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E20 Petrol: क्या दूसरे देश भी सच में भारत की तरह इथेनॉल-मिश्रित पेट्रोल का इस्तेमाल करते हैं? जानें पूरी डिटेल

Tue, 07 Jul 2026 08:01 PM IST
Amar Sharma ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Amar Sharma Updated Tue, 07 Jul 2026 08:01 PM IST
सार

भारत में E20 (20 प्रतिशत एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल) को लेकर माइलेज, इंजन की विश्वसनीयता और प्रदर्शन पर बहस जारी है। ऐसे में यह सवाल भी उठ रहा है कि क्या दुनिया के दूसरे देशों में भी इस तरह का ईंधन बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किया जाता है।

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Ethanol Blending Around the World: How World Uses E20, E30, and Flex-Fuel Technology
Ethanol blending with Petrol - फोटो : Amar Ujala

विस्तार

भारत में E20 पेट्रोल (20% इथेनॉल-मिश्रित ईंधन) को लेकर छिड़ी बहस के बीच यह सवाल लगातार उठ रहा है कि क्या दुनिया के अन्य देशों ने भी इस तकनीक को अपनाया है? जब भी भारत में इथेनॉल कार्यक्रम की बात आती है, तो 'ब्राजील' का उदाहरण सबसे पहले दिया जाता है। केंद्रीय मंत्रियों से लेकर नीति निर्माताओं तक, सब ब्राजील की सफलता की दुहाई देते हैं। आइए समझते हैं कि आखिर ब्राजील का इतिहास क्या रहा है और बाकी दुनिया में इथेनॉल ब्लेंडिंग की क्या स्थिति है। 

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Ethanol Blending Around the World: How World Uses E20, E30, and Flex-Fuel Technology
Ethanol blending with Petrol - फोटो : AI

ब्राजील को लेकर भारतीय मंत्रियों का क्या दावा है और भारत में विवाद क्यों है?

केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी और परिवहन मंत्री नितिन गडकरी दोनों ने ही भारत के इथेनॉल कार्यक्रम की पैरवी करने के लिए ब्राजील का उदाहरण सामने रखा है:

  • नेताओं का दावा:
    हरदीप सिंह पुरी के अनुसार, ब्राजील वर्षों से E27 (27 प्रतिशत इथेनॉल) का इस्तेमाल कर रहा है और वहां इंजन खराब होने की कोई समस्या नहीं आई है। वहीं, नितिन गडकरी ने ब्राजील द्वारा बहुत पहले ही E100 (100 प्रतिशत इथेनॉल) लागू किए जाने का हवाला देते हुए भारत में भी इसका स्तर बढ़ाने की बात कही है।

  • भारत में राजनीतिक और उपभोक्ता विरोध:
    भारत ने अपने तय लक्ष्य (2030) से करीब 5 साल पहले ही 20% इथेनॉल ब्लेंडिंग (E20) का लक्ष्य हासिल कर लिया है और यह देश के पेट्रोल पंपों पर डिफॉल्ट रूप से मिलने लगा है। हालांकि, कई वाहन चालकों ने शिकायत की है कि इससे उनकी गाड़ियों का माइलेज कम हुआ है और इंजन के पार्ट्स में जंग लगने लगी है। कर्नाटक कांग्रेस के नेता बीके हरिप्रसाद और आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल जैसे विपक्षी नेताओं ने केंद्र सरकार पर आरोप लगाया है कि वह जनता की मर्जी के बिना उन पर यह "प्रयोग" थोप रही है। 

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Ethanol Blending Around the World: How World Uses E20, E30, and Flex-Fuel Technology
Ethanol blending with Petrol - फोटो : AI

ब्राजील ने इथेनॉल ब्लेंडिंग में महारत कैसे हासिल की?

ब्राजील ने पर्यावरण को बचाने के लिए नहीं, बल्कि अपनी मजबूरी और आर्थिक संकट के कारण इथेनॉल का रुख किया था। ब्राजील के इस पूरे सफर के मुख्य पड़ाव की चर्चा करते हैं:

  • 1973 का तेल संकट:
    योम किप्पुर युद्ध के दौरान अरब तेल उत्पादक देशों ने अमेरिका और उसके सहयोगियों पर प्रतिबंध लगा दिया था। इस तेल संकट ने ब्राजील की कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता की पोल खोल दी। जिसके बाद उसने इथेनॉल को विकल्प बनाया।

  • गन्ने की प्रचुरता:
    ब्राजील तब भी और आज भी दुनिया का सबसे बड़ा गन्ना उत्पादक देश है। वहां 1532 से गन्ना उगाया जा रहा है। 1927 में देश का पहला इथेनॉल प्लांट खुला और 1929 तक वहां लगभग 500 कारें इथेनॉल पर चल रही थीं। 1931 में 5 प्रतिशत मिश्रण अनिवार्य किया गया, जो द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान तेल की कमी के कारण 50 प्रतिशत तक पहुंच गई थी।

