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Aggregator Rules: दिल्ली-NCR में कैब और डिलीवरी के लिए पेट्रोल-डीजल गाड़ियां बैन, हरियाणा कैबिनेट ने दी मंजूरी

ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Amar Sharma Updated Mon, 18 May 2026 09:56 PM IST
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सार

हरियाणा कैबिनेट ने सोमवार को एग्रीगेटर लाइसेंस देने के नियमों को मंजूरी दे दी। जिसके तहत एनसीआर इलाकों में एग्रीगेटर, डिलीवरी सर्विस देने वाली कंपनियों और ई-कॉमर्स कंपनियों के बेड़े में शामिल होने वाले सभी वाहन अनिवार्य रूप से सीएनजी, इलेक्ट्रिक वाहन, बैटरी से चलने वाले वाहन या किसी अन्य स्वच्छ ईंधन पर आधारित होंगे।

Haryana Cabinet Approves New Aggregator Rules: Petrol and Diesel Cabs Banned in NCR
Taxi Service - फोटो : Freepik
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विस्तार

दिल्ली-एनसीआर में बढ़ते प्रदूषण पर लगाम लगाने और स्वच्छ आवागमन को बढ़ावा देने के लिए हरियाणा सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी की अध्यक्षता में सोमवार को हुई कैबिनेट बैठक में कैब एग्रीगेटर्स, डिलीवरी सर्विस प्रोवाइडर्स और ई-कॉमर्स कंपनियों के लिए नए नियमों को मंजूरी दी गई है। जिसके तहत अब एनसीआर क्षेत्रों में पेट्रोल और डीजल वाहनों के इस्तेमाल पर पूरी तरह रोक लगा दी गई है।
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राज्य सरकार द्वारा जारी आधिकारिक बयान के अनुसार, यह निर्णय स्वच्छ गतिशीलता को बढ़ावा देने, वाहनों से होने वाले प्रदूषण को रोकने और राज्य के एनसीआर जिलों में हवा की गुणवत्ता में सुधार करने के उद्देश्य से लिया गया है। इसके तहत हरियाणा मोटर वाहन नियम, 1993 में संशोधन को मंजूरी दी गई है।

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नए नियमों के तहत वाहनों को लेकर क्या शर्तें तय की गई हैं?

कैबिनेट द्वारा स्वीकृत नियमों के तहत कैब एग्रीगेटर्स और डिलीवरी कंपनियों के वाहनों के लिए कड़े मानक तय किए गए हैं:

  • साफ ईंधन अनिवार्य: संशोधित नियमों के अनुसार, एनसीआर क्षेत्रों में संचालित होने वाले कैब एग्रीगेटर्स, डिलीवरी सेवा प्रदाताओं और ई-कॉमर्स संस्थाओं के बेड़े में शामिल होने वाले सभी वाहन अनिवार्य रूप से सीएनजी (CNG), इलेक्ट्रिक वाहन (EV), बैटरी संचालित वाहन (BOV) या किसी अन्य स्वच्छ ईंधन पर आधारित होने चाहिए।

  • लागू होने की तिथि: यह नियम 1 जनवरी, 2026 से प्रभावी माना जाएगा। इस तारीख के बाद से बेड़े में जोड़े जाने वाले सभी वाहनों के लिए यह नियम अनिवार्य होगा।

  • थ्री-व्हीलर ऑटो के लिए नियम: राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) में मौजूदा बेड़ों में अतिरिक्त रूप से केवल सीएनजी या इलेक्ट्रिक 3-व्हीलर ऑटो-रिक्शा को ही शामिल करने की अनुमति दी जाएगी।

  • दिशा-निर्देशों का पालन: यह निर्णय केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय द्वारा जारी दिशानिर्देशों और वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) (सीएक्यूएम) के निर्देशों के अनुरूप लिया गया है। सीएक्यूएम ने पिछले साल जून में निर्देश दिया था कि 1 जनवरी, 2026 से दिल्ली-एनसीआर में काम करने वाली कैब कंपनियों और डिलीवरी फर्मों को अपने बेड़े में नए पेट्रोल या डीजल वाहन जोड़ने की अनुमति नहीं होगी।

नियामक ढांचे में क्या नए प्रावधान शामिल किए गए हैं?

