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India-EU Trade Deal: भारत में सस्ती होंगी यूरोपीय कारें, आयात शुल्क में 70% तक भारी कटौती की तैयारी

ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: जागृति Updated Tue, 27 Jan 2026 11:36 AM IST
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सार

Import Duty Cut: प्रीमियम यूरोपीय कार या हाई-एंड बाइक के साथ हाईवे पर फर्राटा भरने का सपना देखने वाले लोगों के लिए खुशखबरी है। अमेरिकी टैरिफ और चीन की मंदी से जूझ रहे यूरोपीय कार निर्माताओं के लिए भारत एक नई उम्मीद बनकर उभरा है। अब तक भारी टैक्स की वजह से कुछ कारें आम पहुंच से बाहर थी, लेकिन फोक्सवैगन और रिनॉल्ट जैसे ब्रांड्स को भारत में अपना विस्तार करने का अब तक का सबसे बड़ा मौका मिलने वाला है। जानें कैसे..
 

European cars become cheaper India preparations are underway massive 70 reduction import duties
भारत-ईयू व्यापार समझौता - फोटो : adobe stock
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विस्तार
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रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, भारत और ईयू ट्रेड डील व्यापार पर हस्ताक्षर करने की तैयारी में हैं, जिससे यूरोपीय कारों पर भारी इंपोर्ट ड्यूटी में बड़ी कटौती होगी। ये भारत के अब तक के सबसे सुरक्षित ऑटोमोबाइल मार्केट में विदेशी कंपनियों को दी गई सबसे बड़ी रियायत मानी जा रही है। इस समझौते के बाद यूरोप से आने वाली कारों और प्रीमियम वाहनों पर आयात शुल्क 110 प्रतिशत से घटकर सीधे 40 प्रतिशत पर आ सकता है। इसका मतलब है कि ऑडी, मर्सिडीज और पोर्श जैसी गाड़ियां अब भारतीय सड़कों पर और भी ज्यादा संख्या में दिखाई देंगी।

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ऑटो एक्सपर्ट्स का मानना है कि इस कटौती का सबसे बड़ा असर लग्जरी कारों पर पड़ेगा। क्योंकि अब जो गाड़ियां सीधे विदेश में बनकर पूरी तरह से निर्मित इकाई के रुप में भारत आती हैं, अब उनकी कीमतों में कमी आ सकती है। इससे प्रीमियम कारों के शौकीनों के लिए निवेश करना आसान होगा।

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चुनौतियां अभी भी कम नहीं

भले ही टैक्स कम हो जाए, लेकिन भारतीय बाजार पर अभी भी मारुति सुजुकी, टाटा और महिंद्रा जैसे देसी व एशियाई दिग्गजों का कब्जा है। भारतीय ग्राहक आज भी माइलेज, कम मेंटेनेंस और मजबूती को तरजीह देते हैं। ऐसे में यूरोपीय ब्रांड्स को अपनी सर्विस और रनिंग कॉस्ट पर काफी काम करना पड़ सकता है।

लग्जरी कार ब्रांड्स को होगा सबसे ज्यादा फायदा

  • ऑटो इंडस्ट्री एक्सपर्ट्स के अनुसार ऑडी, पोर्श, मर्सिडीज-बेंज और बीएमडब्ल्यू जैसे ब्रांड्स को सबसे ज्यादा फायदा होगा। प्रीमियम कार सेगमेंट में कीमतों में सीधी राहत मिलेगी। मिड-रेंज और मास-मार्केट सेगमेंट में असर सीमित रहेगा। 
  • अमेरिका में बढ़ते टैरिफ और चीन में धीमी ग्रोथ को देखते हुए भारत के 2030 तक कार बाजार के 6 मिलियन यूनिट तक पहुंचने का अनुमान लगाया जा रहा है। इन वजहों से यूरोपीय कंपनियां भारत को लॉन्ग-टर्म ग्रोथ मार्केट के तौर पर देख रही हैं।
  • ऐसे में विश्लेषकों का मानना है कि शॉर्ट टर्म में इसका असर सीमित रहेगा, लेकिन लॉन्ग टर्म में यूरोपीय कंपनियां भारत में लोकल मैन्युफैक्चरिंग बढ़ा सकती हैं। इससे कीमतें और प्रतिस्पर्धा दोनों बेहतर होंगी।

इनका भी फायदा

इस समझौते से न केवल कारें, बल्कि भविष्य में प्रीमियम यूरोपीय बाइक्स (जैसे बीएमडब्ल्यू मोटरराड या डुकाटी के कुछ मॉडल) के लिए भी रास्ते आसान हो सकते हैं। अगर आप पहाड़ों या हाइवे पर लॉन्ग ट्रिप के शौकीन हैं, तो आने वाले वर्षों में ग्लोबल स्टैंडर्ड की मशीनें आपकी पहुंच में होंगी।

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