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Delhi Cars: 2025 में दिल्ली में वाहनों की बंपर बिक्री, लेकिन गाड़ियों की रिकॉर्ड बिक्री क्यों है खतरे की घंटी!

ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: अमर शर्मा Updated Thu, 01 Jan 2026 05:05 PM IST
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सार

दिल्ली में 2025 में गाड़ियों के रजिस्ट्रेशन में बहुत ज्यादा बढ़ोतरी देखी गई। और 8.2 लाख से ज्यादा नई गाड़ियां सड़कों पर आईं, जो किसी एक साल में अब तक की सबसे ज्दाया संख्या है।

Delhi Record Vehicle Sales in 2025 Raise Alarms Over Rising Petrol Cars and Air Pollution
Delhi Traffic - फोटो : PTI
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विस्तार
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साल 2025 में दिल्ली में वाहन पंजीकरण ने अब तक का सबसे ऊंचा स्तर छू लिया। एक ही साल में 8.2 लाख से ज्यादा नए वाहन सड़कों पर उतरे, जो आर्थिक गतिविधियों और बढ़ती क्रय शक्ति का संकेत तो देते हैं। लेकिन इसके साथ ही ट्रैफिक जाम और वायु प्रदूषण को लेकर नई चिंताएं भी खड़ी कर रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यह उछाल मुख्य रूप से निजी पेट्रोल वाहनों की वजह से आया है, जो सार्वजनिक परिवहन की सीमाओं को उजागर करता है। 
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निजी वाहनों का वर्चस्व और बढ़ती निर्भरता
आंकड़ों के मुताबिक, 2025 में दर्ज हुए कुल 8,16,051 नए वाहनों में से करीब 7.2 लाख निजी वाहन थे। यह साफ दिखाता है कि राजधानी के लोग सार्वजनिक या साझा परिवहन की तुलना में निजी साधनों पर ज्यादा भरोसा कर रहे हैं। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, दोपहिया और कारें अब भी सबसे पसंदीदा विकल्प बने हुए हैं।

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पेट्रोल का दबदबा बरकरार
रिपोर्ट बताती है कि नए पंजीकृत वाहनों में से लगभग 75 प्रतिशत पेट्रोल से चलने वाले थे। इनमें 3.89 लाख केवल पेट्रोल वाहन और 1.99 लाख पेट्रोल-एथनॉल कंपैटिबल वाहन शामिल हैं। डीजल वाहनों की हिस्सेदारी जरूर घटी है। जिसे विशेषज्ञ नियमों और प्रतिबंधों का असर मानते हैं। लेकिन पेट्रोल पर निर्भरता अब भी जस की तस बनी हुई है। 

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EV नीति के बावजूद बढ़ती चुनौतियां
रिपोर्ट के मुताबिक, इंटरनेशनल काउंसिल ऑन क्लीन ट्रांसपोर्टेशन के भारत प्रमुख अमित भट्ट के अनुसार, डीजल पर लगाम तो लगी है, लेकिन पेट्रोल वाहनों की संख्या चिंता का विषय है। उनका कहना है कि निजी पेट्रोल वाहनों पर इतनी निर्भरता से ट्रैफिक और प्रदूषण दोनों ही और खराब होने की आशंका है। भले ही ईंधन का प्रकार बदले, लेकिन सड़कों पर वाहनों की संख्या बढ़ने से जाम और वायु गुणवत्ता पर दबाव बढ़ना तय है।

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एथनॉल ब्लेंडिंग से नहीं बदला ट्रेंड
एशियन इंस्टीट्यूट ऑफ ट्रांसपोर्ट डेवलपमेंट के फैकल्टी सदस्य अनिल छिकरा ने स्पष्ट किया कि पेट्रोल-एथनॉल वाहनों की संख्या बढ़ने का मतलब यह नहीं है कि उपभोक्ता सचेत रूप से कोई वैकल्पिक ईंधन चुन रहे हैं। सरकार द्वारा एथनॉल ब्लेंडिंग अनिवार्य किए जाने के कारण अधिकतर नए पेट्रोल वाहन वैसे ही एथनॉल संगत हो गए हैं। ऐसे में पेट्रोल और पेट्रोल-एथनॉल को एक ही श्रेणी के रूप में देखा जाना चाहिए। 

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त्योहारों में आई जबरदस्त तेजी
जनवरी से सितंबर तक वाहन पंजीकरण अपेक्षाकृत स्थिर रहा और हर महीने औसतन 50,000 से 70,000 वाहन दर्ज हुए। असली उछाल त्योहारी सीजन में देखने को मिला। अक्तूबर में अकेले 1.14 लाख वाहन पंजीकृत हुए, जबकि नवंबर में यह आंकड़ा 88,804 रहा। विशेषज्ञों के मुताबिक, त्योहारों की खरीदारी, साल के आखिर में मिलने वाली छूट, नए मॉडल लॉन्च, जीएसटी कटौती और आसान फाइनेंसिंग ने मिलकर बिक्री को नई ऊंचाई दी।

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दोपहिया आगे, सार्वजनिक परिवहन पीछे
दिल्ली में सबसे ज्यादा हिस्सेदारी दोपहिया वाहनों की रही। मोटरसाइकिल और स्कूटर मिलाकर 5.31 लाख से ज्यादा पंजीकरण हुए, जो कुल आंकड़े का लगभग दो-तिहाई है। कार और एसयूवी की संख्या 1.9 लाख रही, जो बढ़ती मध्यम वर्गीय आकांक्षाओं को दर्शाती है। वहीं, बसों और मैक्सी कैब्स की बिक्री बेहद सीमित रही, जिससे सार्वजनिक परिवहन की कमजोर स्थिति सामने आती है। 

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EV और CNG की मौजूदगी, लेकिन अभी सीमित
इलेक्ट्रिक और सीएनजी वाहनों की हिस्सेदारी धीरे-धीरे बढ़ रही है, लेकिन निजी पेट्रोल वाहनों के मुकाबले यह अब भी काफी कम है। हाइब्रिड वाहन भी सीमित दायरे में ही बने हुए हैं, जबकि डीजल वाहन सख्त नियमों और प्रदूषण के कारण लगातार पीछे हट रहे हैं।

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रिकॉर्ड साल बनने की वजहें
अर्थशास्त्रियों और परिवहन विशेषज्ञों का मानना है कि बढ़ती आय, आसान ऑटो लोन और कोविड के बाद साझा परिवहन से दूरी ने निजी वाहनों की मांग को तेज किया। इसके अलावा, मेट्रो विस्तार के बावजूद कमजोर लास्ट-माइल कनेक्टिविटी ने कई परिवारों को दूसरा या तीसरा वाहन खरीदने के लिए मजबूर किया। नतीजतन, 2025 दिल्ली के लिए वाहन बिक्री का रिकॉर्ड साल बन गया। लेकिन इसके पर्यावरणीय और ट्रैफिक असर आने वाले वर्षों में और गंभीर हो सकते हैं। 

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