Ferrari Luce: 382 करोड़ में बिकी फेरारी की पहली इलेक्ट्रिक कार, क्या है इसमें खास, किसने खर्च की इतनी रकम?
फेरारी की पहली ऑल-इलेक्ट्रिक कार 'फेरारी ल्यूस चैसी 0' नीलामी में 382 करोड़ रुपये में बिकी। जानें इस 1,000 हॉर्सपावर वाली कार के फीचर्स और इसे खरीदने वाले अमेरिकी अरबपति के बारे में।
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फेरारी की इस पहली इलेक्ट्रिक कार की नीलामी करने वाली संस्था सोदेबी ने बताया कि जुटाई गई राशि को फेरारी फाउंडेशन के शैक्षिक कार्यक्रम में लगाया जाएगा। नीलामी करने वालों ने यह खुलासा नहीं किया कि फेरारी के इस मॉडल का खरीदार कौन है। हालांकि, कुछ अन्य रिपोर्ट्स में रजिस्ट्री के हवाले से कार के खरीदारों के नाम कथित तौर पर सामने आए हैं।
आइये जानते हैं कि यह कार इतनी खास क्यों है और इसे खरीदने वाली शख्सियत के बारे में क्या जानकारी सामने आई है?
फेरारी की सबसे महंगी बिकी कार की खासियत क्या है?
नीलामी में बिकी फेरारी की अब तक की सबसे महंगी नई कार का मॉडल 'फेरारी ल्यूस चैसी 0' है, जो रिकॉर्ड कीमत में बिकी है। यह पूरी तरह से कस्टमाइज्ड इलेक्ट्रिक मॉडल है। इटैलियन मूल की कंपनी फेरारी ने इसे 'फेरारी लुचे' नाम दिया है। हालांकि, अंग्रेजी में इसे ल्यूस बुलाया जा रहा है।1. कार की पावर और डिजाइन
- यह फेरारी के इतिहास की पहली ऑल-इलेक्ट्रिक यानी पूरी तरह बैटरी से चलने वाली कार है, जो इस लग्जरी ब्रांड के इलेक्ट्रिक वाहन बाजार में प्रवेश का प्रतीक है। पूरी तरह से इलेक्ट्रिक होने के बावजूद, यह कार 1,000 हॉर्सपावर से ज्यादा की ताकत देती है।
- चैसी 0 (Chassis 0) यानी फेरारी की इलेक्ट्रिक मॉडल श्रृंखला (ल्यूस कार्यक्रम) की यह पहली उत्पादन चैसी है, जिस पर इसकी अलग पहचान के लिए एक खास प्लेट लगाई गई है। साथ ही इसमें फेरारी का सिग्नेचर प्रैंसिंग हॉर्स लोगो कार के एक खास ऑप्टिकल-व्हाइट बैकग्राउंड पर लगाया गया है।
- इस कार का डिजाइन एपल के पूर्व मुख्य डिजाइन प्रमुख (चीफ डिजाइन ऑफिसर) और आईफोन (Iphone) के रचनाकार सर जॉनी आइव के प्रसिद्ध स्टूडियो लवफ्रॉम के साथ साझेदारी में विकसित किया गया है।
इस कार को प्रकाश यानी लाइट की अवधारणा पर कस्टमाइज किया गया है। इसकी बाहरी बॉडी पर विशेष रूप से तैयार किया गया- मद्रेपर्ला सेमी-ग्लॉस पेंट लगाया गया है, जो प्रकाश के कोण और तीव्रता के मुताबिक हरे से बैंगनी रंग में बदलता है। इसकी पेंटिंग प्रक्रिया इतनी जटिल है कि कोई भी दो कारें बिल्कुल एक जैसी नहीं दिख सकतीं।
3. प्रीमियम फील के लिए इंटीरियम में भी इंतजाम
इसके केबिन में बेहतरीन स्विस चमड़े से बना पेर्ला ले मैन्स मेटैलिक लेदर इस्तेमाल किया गया है। इंटीरियर के सहायक हिस्सों में पारंपरिक काले रंग की जगह ग्रिगियो कोरवारा का उपयोग किया गया है, जो इस मॉडल में पहली बार देखने को मिला है।
कार में खास तौर पर डिजाइन किए गए व्हील्स और कस्टमाइज्ड ब्रेक कैलीपर्स दिए गए हैं। यह चार दरवाजों और पांच सीटों वाला एक अनोखा इलेक्ट्रिक ग्रैंड टूरर है। इस कार की आखिरी असेंबली मारोनेलो, इटली में पूरी होने के बाद 2027 की पहली तिमाही में इसकी डिलीवरी किया जाना तय हुआ है।
4. कितनी ताकतवर है यह कार
फेरारी ल्यूस के दिल में एक अत्याधुनिक बोर्न-इलेक्ट्रिक स्केटबोर्ड प्लेटफॉर्म है, जो इसे प्रदर्शन के मामले में एक नई ऊंचाई पर ले जाता है। इसमें हर पहिए पर एक स्वतंत्र इलेक्ट्रिक मोटर लगी है, यानी कुल चार मोटर्स मिलकर इसे जबरदस्त ताकत देती हैं। यह पावरहाउस कुल 1050hp की पावर और 990Nm का टॉर्क जेनरेट करने में सक्षम है, जो इसे एक असली स्पीड मशीन बनाता है। मजेदार बात यह है कि यह कार एक फुल चार्ज में करीब 550 किलोमीटर तक की दूरी तय कर लेती है।
ड्राइविंग के अनुभव को बेहतर बनाने के लिए इसमें तीन मुख्य मोड दिए गए हैं। रोजमर्रा की लंबी दूरी के लिए रेंज मोड (430hp), आरामदेह सफर के लिए टूर मोड (617hp) और जब आपको पूरी ताकत का अनुभव करना हो तो परफॉर्मेंस मोड (986hp)। हालांकि, जब आप इसके लॉन्च कंट्रोल को एक्टिवेट करते हैं तो यह कार अपनी पूरी 1050hp की ताकत के साथ सड़क पर उतरती है। इसका नतीजा यह है कि लूचे केवल 2.5 सेकंड में 0 से 100 किमी/घंटा की रफ्तार पकड़ लेती है और इसकी टॉप-स्पीड 310 किमी/घंटा तक जाती है।
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इस कार के खरीदार को लेकर क्या जानकारी आई?
