डीजल ट्रकों की छुट्टी: अब आसान लोन और भारी सब्सिडी पर मिलेंगे इलेक्ट्रिक ट्रक-बस, जानें सरकार का मेगा प्लान
Ministry of Heavy Industries EV Financing Meeting: भारत में इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को नई रफ्तार देने की तैयारी शुरू हो गई है। अब सरकार इलेक्ट्रिक कार तक सीमित नहीं रहना चाहती, बल्कि इलेक्ट्रिक बसों व ट्रकों को भी बढ़ावा देना चाहती है। इसीलिए भारी उद्योग मंत्रालय ने सार्वजनिक और निजी बैंकों, ट्रांसपोर्ट संगठनों और फ्लीट ऑपरेटर्स के साथ एक हाई-लेवल बैठक की, जिसमें ईवी कमर्शियल व्हीकल्स की फाइनेंसिंग को आसान बनाने पर विस्तार से चर्चा हुई।
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Government Incentives for Electric Commercial Vehicles: सरकार का मानना है कि इलेक्ट्रिक बसों और ट्रकों को तेजी से अपनाने से देश में प्रदूषण कम होगा और डीजल-पेट्रोल पर निर्भरता घटेगी। इसके साथ ही ईंधन आयात पर होने वाला खर्च भी कम किया जा सकेगा। पॉलिसी मेकर्स अब पैसेंजर ईवी से आगे बढ़कर कमर्शियल इलेक्ट्रिक व्हीकल्स पर ज्यादा फोकस कर रहे हैं, क्योंकि भारी वाहनों से उत्सर्जन का स्तर काफी ज्यादा होता है।
आपको बता दें यह हाई-लेवल बैठक नई दिल्ली के जीपीक्यूए-3 में आयोजित की गई, जिसकी अध्यक्षता केंद्रीय भारी उद्योग और इस्पात मंत्री एच डी कुमारस्वामी ने की। मंत्रालय का कहना है कि बैठक का मुख्य उद्देश्य ईवी बसों और ट्रकों की फाइनेंसिंग से जुड़ी मौजूदा चुनौतियों को समझना और समाधान तलाशना था। इस बैठक् में कई बड़े सरकारी और निजी बैंक के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए। जैसे स्टेट बैंक ऑफ इंडिया, पंजाब नेशनल बैंक, केनरा बैंक, एचएडीएफसी बैंक आदि। इसके अलावा कई ट्रांसपोर्ट और बस ऑपरेटर्स एसोसिएशंस ने भी हिस्सा लिया, जिनमें अखिल भारतीय मोटर परिवहन कांग्रेस, बस ऑपरेटर परिसंघ और भारत कर्नाटक बस ऑपरेटर संघ जैसे संगठन शामिल थे।
The Ministry of Heavy Industries (MHI), Government of India, held a high-level meeting under the chairmanship of Shri H. D. Kumaraswamy, Hon’ble Union Minister for Heavy Industries & Steel, today at GPOA-3, New Delhi, with senior representatives of public and private sector banks… pic.twitter.com/bqRCWvI0bL
— Ministry of Heavy Industries (@MHI_GoI) May 20, 2026
ईवी फाइनेंसिंग में क्या हैं सबसे बड़ी चुनौतियां?
निजी ट्रांसपोर्ट ऑपरेटर्स का कहना है कि इलेक्ट्रिक बसों और ट्रकों की शुरुआती कीमत अभी भी काफी ज्यादा है। ऐसे में कई ऑपरेटर्स के लिए बड़े स्तर पर EV खरीदना आसान नहीं है। बैंक भी हाई-कॉस्ट इलेक्ट्रिक कमर्शियल व्हीकल्स पर लोन देते समय जोखिम को लेकर सतर्क रहते हैं। इसी वजह से सरकार अब नए फाइनेंस मॉडल्स पर काम कर रही है।
बैठक में दो बड़े प्रस्तावों परचर्चा हुई:
1. क्रेडिट गारंटी योजना
इस स्कीम का उद्देश्य बैंकों के जोखिम को कम करना है। अगर सरकार गारंटी देगी, तो बैंक इलेक्ट्रिक बसों और ट्रकों के लिए आसानी से लोन दे सकेंगे।
2. इंटरेस्टेड सब्सिडी
इसके अलावा सरकार ब्याज सब्सिडी भी दे सकती है। इस पर भी विचार किया जा रहा है, ताकि ईवी खरीदने वालों के लिए लोन सस्ता हो सके। इससे निजी ट्रांसपोर्ट कंपनियों की लागत कम हो सकती है।
1 बिलियल डॉलर से ज्यादा इंसेंटिव्स की चर्चा
रिपोर्ट्स की माने तो सरकार निजी सेक्टर में ईवी बसों और ट्रकों को तेजी से अपनाने के लिए 1 बिलियन डॉलर से ज्यादा के इंसेंटिव्स पर विचार कर रही है। अगर यह योजना लागू होती है, तो भारत में इलेक्ट्रिक कमर्शियल व्हीकल मार्केट को बड़ा बूस्ट मिल सकता है।
क्यों अहम है यह कदम?
भारत तेजी से ग्रीन मोबिलिटी की तरफ बढ़ रहा है। ऐसे में इलेक्ट्रिक बसें और ट्रक सिर्फ पर्यावरण के लिए ही नहीं, बल्कि लंबे समय में ट्रांसपोर्ट कंपनियों के खर्च को कम करने में भी मदद कर सकते हैं। सरकार की नई रणनीति से आने वाले समय में सड़कों पर ज्यादा इलेक्ट्रिक कमर्शियल व्हीकल्स दिखाई दे सकते हैं, जिससे भारत का EV इकोसिस्टम और मजबूत होगा।