  • 'प्रो-आल्कोऑल' कार्यक्रम 1975:
    जब वैश्विक स्तर पर चीनी की कीमतें कम हुईं और ब्राजील के पास डिस्टिलेशन क्षमता खाली पड़ी थी, तब उसने 1975 में राष्ट्रीय अल्कोहल कार्यक्रम शुरू किया। 1979 में आई 'फिएट 147' पूरी तरह से शुद्ध इथेनॉल पर चलने वाली दुनिया की पहली बड़े पैमाने पर निर्मित कार बनी।

  • फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों की क्रांति:
    1990 के दशक में तेल की कीमतें गिरने पर इथेनॉल कारों की बिक्री घटी थी, लेकिन 2003 में ब्राजील ने फ्लेक्स-फ्यूल वाहन (FFV) पेश किए। ये गाड़ियां पेट्रोल, शुद्ध इथेनॉल या इनके किसी भी मिश्रण पर ऑटोमैटिक रूप से चल सकती हैं। आज ब्राजील में बिकने वाली नई कारों में 80 प्रतिशत से अधिक हिस्सेदारी FFV की है। वर्तमान में वहां E30 तक का मिश्रण आम है।

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Ethanol Blending Around the World: How World Uses E20, E30, and Flex-Fuel Technology
Ethanol blending with Petrol - फोटो : अमर उजाला प्रिंट

इथेनॉल मिश्रण को लेकर दुनिया के अन्य देश कहां खड़े हैं?

अंतरराष्ट्रीय बाजार में इथेनॉल और अन्य बायोफ्यूल्स (जैव ईंधन) को लेकर अलग-अलग देशों की स्थिति को नीचे दिए गए टेबल (तालिका) और बिंदुओं से समझा जा सकता है:

देश वर्तमान स्थिति / ईंधन का प्रकार मुख्य बातें
अमेरिका E10 (मानक), E15 की बढ़ती स्वीकार्यता दुनिया का सबसे बड़ा इथेनॉल उत्पादक। गर्मियों में स्मॉग (धुंध) के खतरे के कारण E15 की बिक्री पर कुछ पाबंदियां रहती हैं, लेकिन अक्सर छूट दे दी जाती है।
यूरोप और यूके E5 और E10 का समानांतर विकल्प पुरानी कारों की सुरक्षा के लिए E10 के साथ-साथ E5 को प्रीमियम ग्रेड के रूप में उपलब्ध रखा जाता है।
थाईलैंड E10, E20 और E85 अलग-अलग वाहनों के लिए कई विकल्प मौजूद हैं।
पैराग्वे E30 अनिवार्य उच्च स्तर का इथेनॉल मिश्रण कानूनन अनिवार्य है।
जापान E10 चरणबद्ध तरीके से E10 को लागू किया गया है।
कनाडा, वियतनाम, उरुग्वे E5 ये देश अभी कम मिश्रण (5%) पर ही टिके हुए हैं।
  • अन्य बायोफ्यूल्स का रुख: दुनिया के सबसे बड़े पाम ऑयल उत्पादक देश इंडोनेशिया ने डीजल में 50 प्रतिशत बायोफ्यूल मिलाने का लक्ष्य रखा है। हालांकि इससे पर्यावरण और खेती की जमीन को लेकर चिंताएं बढ़ रही हैं। वहीं, मलयेशिया भी पाम-आधारित डीजल मिश्रण को दोगुना कर 20 प्रतिशत करने की योजना बना रहा है।

Ethanol Blending Around the World: How World Uses E20, E30, and Flex-Fuel Technology
Ethanol blending with Petrol - फोटो : AI

इस पूरे मामले पर भारत सरकार और विशेषज्ञों का क्या रुख है?

केंद्र सरकार ने साफ किया है कि भारत में इथेनॉल मिश्रण का काम पूरी तरह से वैज्ञानिक और चरणबद्ध तरीके से किया गया है।

  • देश को हुए आर्थिक फायदे: सरकार के मुताबिक, 2014-15 से अब तक इथेनॉल ब्लेंडिंग की बदौलत विदेशी मुद्रा में 1.9 लाख करोड़ रुपये से अधिक की बचत हुई है, 310 लाख मीट्रिक टन कच्चे तेल को रिप्लेस किया गया है, और किसानों को 1.6 लाख करोड़ रुपये की अतिरिक्त आय हुई है।

  • ARAI की सफाई: ऑटोमोटिव रिसर्च एसोसिएशन ऑफ इंडिया (ARAI) का कहना है कि अधिकृत सर्विस सेंटरों से E20 के कारण इंजन खराब होने की कोई महत्वपूर्ण शिकायतें नहीं मिली हैं।

  • CEEW की चेतावनी: हालांकि, 'काउंसिल ऑन एनर्जी, एनवायरनमेंट एंड वॉटर' (CEEW) ने एक जरूरी चेतावनी दी है। संस्था का कहना है कि सरकार इथेनॉल इंफ्रास्ट्रक्चर पर ऐसे समय में भारी जोर दे रही है जब देश में इलेक्ट्रिक वाहनों का चलन तेजी से बढ़ रहा है। ऐसे में भविष्य में यह इथेनॉल क्षमता कम उपयोग रह सकती है। CEEW ने यह भी याद दिलाया कि फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों का माइलेज सामान्य पेट्रोल कारों से कम होता है और इथेनॉल कुछ धातुओं में जंग लगा सकता है।
     

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