Electric Vehicles: ओडिशा सरकार का बड़ा फैसला, सरकारी विभागों में एक जून से खरीदे जाएंगे केवल इलेक्ट्रिक वाहन
पश्चिम एशिया में जारी हालात के कारण ईंधन आपूर्ति को लेकर चिंताओं के बीच, मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने सरकारी विभागों को पेट्रोल और डीजल की खपत कम करने के लिए 8-सूत्रीय निर्देश जारी किए हैं।
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पश्चिम एशिया में जारी हालातों के चलते ईंधन आपूर्ति पर मंडराते संकट को देखते हुए ओडिशा सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने ईंधन की खपत घटाने के लिए एक कड़ा 8-सूत्रीय निर्देश जारी किया है। जिसके तहत 1 जून से सभी सरकारी विभागों में पेट्रोल-डीजल वाहनों की खरीद पर रोक लगा दी गई है। और केवल इलेक्ट्रिक वाहन (ईवी) खरीदने को अनिवार्य कर दिया गया है।
भुवनेश्वर में गुरुवार को मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी द्वारा जारी इन दिशा-निर्देशों का उद्देश्य राज्य सचिवालय से लेकर ब्लॉक स्तर तक, सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (PSU), संस्थानों और विश्वविद्यालयों सहित सभी स्तरों पर पेट्रोल और डीजल की खपत को नियंत्रित करना है।
नए नियमों के तहत वाहनों की खरीद और किराए पर लेने को लेकर क्या बदलाव किए गए हैं?
मुख्यमंत्री कार्यालय (सीएमओ) द्वारा जारी निर्देश के अनुसार, सरकारी कामकाज में इस्तेमाल होने वाली गाड़ियों को लेकर नियम पूरी तरह बदल दिए गए हैं:
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केवल ईवी की खरीद: 1 जून से सरकारी उपयोग के लिए खरीदे जाने वाले सभी नए दोपहिया और चार-पहिया वाहन अनिवार्य रूप से केवल इलेक्ट्रिक वाहन (ईवी) होने चाहिए।
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विशेष परिस्थितियों में ही पेट्रोल-डीजल: पेट्रोल या डीजल वाहनों की खरीद की अनुमति अब केवल विशेष और असाधारण परिस्थितियों में ही दी जाएगी।
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किराए की गाड़ियों पर भी नियम लागू: सरकारी कार्यालयों के लिए किराए पर ली जाने वाली गाड़ियों पर भी यही नियम समान रूप से लागू होगा।
आधिकारिक बैठकों और समीक्षाओं को लेकर क्या गाइडलाइंस हैं?
दैनिक प्रशासनिक गतिविधियों में ईंधन और यात्रा के खर्च को कम करने के लिए तकनीक का सहारा लिया जाएगा:
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वर्चुअल मोड अनिवार्य: आधिकारिक बैठकें, समीक्षाएं और ट्रेनिंग सेशन अनिवार्य रूप से वर्चुअल मोड (ऑनलाइन) में आयोजित किए जाएंगे।
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भौतिक उपस्थिति पर रोक: भौतिक रूप से बैठक तभी होगी जब आमने-सामने उपस्थित होना पूरी तरह अपरिहार्य हो। ऐसे मामलों में भी केवल आवश्यक कर्मी ही व्यक्तिगत रूप से शामिल होंगे, जबकि अन्य लोग वर्चुअल माध्यम से जुड़ेंगे।
वरिष्ठ अधिकारियों के वाहन उपयोग और ईंधन आवंटन में क्या कटौती की गई है?
वरिष्ठ अधिकारियों को आवंटित होने वाली गाड़ियों और ईंधन की सीमा को आधा कर दिया गया है:
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कारपूलिंग अनिवार्य: जिन वरिष्ठ अधिकारियों को आधिकारिक वाहन आवंटित किए गए हैं, उन्हें कारपूल करने के लिए कहा गया है।
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ईंधन आवंटन आधा: कारपूलिंग लागू होने के साथ ही ऐसे वाहनों के लिए किए जाने वाले ईंधन आवंटन में 50 प्रतिशत यानी आधी कटौती की जाएगी।
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पात्रता के नए नियम: वित्त विभाग 15 दिनों के भीतर नए दिशानिर्देश जारी करेगा। जिसमें यह स्पष्ट किया जाएगा कि किस श्रेणी के अधिकारी सरकारी वाहन का उपयोग करने के पात्र हैं।
लंबी दूरी की यात्रा और कर्मचारियों के आवागमन के लिए क्या विकल्प तय किए गए हैं?
आधिकारिक ड्यूटी के दौरान होने वाले सफर के लिए सार्वजनिक और सामूहिक परिवहन को प्राथमिकता दी जाएगी:
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बस या ट्रेन का उपयोग: आधिकारिक ड्यूटी पर लंबी दूरी की यात्रा करने के लिए अधिकारियों और कर्मचारियों को बस या ट्रेन का उपयोग करने की सलाह दी गई है।
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निजी इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए नियम: वित्त विभाग आधिकारिक उद्देश्यों के लिए निजी स्वामित्व वाले इलेक्ट्रिक वाहनों के उपयोग के संबंध में भी दिशानिर्देश तैयार करेगा।
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कर्मचारियों के लिए ई-बसें: जिन क्षेत्रों में सरकारी कर्मचारियों की भारी संख्या रहती है। वहां से आने-जाने वाले कर्मचारियों के लिए सरकार इलेक्ट्रिक बसों या मिनी बसों की व्यवस्था करेगी।
ईंधन खपत में कमी लाने का कुल लक्ष्य क्या है और इसे कैसे लागू किया जाएगा?
मुख्यमंत्री ने इस नीति को पूरे राज्य में कड़ाई से लागू करने का आदेश दिया है:
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10% मासिक कटौती: सभी विभागों को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया है कि वे सरकारी वाहनों के लिए अपनी मासिक ईंधन खपत में कम से कम 10% की कमी लाएं।
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सभी स्तरों पर कड़ाई: मुख्यमंत्री ने राज्य सचिवालय से लेकर ब्लॉकों तक, जिसमें सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम (PSU), सरकारी संस्थान और विश्वविद्यालय शामिल हैं। सभी स्तरों पर नियमों का कड़ाई से अनुपालन सुनिश्चित करने का आदेश दिया है।
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मुख्यमंत्री की अपनी पहल: इससे पहले, प्रधानमंत्री की अपील के बाद मुख्यमंत्री माझी ने स्वयं अपने काफिले में वाहनों की संख्या कम कर दी थी और नागरिकों से भी ईंधन की खपत कम करने का आग्रह किया था। इसी को आगे बढ़ाते हुए अब उन्होंने मुख्य सचिव को सभी विभागों में इन नए उपायों को पूरी तरह लागू कराने की जिम्मेदारी सौंपी है।
ओडिशा सरकार का यह 8-सूत्रीय एजेंडा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ईंधन आपूर्ति की अनिश्चितता से निपटने और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक बेहद कड़ा और अनुकरणीय कदम है। 1 जून से लागू होने वाले ये नियम राज्य के प्रशासनिक ढांचे को अधिक डिजिटल, पर्यावरण-अनुकूल और किफायती बनाएंगे।