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Badge Engineering: एक ही गाड़ी, फिर भी बिक्री में 18 गुना का अंतर; जानें क्यों बदलते ही लोगो बदल जाती है पसंद

ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Jagriti Updated Sun, 08 Mar 2026 05:10 PM IST
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सार

Car Sales Report India: भारतीय ऑटो बाजार में बैज इंजीनियरिंग (एक ही कार को अलग नाम से बेचना) का चलन जोरों पर है, लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि एक ही प्लेटफॉर्म और इंजन होने के बावजूद टोयोटा और मारुति की बिक्री में जमीन-आसमान का अंतर क्यों है? 2025 के लेटेस्ट सेल्स आंकड़ों के साथ समझिए कि क्यों ग्राहक अर्टिगा के लिए मारुति और फॉर्च्यूनर या इनोवा के लिए टोयोटा के शोरूम दौड़ते हैं।
 

Badge Engineering: Same Car, But 18x Sales Difference Why Brand Loyalty Outweighs Product
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Freepik
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विस्तार

आज कई ऑटो कंपनियां लागत कम करने और जल्दी नए मॉडल लॉन्च करने के लिए एक ही प्लेटफॉर्म, इंजन और टेक्नोलॉजी साझा करती हैं। जैसे मारुति सुजुकी और टाेयोटा के बीच पार्टनशिप के तहत कई मॉडल्स एक-दूसरे के रीबैज्ड वर्जन के रूम में बेचे जा रहे हें। रिपोर्ट के अनुसार FY2025 में टोयोटा इंडिया की कुल बिक्री का करीब 53 प्रतिशत हिस्सा मारुति के रीबैज्ड मॉडल्स से आया। लेकिन जब इन ट्विन कारों की बिक्री देखी जाती है तो कई मामलों में अंतर बेहद बड़ा निकलता है।
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एक ही कार, दो नाम… फिर भी बिक्री में इतना बड़ा फर्क क्यों?

मारुति सुजुकी बलेनो vs टोयोटा ग्लैंजा
हैचबैक सेगमेंट में मारुति सुजुकी बलेनो और टोयोटा ग्लैंजा लगभग एक जैसी कारें हैं, लेकिन बिक्री के आंकड़े अलग तस्वीर दिखाते हैं। 2025 में बलेनो की 1,72,556 यूनिट्स बिकीं, जबकि ग्लैंजा की 54,440 यूनिट्स ही बिक पाईं। यानी बलेनो की बिक्री करीब तीन गुना ज्यादा रही। इसके पीछे मुख्य वजह यह है कि बलेनो पहले बाजार में आई, जिससे इसे मजबूत ब्रांड रिकॉल मिला। साथ ही मारुति सुजुकी का बड़ा सर्विस नेटवर्क और तुलनात्मक रूप से थोड़ी कीमत भी ग्राहकों को अपनी ओर आकर्षित करती है।
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मारुति सुजुकी फ्रोंक्स बनाम टोयोटा अर्बन क्रूजर टाइसर
कॉम्पैक्ट एसयूवी सेगमेंट में मारुति सुजुकी फ्रोंक्स और टोयोटा अर्बन क्रूजर टाइसर एक ही प्लेटफॉर्म पर आधारित हैं। हालांकि बिक्री में बड़ा अंतर देखने को मिलता है। 2025 में फ्रोंक्स की 1,79,894 यूनिट्स बिकीं, जबकि टाइसर की 36,268 यूनिट्स ही बिक सकीं। यानी फ्रोंक्स की बिक्री करीब पांच गुना ज्यादा रही। इसकी मुख्य वजह मारुति की मजबूत ब्रांड पकड़, कम मेंटेनेंस लागत और देशभर में फैला बड़ा डीलरशिप नेटवर्क माना जाता है।

निसान मैग्नाइट बनाम रेनो काइगर
सबकॉम्पैक्ट एसयूवी सेगमेंट में निसान मैग्नाइट और रेनो काइगर एक ही प्लेटफॉर्म और इंजन विकल्प साझा करते हैं। 2025 में मैग्नाइट की 22,280 यूनिट्स बिकीं, जबकि काइगर की 9,777 यूनिट्स ही बिक्री दर्ज हुई। यहां अंतर अन्य जोड़ों की तुलना में कम है, लेकिन मैग्नाइट की बिक्री ज्यादा रही। इसकी मुख्य वजह इसकी एसयूवी जैसी डिजाइन, बेहतर वैल्यू-फॉर-मनी पैकेज और लोअर वेरिएंट्स में मिलने वाले बेहतर फीचर्स हैं।

