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Yogini Ekadashi 2026: योगिनी एकादशी का व्रत रखने और भगवान विष्णु की पूजा करने से मिलते हैं ये 5 फल
Wed, 08 Jul 2026 06:04 PM IST
विनोद शुक्ला
धर्म डेस्क, अमर उजाला
धर्म डेस्क, अमर उजाला
Published by: विनोद शुक्ला
Updated Wed, 08 Jul 2026 06:04 PM IST
सार
Yogini Ekadashi 2026: हिंदू धर्म में आषाढ़ माह के कृष्ण पक्ष की योगिनी एकादशी का विशेष महत्व होता है। इस एकादशी का व्रत करने से एक साथ कई तरह के लाभ मिलते हैं।
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योगिनी एकादशी का धार्मिक महत्व
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
Yogini Ekadashi 2026: हिंदू धर्म में योगिनी एकादशी व्रत का विशेष महत्व होता है। हर वर्ष आषाढ़ माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि पर पड़ने वाली एकादशी को योगिनी एकादशी के नाम से जाना जाता है, जिसका न सिर्फ धार्मिक महत्व है बल्कि इसका आत्म नियंत्रण, संयम और भगवान के प्रति समर्पण की भावना है। एकादशी पर भक्त व्रत रखते हुए दिनभर भगवान विष्णु के मंत्रों का जाप करते हुए पूजन-अर्चना करते हैं। इस दिन दान करने का विशेष महत्व होता है। आइए जानते हैं योगिनी एकादशी का व्रत रखने से किन-किन फलों की प्राप्ति होती है।
1- पापों से मुक्ति पाने का फल
हिंदू धर्म में पाप और पुण्य की अवधारणा का विशेष महत्व होता है। कई बार व्यक्ति से जाने-अनजाने में कई तरह के पाप हो जाते हैं, ऐसे में धार्मिक मान्यता है कि योगिनी एकादशी पर व्रत रखने से व्यक्ति के पुराने पाप नष्ट हो जाते हैं।
2- बीमारियों से मुक्ति
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, योगिनी एकादशी का व्रत रखने से व्यक्ति के त्वचा संबंधी रोगों से मुक्ति मिलती है। वहीं इस व्रत को रखने से गंभीर बीमारियों से मुक्ति मिलती है। इस तरह से यह व्रत अच्छी सेहत और आरोग्यता प्राप्त करने के लिए रखा जाता है।
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3- 88 हजार ब्राह्राणों को भोजन कराने का पुण्य
शास्त्रों में योगिनी एकादशी के व्रत के बारे में ऐसी मान्यता है कि जो कोई इस एकादशी का व्रत और भगवान विष्णु की पूजा करता है, उसको 88 हजार ब्राह्राणों को भोजन करने के बराबर का विशेष पुण्य लाभ मिलता है। इस तरह से आषाढ़ माह के कृष्ण पक्ष की योगिनी एकादशी व्रत का विशेष महत्व होता है।
4-सुख-समृद्धि और संपन्नता
योगिनी एकादशी के व्रत के प्रभाव से व्यक्ति के जीवन में दरिद्रता और आर्थिक परेशानियों से निजात मिलती है। इस एकादशी का व्रत करने से भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की कृपा से धन-धान्य में वृद्धि होती है और पारिवारिक जीवन में सुख-शांति की प्राप्ति होती है।
5- मोक्ष की प्राप्ति
योगिनी एकादशी का व्रत रखने से मृत्यु के बाद बैकुंठ धाम की प्राप्ति होती है और योगिनी एकादशी का व्रत करने से जीवन-मरण के बंधनों से मुक्त हो जाता है।Chaturmas 2026: कब से शुरू हो रहा है चातुर्मास? जानें जुलाई में कब से बंद होंगे मांगलिक कार्य
डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।
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1- पापों से मुक्ति पाने का फल
हिंदू धर्म में पाप और पुण्य की अवधारणा का विशेष महत्व होता है। कई बार व्यक्ति से जाने-अनजाने में कई तरह के पाप हो जाते हैं, ऐसे में धार्मिक मान्यता है कि योगिनी एकादशी पर व्रत रखने से व्यक्ति के पुराने पाप नष्ट हो जाते हैं।
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2- बीमारियों से मुक्ति
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, योगिनी एकादशी का व्रत रखने से व्यक्ति के त्वचा संबंधी रोगों से मुक्ति मिलती है। वहीं इस व्रत को रखने से गंभीर बीमारियों से मुक्ति मिलती है। इस तरह से यह व्रत अच्छी सेहत और आरोग्यता प्राप्त करने के लिए रखा जाता है।
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3- 88 हजार ब्राह्राणों को भोजन कराने का पुण्य
शास्त्रों में योगिनी एकादशी के व्रत के बारे में ऐसी मान्यता है कि जो कोई इस एकादशी का व्रत और भगवान विष्णु की पूजा करता है, उसको 88 हजार ब्राह्राणों को भोजन करने के बराबर का विशेष पुण्य लाभ मिलता है। इस तरह से आषाढ़ माह के कृष्ण पक्ष की योगिनी एकादशी व्रत का विशेष महत्व होता है।
4-सुख-समृद्धि और संपन्नता
योगिनी एकादशी के व्रत के प्रभाव से व्यक्ति के जीवन में दरिद्रता और आर्थिक परेशानियों से निजात मिलती है। इस एकादशी का व्रत करने से भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की कृपा से धन-धान्य में वृद्धि होती है और पारिवारिक जीवन में सुख-शांति की प्राप्ति होती है।
5- मोक्ष की प्राप्ति
योगिनी एकादशी का व्रत रखने से मृत्यु के बाद बैकुंठ धाम की प्राप्ति होती है और योगिनी एकादशी का व्रत करने से जीवन-मरण के बंधनों से मुक्त हो जाता है।
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डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।