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CAFE-III का असर: बढ़ सकते हैं पेट्रोल-डीजल कारों के दाम? जानें क्या है ये सरकारी नियम और क्यों है जरूरी
ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Jagriti
Updated Tue, 14 Apr 2026 10:10 AM IST
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सार
CAFE-III norms India 2027: क्या आप भी नई कार लेने का विचार बना रहे हैं? तो देरी करना महंगा पड़ सकता है। क्योंकि आने वाले कुछ समय में आपको आजार में कारों की कीमतों और उनके इंजन में बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं। 2027 से लागू होने वाले ये नियम न सिर्फ कंपनियों की नींद उड़ा सकते हैं, बल्कि आपकी जेब पर भी असर डाल सकते हैं। जानिए क्या है नया नियम? और क्यों बड़ सकते हैं दाम?
प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : adobe stock
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विस्तार
Impact of CAFE-III on car prices: सरकार कार कंपनियों के लिए कड़े नियम ला रही है, जिससे कारों का माइलेज और इंजन टेक्नोलॉजी पूरी तरह बदलने वाली है। CAFE-III मानकों के आने से गाड़ियों की कीमतों में 5 प्रतिशत से 10 प्रतिशत तक उछाल आ सकता है।
क्या है यह नया CAFE-III नियम?
CAFE का मतलब है कॉर्पोरेट औसत ईंधन दक्षता (Corporate Average Fuel Efficiency)। इसमें सरकार ने कंपनियों को एक माइलेज टारगेट दिया है, उन्हें अपनी ओर से बेची गई सभी कारों का एक औसत माइेज बनाए रखना होगा। अगर कंपनी ऐसा नहीं करती हैं, या कंपनी की गाड़ियां ज्यादा तेजी पीती है, तो वो सरकार के उस टारगेट को पूरा नहीं कर पाती, ऐसे में कंपनियों को जुर्माना भी भरना पड़ सकता है। अब सरकार 2027 से इसके तीसरे चरण यानी की कैफे-3 को और सख्त करने की तैयारी में है।
फिर आम ग्राहकों के जेब पर क्यों असर पड़ेगा?
देखिए, कंपनियों को अपनी कारों का माइलेज बढ़ाने के लिए इंजन को बेहतर बनाना होगा, उसका वजन कम करना होगा और नई टेक्नोलॉजी जोड़नी होगी। इसमें मेहनत और रिसर्च में होने वाला खर्च दोनों बढ़ जाएगा, तो अंत में कार की कीमत में जुड़ जाएगा। एक्सपर्ट्स का कहना है कि नई गाड़ियां करीब पांच प्रतिशत से 10 प्रतिशत से महंगी हो सकती हैं।
इसके अलावा कैफे-III की वजह अब आप देख सकते हैं कि कंपनियां सादे पेट्रोल-डीजल इंजन से हटकर हाइब्रिड , यानी जिसमें बैटरी और इंजन दोनों होते हैं, या फिर इलेक्ट्रिक गाड़ियों पर जोर दे रही हैं। हाइब्रिड गाड़ियां माइलेज के मामले में कमाल होती हैं, इसलिए आने वाले समय में बाजार में इनकी भरमार होने की संभावना है।
क्या छोटी कंपनियां बंद हो जाएंगी?
एक्सपर्ट्स का मानना है कि ये नियम बड़ी कंपनियों के लिए ठीक है, लेकिन छोटी कार कंपनियों के लिए महंगा साबित हो सकता है। इसी वजह से कुछ कंपनियां सरकार से अपील कर रही हैं कि इसे एकदम से लागू करने के बजाय धीरे-धीरे चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाए।
क्या आपको चिंता करने की जरूरत है?
देखा जाए तो यह नियम लंबी दौड़ में हमारे और पर्यावरण के लिए अच्छे हैं। कम तेल पीने वाली गाड़ियां हमारे पैसे बचाएंगी और प्रदूषण भी कम होगा। हालांकि, अभी चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर की कमी एक बड़ी चुनौती है, इसलिए हाइब्रिड गाड़ियां फिलहाल सबसे सुरक्षित और बेहतर विकल्प बनकर सामने आ रही हैं।
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क्या है यह नया CAFE-III नियम?
CAFE का मतलब है कॉर्पोरेट औसत ईंधन दक्षता (Corporate Average Fuel Efficiency)। इसमें सरकार ने कंपनियों को एक माइलेज टारगेट दिया है, उन्हें अपनी ओर से बेची गई सभी कारों का एक औसत माइेज बनाए रखना होगा। अगर कंपनी ऐसा नहीं करती हैं, या कंपनी की गाड़ियां ज्यादा तेजी पीती है, तो वो सरकार के उस टारगेट को पूरा नहीं कर पाती, ऐसे में कंपनियों को जुर्माना भी भरना पड़ सकता है। अब सरकार 2027 से इसके तीसरे चरण यानी की कैफे-3 को और सख्त करने की तैयारी में है।
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फिर आम ग्राहकों के जेब पर क्यों असर पड़ेगा?
देखिए, कंपनियों को अपनी कारों का माइलेज बढ़ाने के लिए इंजन को बेहतर बनाना होगा, उसका वजन कम करना होगा और नई टेक्नोलॉजी जोड़नी होगी। इसमें मेहनत और रिसर्च में होने वाला खर्च दोनों बढ़ जाएगा, तो अंत में कार की कीमत में जुड़ जाएगा। एक्सपर्ट्स का कहना है कि नई गाड़ियां करीब पांच प्रतिशत से 10 प्रतिशत से महंगी हो सकती हैं।
इसके अलावा कैफे-III की वजह अब आप देख सकते हैं कि कंपनियां सादे पेट्रोल-डीजल इंजन से हटकर हाइब्रिड , यानी जिसमें बैटरी और इंजन दोनों होते हैं, या फिर इलेक्ट्रिक गाड़ियों पर जोर दे रही हैं। हाइब्रिड गाड़ियां माइलेज के मामले में कमाल होती हैं, इसलिए आने वाले समय में बाजार में इनकी भरमार होने की संभावना है।
क्या छोटी कंपनियां बंद हो जाएंगी?
एक्सपर्ट्स का मानना है कि ये नियम बड़ी कंपनियों के लिए ठीक है, लेकिन छोटी कार कंपनियों के लिए महंगा साबित हो सकता है। इसी वजह से कुछ कंपनियां सरकार से अपील कर रही हैं कि इसे एकदम से लागू करने के बजाय धीरे-धीरे चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाए।
क्या आपको चिंता करने की जरूरत है?
देखा जाए तो यह नियम लंबी दौड़ में हमारे और पर्यावरण के लिए अच्छे हैं। कम तेल पीने वाली गाड़ियां हमारे पैसे बचाएंगी और प्रदूषण भी कम होगा। हालांकि, अभी चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर की कमी एक बड़ी चुनौती है, इसलिए हाइब्रिड गाड़ियां फिलहाल सबसे सुरक्षित और बेहतर विकल्प बनकर सामने आ रही हैं।
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