इस रिकॉर्ड-ब्रेकिंग फेरारी कार के खरीदार को लेकर भले ही नीलामी कंपनी ने खुलासा नहीं किया, लेकिन कुछ रिपोर्ट्स में रजिस्ट्री के हवाले से दावा किया गया है कि फेरारी के इस मॉडल के लिए 382 करोड़ रुपये के बराबर खर्च करने वाले हर्बर्ट 'डॉ. हर्बी' वर्थहाइम हैं। वे अपनी एक अनोखी पहचान के लिए जाने जाते हैं। हर्बर्ट हमेशा चमकीले लाल रंग का फेडोरा हैट पहनते हैं। वह एक खुद के दम पर बने अमेरिकी अरबपति, नेत्र रोग विशेषज्ञ (ऑप्टोमेट्रिस्ट), आविष्कारक और जाने-माने निवेशक हैं। उनकी कुल संपत्ति लगभग पांच अरब डॉलर आंकी गई है।कठिन परिस्थितियों में बीता बचपन
उनका जन्म फिलाडेल्फिया में उस दौर में हुआ था, जब अमेरिका ग्रेट डिप्रेशन यानी महामंदी के समय से गुजर रहा था। किशोर अवस्था में ही वे घर से भाग गए थे, जिसके बाद उन्होंने फ्लोरिडा में संतरे तोड़ने और एवरग्लेड्स में सेमिनोल आदिवासियों के साथ रह कर छोटे-मोटे काम किए। 16 वर्ष की उम्र में जब उन पर स्कूल से अनुपस्थित रहने के आरोप लगे, तो जज ने उन्हें सुधार गृह या सैन्य सेवा में से एक चुनने का विकल्प दिया और उन्होंने 17 साल की उम्र में अमेरिकी नौसेना में सेवा देना चुना।
नौसेना में सेवा देने के बाद उन्होंने भौतिकी और रसायन शास्त्र की पढ़ाई की और केप केनैवरल में नासा के एक इंजीनियर के रूप में काम किया। बाद में उन्होंने स्कॉलरशिप पर ऑप्टोमेट्री की पढ़ाई पूरी की। 1969 में उन्होंने प्लास्टिक लेंस के लिए एक खास आईग्लास टिंट का आविष्कार किया, जो सूर्य की हानिकारक यूवी किरणों को छानता है और मोतियाबिंद से बचाने में मदद करता है। 1970 में उन्होंने ब्रेन पावर नाम की कंपनी की स्थापना की, जिसके पास आज ऑप्टिकल तकनीक में 100 से अधिक पेटेंट हैं।
धैर्य और अनुशासित निवेशक की भी पहचान
वर्थहाइम की संपत्ति किसी एक आईपीओ से रातों-रात नहीं बनी, बल्कि दशकों के अनुशासित निवेश की देन है। उन्होंने एपल, माइक्रोसॉफ्ट, गूगल, जनरल इलेक्ट्रिक्स (जीई) और बैंक ऑफ अमेरिका जैसी दिग्गज कंपनियों के शुरुआती दौर में ही शेयर खरीदकर होल्ड किए थे। उनका सबसे बड़ा निवेश एयरोस्पेस पार्ट्स बनाने वाली कंपनी हाइको में रहा है; 1992 में किया गया उनका 50 लाख डॉलर का निवेश आज 80 करोड़ डॉलर का हो चुका है, जिससे वे कंपनी के सबसे बड़े व्यक्तिगत शेयरधारक हैं।
उन्होंने बिल गेट्स और वॉरेन बफेट के प्रसिद्ध गिविंग प्लेज पर हस्ताक्षर किए हैं, जिसके तहत वे अपनी कम से कम आधी संपत्ति मुख्य रूप से शिक्षा के क्षेत्र में दान करने का संकल्प ले चुके हैं। वे अकेले फ्लोरिडा के सरकारी विश्वविद्यालयों को ही 10 करोड़ डॉलर (करीब 956 करोड़ रुपये) से ज्यादा दान कर चुके हैं।
...और फेरारी के पुराने शौकीन
वर्थहाइम के पास महंगी फेरारी कारों का शानदार कलेक्शन है। पिछले साल ही उन्होंने मॉन्टेरी कार वीक की नीलामी में कस्टमाइज्ड फेरारी डेटोना एसपी3 मॉडल को 2.60 करोड़ डॉलर (करीब 248 करोड़ रुपये) में खरीदा था। यह उस समय नीलामी में बिकी सबसे महंगी नई कार का नया रिकॉर्ड था। इस बार उन्होंने अपनी ही उस पुरानी बोली को 54% से पीछे छोड़ते हुए ल्यूस ईवी को 4 करोड़ डॉलर (करीब 382 करोड़ रुपये) में अपने नाम किया।