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E25: भारत सरकार ने ARAI को सौंपा जिम्मा, मौजूदा गाड़ियों पर 25% इथेनॉल वाले ईंधन के असर की होगी जांच

ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Amar Sharma Updated Fri, 22 May 2026 06:25 PM IST
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सार

E20 की शुरुआत के बाद, भारत ने ARAI को मौजूदा वाहनों पर 60,000 किलोमीटर से ज्यादा की दूरी तक E25 ईंधन का परीक्षण करने का निर्देश दिया है। ताकि इसकी लंबे समय तक चलने की क्षमता का मूल्यांकन किया जा सके और कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता को कम किया जा सके।

Govt Directs ARAI to Study Impact of E25 Fuel Blend on Existing Vehicles Amid Global Energy Crisis
E25 Ethanol Fuel - फोटो : Amar Ujala
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विस्तार

देशभर में E20 ईंधन (20 प्रतिशत इथेनॉल मिश्रण) को सफलतापूर्वक पेश करने के बाद, भारत सरकार ने अब ऑटोमोटिव रिसर्च एसोसिएशन ऑफ इंडिया (ARAI) को E25 ईंधन की व्यावहारिकता और इसके प्रभावों की जांच करने का काम सौंपा है। E25 ईंधन, जिसमें 25 प्रतिशत इथेनॉल और 75 प्रतिशत पेट्रोल का मिश्रण होता है, ऊर्जा सुरक्षा में सुधार करने के लिए भारत के इथेनॉल सम्मिश्रण कार्यक्रम का अगला चरण है।

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ARAI इस अध्ययन के दौरान गाड़ी के किन मापदंडों की जांच करेगा?

उद्योग की रिपोर्टों के अनुसार, ARAI का यह अध्ययन वास्तविक परिचालन स्थितियों के तहत E10- और E20-प्रमाणित वाहनों पर E25 ईंधन के प्रभावों की जांच करेगा। इस शोध के लिए निम्नलिखित मुख्य मापदंड तय किए गए हैं:

  • प्रदर्शन और माइलेज: ईंधन दक्षता (फ्यूल इकोनॉमी) और इंजन की अखंडता (इंजन इंटीग्रिटी) पर पड़ने वाले प्रभाव का आकलन।

  • सामग्री और उत्सर्जन: ईंधन के साथ इंजन की सामग्री की अनुकूलता और इससे होने वाले उत्सर्जन आउटपुट की जांच।

  • दीर्घकालिक खर्च: वाहन के दीर्घकालिक परिचालन खर्च का मूल्यांकन।

  • लंबी दूरी का ट्रायल: दीर्घकालिक स्थायित्व प्रभावों को समझने के लिए परीक्षण कारों को 60,000 से 70,000 किलोमीटर की व्यापक वास्तविक माइलेज संचय परीक्षणों से गुजरना होगा। प्राधिकरण यह जानना चाहता है कि क्या पारंपरिक वाहन बिना किसी मैकेनिकल गिरावट, पुर्जों के क्षरण या रखरखाव लागत में बढ़ोतरी के उच्च इथेनॉल सांद्रता पर सुरक्षित रूप से चल सकते हैं।

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ईंधन आयात को कम करनेके लिए सरकार की क्या रणनीति है?

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, एक अंतर-मंत्रालयी बैठक में भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) ने स्पष्ट किया कि इथेनॉल मिश्रण को 21 प्रतिशत (E21) तक बढ़ाने से मौजूदा वाहनों के लिए बड़ी तकनीकी चुनौतियां पैदा होने की संभावना नहीं है। हालांकि, नियामक अधिकारियों ने जोर देकर कहा कि सीधे E25 मिश्रण पर जाना एक महत्वपूर्ण तकनीकी प्रगति है जो दहन गतिकी (कंब्शन डायनैमिक्स) को बदल देती है। जिसके लिए व्यापक सत्यापन परीक्षणों की आवश्यकता है। सरकार इस कदम के जरिए निम्नलिखित लक्ष्यों को हासिल करना चाहती है:

  • वैश्विक कीमतों से राहत: पश्चिम एशिया में लंबे समय से जारी भू-राजनीतिक तनाव के कारण पिछले कुछ महीनों में घरेलू ईंधन की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी हुई है। इसके असर को कम करने के लिए सरकार घरेलू बायोफ्यूल को तेजी से बढ़ावा दे रही है।

  • आयात निर्भरता में कमी: वैश्विक कच्चे तेल की अस्थिर कीमतों के आर्थिक प्रभाव को कम करने और राष्ट्रीय आयात निर्भरता को बड़े पैमाने पर घटाने के लिए इथेनॉल सम्मिश्रण लक्ष्यों को तेज किया जा रहा है।

  • पर्यावरण को लाभ: इस कदम से ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन को कम करने में भी बड़ी मदद मिलेगी।

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भविष्य के लिए भारत का बायोफ्यूल रोडमैप क्या है?

उच्च इथेनॉल एकीकरण के लिए नियामक ढांचा देश में पहले से ही आगे बढ़ रहा है:

  • फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों की तैयारी: अप्रैल के आखिर में, एक मसौदा अधिसूचना में E85 और E100 ईंधनों के प्रावधानों को रेखांकित किया गया था। जो आगामी समर्पित फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों के लिए अभिप्रेत हैं।

  • नए मानक अधिसूचित: इसके अलावा, सरकार ने हाल ही में मौजूदा 20 प्रतिशत इथेनॉल मिश्रण से अधिक के बेसलाइन पेट्रोल मिश्रणों के लिए मानकों को अधिसूचित किया है। इसके तहत विशेष रूप से E22 (22 प्रतिशत इथेनॉल मिश्रण), E25 (25 प्रतिशत इथेनॉल मिश्रण), E27 (27 प्रतिशत इथेनॉल मिश्रण), और E30 (30 प्रतिशत इथेनॉल मिश्रण) वेरिएंट को वर्गीकृत किया गया है।


वैश्विक स्तर पर जारी ऊर्जा संकट और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के बीच भारत सरकार का E25 ईंधन की दिशा में कदम बढ़ाना बेहद रणनीतिक है। ARAI को सौंपा गया यह परीक्षण यह सुनिश्चित करेगा कि भविष्य में देश के मौजूदा वाहनों को बिना किसी नुकसान या अतिरिक्त जेब खर्च के अधिक पर्यावरण-अनुकूल और स्वदेशी ईंधन पर सुरक्षित रूप से चलाया जा सके। 

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