मारुति सुजुकी अर्टिगा बनाम टोयोटा रुमियन
एमपीवी सेगमेंट में मारुति सुजुकी अर्टिगा और टोयोटा रुमियन लगभग एक जैसी कारें हैं, लेकिन बिक्री में भारी अंतर देखने को मिला। 2025 में अर्टिगा की 1,92,025 यूनिट्स बिकीं, जबकि रुमियन की 20,723 यूनिट्स ही बिक पाईं। यानी अर्टिगा की बिक्री करीब नौ गुना ज्यादा रही। इसकी मुख्य वजह कम कीमत, फ्लीट मार्केट में इसकी मजबूत पकड़ और सस्ती सर्विस व स्पेयर पार्ट्स की उपलब्धता है।

फोक्सवैगन वर्टस बनाम स्कोडा स्लाविया
सेडान सेगमेंट में फोक्सवैगन वर्टस और स्कोडा स्लाविया के बीच मुकाबला दिलचस्प रहा। 2025 में वर्टस  की 22,844 यूनिट्स बिकीं, जबकि स्लाविया की 13,471 यूनिट्स बिक्री दर्ज हुई। यहां फोक्सवैगन आगे रही। इसका मुख्य वजह वर्टस का स्पोर्टी डिजाइन, जीटी वेरिएंट्स और युवा खरीदारों को आकर्षित करने वाली पोजिशनिंग मानी जाती है।

मारुति सुजुकी ग्रैंड विटारा बनाम टोयोटा अर्बन क्रूजर हाइराइडर
मिड-साइज एसयूवी सेगमेंट में मारुति सुजुकी ग्रैंड विटारा और टोयोटा अर्बन क्रूजर हाइराइडर के बीच मुकाबला काफी कड़ा रहा। 2025 में ग्रैंड विटारा की 1,04,209 यूनिट्स बिकीं, जबकि हाइराइडर की 85,710 यूनिट्स बिक्री हुई। यहां अंतर ज्यादा बड़ा नहीं है। ग्रैंड विटारा को मारुति के बड़े सर्विस नेटवर्क और किफायती कीमत का फायदा मिलता है, जबकि हाइराइडर को टोयोटा की मजबूत हाइब्रिड टेक्नोलॉजी का सहारा मिलता है।

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फोक्सवैगन टाइगुन बनाम स्कोडा कुशाक
कॉम्पैक्ट SUV सेगमेंट में फोक्सवैगन टाइगुन ने अपने ट्विन स्कोडा कुशाक को बिक्री में पीछे छोड़ा। 2025 में टाइगुन की 15,715 यूनिट्स बिकीं, जबकि कुशाक की 10,744 यूनिट्स बिक्री हुई। दोनों एसयूवी का ड्राइविंग अनुभव लगभग समान है क्योंकि ये एक ही प्लेटफॉर्म और इंजन विकल्प साझा करती हैं। ऐसे में खरीदार अक्सर डिजाइन, इंटीरियर स्टाइल और डीलरशिप ऑफर के आधार पर फैसला लेते हैं।

मारुति सुजुकी इनविक्टो बनाम टोयोटा इनोवा हाइक्रॉस
एमपीवी सेगमेंट में सबसे बड़ा अंतर टोयोटा इनोवा हाइक्रॉस और मारुति सुजुकी इनविक्टो के बीच देखने को मिला। 2025 में इनोवा हाइक्रॉस की 73,244 यूनिट्स बिकीं, जबकि इनविक्टो की सिर्फ 3,946 यूनिट्स बिक्री हुई। यानी हाइक्रॉस ने लगभग 18 गुना ज्यादा बिक्री दर्ज की। इसकी सबसे बड़ी वजह इनोवा नाम की मजबूत प्रतिष्ठा है, जिसे भारतीय खरीदार लंबे समय से भरोसेमंद एमपीवी के रूप में देखते आए हैं।

क्यों होता है इतनी बिक्री का फर्क?
ऑटो एक्सपर्ट्स के अनुसार इसके पीछे कई कारण होते हैं:
  • ब्रांड इमेज और भरोसा।
  • कीमत में छोटा फर्क।
  • सर्विस नेटवर्क और मेंटेनेंस लागत।
  • डिजाइन और मार्केटिंग पोजिशनिंग।
  • लॉन्च का समय और ब्रांड रिकॉल।
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