खेल मंत्री का बड़ा बयान: 2027 में भारत लौटेगी फॉर्मूला 1 रेस, लेकिन F1 मैनेजमेंट ने क्यों कहा 'ना'?
Formula 1 India Return 2027: भारत में फॉर्मूला 1 (F1) रेस की वापसी को लेकर चर्चाएं तेज हैं। खेल मंत्री मनसुख मंडाविया ने 2027 तक F1 लौटने का दावा किया है, लेकिन F1 मैनेजमेंट ने फिलहाल इसे मुश्किल बताया है।
विस्तार
भारत में फॉर्मूला 1 (F1) रेस की वापसी को लेकर एक बार फिर से सुगबुगाहट तेज हो गई है। हाल ही में भारत के खेल मंत्री मनसुख मंडाविया ने एक बड़ा बयान देते हुए कहा था कि 2027 तक भारत में F1 रेस की वापसी हो सकती है। लेकिन मोटरस्पोर्ट्स के फैंस के मन में ये सवाल आ रहा है कि क्या सच में इतनी जल्दी ऐसा कुछ होने वाला है?
खेल मंत्री का दावा: 2027 में भारत में F1
मीडिया से बात करते हुए खेल मंत्री मनसुख मंडाविया ने कहा था, "2027 में भारत में एक F1 रेस होगी।" उन्होंने यह भी बताया कि कम से कम तीन बड़ी कंपनियों ने ग्रेटर नोएडा के बुद्ध इंटरनेशनल सर्किट (BIC) के संचालन में अपनी दिलचस्पी दिखाई है।
F1 का मंत्री के दावे पर बयान?
F1 के आधिकारिक बयान में साफ किया गया है, "भारत में F1 के शानदार और जुनूनी फैंस हैं। यह हमारे लिए एक बेहद महत्वपूर्ण बाजार है। लेकिन, हम 2027 में वहां रेस नहीं करने जा रहे हैं। रेस का आयोजन करना एक जटिल प्रक्रिया है और इसमें समय लगता है।"
भारत में पहले क्यों बंद हुई थी F1 रेस?
भारत के बुद्ध इंटरनेशनल सर्किट (BIC) में वर्ष 2011 से 2013 के बीच 'इंडियन ग्रां प्री' का सफल आयोजन किया गया था। यहां इस ट्रैक और यहां की सुविधाओं ने दुनिया भर के F1 ड्राइवरों और टीमों से खूब वाहवाही बटोरी थी। हालांकि, इस शानदार शुरुआत के बावजूद उत्तर प्रदेश सरकार की तत्कालीन टैक्स पॉलिसी रेस के बंद होने का सबसे बड़ा कारण बनी। दरअसल, उस समय सरकार ने फॉर्मूला 1 को खेल के बजाय मनोरंजन की श्रेणी में रखा था। इसकी वजह से आयोजकों पर टैक्स का भारी बोझ बढ़ गया और अंततः यह रेस आर्थिक रूप से घाटे का सौदा साबित होने लगी।
वापसी के लिए सरकार अब क्या कर रही है?
F1 की वापसी को लेकर खेल मंत्री ने स्पष्ट किया है कि सरकार अब भारत को अंतरराष्ट्रीय रेसिंग के लिए एक बेहतर और अनुकूल डेस्टिनेशन बनाने की दिशा में गंभीरता से काम कर रही है। इसके लिए सबसे बड़ा कदम टैक्स व्यवस्था में सुधार की कोशिश है। सरकार योजना बना रही है कि अगर 'एंटरटेनमेंट टैक्स' को पूरी तरह खत्म करना मुमकिन न हो तो आयोजकों को विशेष छूट या 'रीइंबर्समेंट' दी जाए ताकि उन पर आर्थिक बोझ न पड़े। साथ ही, इसे F1 के लिए और भी आकर्षक बनाने के उद्देश्य से विभिन्न सरकारी मंत्रालयों के बीच भी गहन चर्चा और बैठकों का दौर जारी है।
मोटरस्पोर्ट्स फैंस के लिए कुछ अच्छी खबरें
भले ही F1 की तुरंत वापसी की राह में कुछ अड़चनें हों, लेकिन भारतीय मोटरस्पोर्ट्स प्रेमियों के लिए उत्साहजनक खबरों की कमी नहीं है। इस दिशा में सबसे बड़ी हलचल अदाणी ग्रुप को लेकर है, जो बुद्ध इंटरनेशनल सर्किट (BIC) के अधिग्रहण की दौड़ में सबसे आगे है और उसने 'इंडियन ग्रां प्री' को दोबारा जीवित करने की अपनी सक्रिय योजना की पुष्टि भी कर दी है।
इसके साथ ही, उत्तर प्रदेश सरकार ने BIC में MotoGP रेस की वापसी के लिए AVW ग्लोबल के साथ एक समझौता किया है, जो बाइक रेसिंग के फैंस के लिए बड़ी जीत है। इतना ही नहीं, 'एशिया रोड रेसिंग चैंपियनशिप' (ARRC) को भी इसी साल भारत लाने की तैयारियां जोरों पर हैं, जो यह दर्शाता है कि भारत में अंतरराष्ट्रीय रेसिंग का भविष्य एक बार फिर रफ्तार पकड़ रहा है।
F1 के रास्ते की असली चुनौतियां क्या हैं?
हालांकि संभावनाएं तलाशी जा रही हैं, लेकिन हकीकत में भारत के लिए F1 की राह इतनी आसान नहीं है और इसके सामने कुछ बड़ी व्यावहारिक चुनौतियां खड़ी हैं। सबसे बड़ी रुकावट इसकी भारी-भरकम होस्टिंग फीस है। वैश्विक स्तर पर F1 की बढ़ती लोकप्रियता के कारण अब एक रेस आयोजित करने की फीस लगभग $70 मिलियन से $150 मिलियन (करीब 580 से 1200 करोड़ रुपये) तक जा पहुंची है।
इसके अलावा, F1 के सालाना कैलेंडर में रेसों की संख्या सीमित होती है और दुनिया के कई नए देश इस रेस की मेजबानी के लिए कतार में हैं। इससे भारत के लिए एक नया स्लॉट हासिल करना एक बड़ी और कड़ी प्रतिस्पर्धा बन गया है।
