वाला माना जाता है। इस दौरान कार्यों में देरी, मानसिक तनाव, स्वभाव में चिड़चिड़ापन, आर्थिक उतार-चढ़ाव और स्वास्थ्य संबंधी परेशानियां देखने को मिल सकती हैं। हालांकि, कुछ उपाय व्यक्ति को शनि की ढैय्या के प्रभावों को कम कर सकते हैं। इस दौरान जातकों को थोड़ी राहत प्राप्त हो सकती हैं। आइए इसके बारे में जानते हैं।
Shani Ki Dhaiya: 2027 तक इन 2 राशि वालों पर शनि की ढैय्या, करियर-कारोबार में बरतें सावधानी
Shani Ki Dhaiya: ज्योतिष शास्त्र में शनि की ढैय्या का प्रभाव बेहद कठिन माना जाता है। यह समय व्यक्ति के तनाव, सेहत में उतार-चढ़ाव व काम में बाधाओं से भरा होता है। ढैय्या का प्रभाव व्यक्ति के जीवन में कई बदलाव भी लेकर आता है।
सिंह और धनु राशि वालों पर ढैय्या का प्रभाव
ज्योतिषियों के मुताबिक, सिंह और धनु राशि वालों को इस अवधि में अपने कार्यों में अपेक्षित सफलता पाने के लिए अधिक मेहनत करनी पड़ सकती है। इस दौरान कई बार पूरी कोशिश के बाद भी परिणाम देर से मिलते हैं, जिससे निराशा महसूस हो सकती है।
आपको नए काम को हमेशा अनुभवी लोगों की सहायता से करना बेहतर रहेगा। आर्थिक मामलों में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है और अनावश्यक खर्च बढ़ सकते हैं। इस दौरान काम को लेकर परेशानियां बनी रहेंगी। हालांकि, मेहनत और धैर्य आपको सफलता भी दिला सकता है। कार्यस्थल पर जिम्मेदारियां बढ़ सकती हैं और दबाव भी महसूस हो सकता है।
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उपाय
ज्योतिषियों के मुताबिक, शनिवार के दिन व्रत रखना और शनि देव की विधि-विधान से पूजा करना लाभकारी माना जाता है। आप काले तिल, काली उड़द, सरसों का तेल और लोहे की वस्तुओं का दान भी करें। इससे शनि के अशुभ प्रभाव को कम किया जा सकता है। इसके अलावा शनिवार को पीपल के पेड़ के नीचे सरसों के तेल का दीपक जलाना शुभ माना जाता है। आप इस समय शनि चालीसा या शनि मंत्र का भी जाप करें। इससे कठिनाइयों में कमी आती है।
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ॐ शनैश्चराय विदमहे छायापुत्राय धीमहि ।
शनि बीज मंत्र
ॐ प्रां प्रीं प्रों स: शनैश्चराय नमः ।।
शनि स्तोत्र
ॐ नीलांजन समाभासं रवि पुत्रं यमाग्रजम ।
छायामार्तंड संभूतं तं नमामि शनैश्चरम ।।
शनि पीड़ाहर स्तोत्र
सुर्यपुत्रो दीर्घदेहो विशालाक्ष: शिवप्रिय: ।
दीर्घचार: प्रसन्नात्मा पीडां हरतु मे शनि: ।।
तन्नो मंद: प्रचोदयात ।।
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