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Luxury Cars: आखिर इतनी महंगी क्यों होती हैं लग्जरी कारें? जानिए आप असल में किस चीज की कीमत चुकाते हैं?

ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: सुयश पांडेय Updated Tue, 27 Jan 2026 10:31 AM IST
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सार

लग्जरी कारों की ऊंची कीमत सिर्फ चमड़े की सीटों या बड़े ब्रांड लोगो की वजह से नहीं होती। इन कारों में बेहतरीन इंजीनियरिंग, हाथ से की गई कारीगरी, प्रीमियम मटीरियल्स, भविष्य की टेक्नोलॉजी और सीमित उत्पादन का अनोखा मेल होता है। आरामदायक सवारी, शांत केबिन, एडवांस्ड सस्पेंशन और लंबे समय तक टिकने वाला इंटीरियर इन्हें आम कारों से अलग बनाता है।

Why Luxury Cars Cost So Much: Engineering, Craftsmanship, Technology and the Price of Prestige
Rolls Royce Spectre - फोटो : X
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विस्तार
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जब आप किसी शोरूम में प्रीमियम सेडान या फ्लैगशिप एसयूवी देखने जाते हैं, तो उनकी कीमत देखकर झटका लगना स्वाभाविक है। इनकी कीमतें इतनी ज्यादा होती हैं कि उतने में कई मिड-रेंज कारें या कुछ शहरों में एक छोटा फ्लैट भी खरीदा जा सकता है। लगभग हर किसी के मन में यही सवाल होता है कि ये लग्जरी कारें इतनी महंगी क्यों हैं और उससे भी महत्वपूर्ण बात, आप वास्तव में किस चीज के पैसे दे रहे हैं? इसका जवाब सिर्फ चमड़े की सीटों या चमकदार ब्रांड लोगो तक सीमित नहीं है। एक लग्जरी कार इंजीनियरिंग, शिल्प कौशल (क्राफ्टमैनशिप), टेक्नोलॉजी, ब्रांड वैल्यू और लंबे समय तक चलने वाले अनुभव का एक बेहतरीन मिश्रण होती है। इस लेख में विस्तार से इन सब के बारे में जानेंगे।

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1. इंजीनियरिंग जो 'परफेक्शन' को प्राथमिकता देती है

आम कारें इस हिसाब से बनाई जाती हैं कि वे सस्ती हों, सुरक्षित हों और कम ईंधन में चलें। लेकिन लग्जरी कारों का लक्ष्य रिफाइनमेंट होता है। इसका मतलब है सवारी के आराम, स्टीयरिंग के एहसास, केबिन की शांति और पावर डिलीवरी पर बारीकी से काम करना। महंगी गाड़ियों में अक्सर 'एडेप्टिव एयर सस्पेंशन' या ऐसे डैम्पर्स होते हैं जो आगे की सड़क को स्कैन करके मिलीसेकंड में खुद को एडजस्ट कर लेते हैं। ऐसी गाड़ियों में इंजनों को सिर्फ तेज चलने के लिए नहीं, बल्कि स्मूथनेस और बेहतरीन आवाज के लिए ट्यून किया जाता है। इस स्तर की क्वालिटी हासिल करने में समय और पैसा लगता है। कंपनियां हवा के शोर और थर्मल कम्फर्ट के लिए हजारों घंटे टेस्टिंग करती हैं।

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2. ऐसे मटीरियल्स जो समय के साथ बेहतर दिखें

लग्जरी कार के अंदर बैठते ही आपको फर्क महसूस होता है। यहां प्लास्टिक की जगह असली लकड़ी और भारी धातु के स्विच होते हैं। अपहोल्स्ट्री (सीट कवर) के लिए बेहतरीन क्वालिटी का 'फुल-ग्रेन लेदर' चुना जाता है, जो वर्षों तक खराब नहीं होता। लकड़ी के पैनलों को ऐसे लगाया जाता है कि उनके रेशे डैशबोर्ड पर एक समान दिखें। लेदर की सिलाई मशीनों के बजाय कुशल कारीगरों के जरिए हाथों से की जाती है। यही कारण है कि एक दशक पुरानी लग्जरी कार का इंटीरियर अक्सर बजट कार की तुलना में ज्यादा नया और बेहतर दिखता है।

3. भविष्य की टेक्नोलॉजी जो आज मिलती है

लग्जरी कारें अक्सर उन फीचर्स को पेश करती हैं जो 5-10 साल बाद आम कारों में आते हैं। बड़ी कर्व्ड डिस्प्ले, नाइट-विजन कैमरे, एडेप्टिव हेडलाइट्स, मसाज देने वाली सीटें और ऑगमेंटेड-रियलिटी नेविगेशन अक्सर सबसे पहले प्रीमियम सेगमेंट में ही दिखाई देते हैं। इन सिस्टम्स की रिसर्च और डेवलपमेंट बेहद महंगी होती है। कुछ मामलों में, खरीदार 'अर्ली अडॉप्टर' (नई तकनीक को सबसे पहले अपनाने वाला) होने की कीमत चुका रहे होते हैं।

4. कस्टमाइजेशन और सीमित उत्पादन

ऑटो इंडस्ट्री में जब लाखों कारें एक जैसी बनती हैं तो उनकी लागत कम हो जाती है। लेकिन लग्जरी ब्रांड्स कम मात्रा में उत्पादन करते हैं। ग्राहक अपनी पसंद का खास पेंट, पर्सनलाइज्ड इंटीरियर या हाथ से बने विवरण मांगते हैं। हर बदलाव उत्पादन प्रक्रिया को जटिल और महंगा बनाता है। जब दुनिया भर में केवल कुछ हज़ार यूनिट्स ही बनाई जाती हैं, तो डेवलपमेंट का पूरा खर्च उन्हीं कुछ कारों पर बंट जाता है, जिससे हर कार की कीमत बढ़ जाती है।

5. ब्रांड की विरासत और इमेज

ब्रांडिंग की ताकत को नकारा नहीं जा सकता। मर्सिडीज-बेंज, बीएमडब्ल्यू, लेक्सस, बेंटले या रोल्स-रॉयस जैसे नामों के साथ दशकों का इतिहास जुड़ा है। खरीदार केवल एक गाड़ी नहीं खरीद रहे हैं, बल्कि एक कहानी और स्टेटस का हिस्सा बन रहे हैं। हालांकि आलोचक इसे 'सिर्फ बैज के लिए पैसे देना' कहते हैं, लेकिन ब्रांड की धारणा रीसेल वैल्यू और समाज में आपकी छवि को प्रभावित करती है।

6. कार से परे 'ओनरशिप एक्सपीरियंस'

लग्जरी कीमत में अक्सर एक अलग तरह का अनुभव शामिल होता है। शोरूम किसी फाइव-स्टार लाउंज की तरह होते हैं। सर्विस के लिए गाड़ी को घर से पिक-अप और ड्रॉप करने की सुविधा मिलती है। वारंटी और मेंटेनेंस पैकेज ज्यादा व्यापक होते हैं। डीलर विशेष तकनीशियनों और सुविधाओं में भारी निवेश करते हैं, और वह लागत अंततः वाहन की कीमत में जुड़ जाती है।

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