कैबिनेट ने राज्य में ऐप-आधारित यात्री एग्रीगेटर्स और डिलीवरी सेवा प्रदाताओं के लिए एक व्यापक नियामक ढांचा स्थापित करने के लिए हरियाणा मोटर वाहन नियम, 1993 के नियम 86A के प्रतिस्थापन को मंजूरी दी है। नए प्रावधानों में निम्नलिखित बातें शामिल हैं:

  • एग्रीगेटर्स और डिलीवरी सेवा प्रदाताओं के लिए अनिवार्य लाइसेंसिंग।

  • ड्राइवरों और वाहनों को प्लेटफॉर्म पर शामिल करने के मानदंड।

  • यात्री सुरक्षा उपाय और शिकायत निवारण तंत्र।

  • ड्राइवरों के लिए इंडक्शन और रिफ्रेशर ट्रेनिंग प्रोग्राम।

  • ऐप के लिए साइबर सुरक्षा अनुपालन और किरायों का विनियमन।

  • ड्राइवरों का कल्याण, किराया साझा करना, सुरक्षा मानक और 'दिव्यांगजन'-अनुकूल वाहनों को शामिल करना।

  • इलेक्ट्रिक मोबिलिटी की ओर धीरे-धीरे बदलाव।

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ड्राइवर और यात्रियों के लिए बीमा व सुरक्षा से जुड़े क्या नियम हैं?

मंजूर नियमों के अनुसार, कंपनियों को ड्राइवरों और यात्रियों की सुरक्षा के लिए बीमा और आवश्यक सुरक्षा उपकरण सुनिश्चित करने होंगे:

  • बीमा कवरेज की शर्तें: एग्रीगेटर्स और डिलीवरी सेवा प्रदाताओं को यात्रियों के लिए न्यूनतम 5 लाख रुपये का बीमा कवरेज, ड्राइवरों के लिए कम से कम 5 लाख रुपये का स्वास्थ्य बीमा और ऑनबोर्ड ड्राइवरों के लिए न्यूनतम 10 लाख रुपये का टर्म इंश्योरेंस सुनिश्चित करना आवश्यक होगा।

  • अनिवार्य सुरक्षा उपकरण: संबंधित वाहनों में वाहन लोकेशन ट्रैकिंग उपकरण, पैनिक बटन, फर्स्ट-एड किट और अग्निशामक यंत्र लगाना अनिवार्य कर दिया गया है।

  • कंट्रोल रूम की स्थापना: यात्रियों की सहायता और शिकायत निवारण के लिए एग्रीगेटर्स को 24x7 काम करने वाले कंट्रोल रूम और कॉल सेंटर स्थापित करने होंगे।

पारदर्शिता और पंजीकरण की प्रक्रिया कैसे काम करेगी?

जवाबदेही और पारदर्शिता को मजबूत करने के लिए डिजिटल तकनीक का सहारा लिया जाएगा:

  • डिजिटल प्रमाणीकरण: वाहनों और ड्राइवरों के विवरण का डिजिटल प्रमाणीकरण 'वाहन' (VAHAN) और 'सारथी' (SARATHI) पोर्टलों के जरिए किया जाएगा। एग्रीगेटर्स को अपने ड्राइवरों और वाहनों के विस्तृत डिजिटल रिकॉर्ड बनाए रखने होंगे।

  • पंजीकरण के लिए समर्पित पोर्टल: कैबिनेट को सूचित किया गया कि एग्रीगेटर्स, डिलीवरी सेवा प्रदाताओं और ई-कॉमर्स संस्थाओं के लिए पंजीकरण और लाइसेंसिंग प्रक्रिया एक निर्दिष्ट पोर्टल cleanmobility.haryanatransport.gov.in के जरिए की जाएगी।

इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने के लिए सरकार की क्या अन्य योजनाएं हैं?

कैबिनेट बैठक से पहले हरियाणा के परिवहन मंत्री अनिल विज ने मीडिया कर्मियों से बातचीत में राज्य में ईवी को बढ़ावा देने से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां साझा कीं:

  • 100% टैक्स छूट का प्रस्ताव: परिवहन मंत्री अनिल विज ने बताया कि लोगों को इलेक्ट्रिक वाहन खरीदने के लिए प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से चंडीगढ़ और दिल्ली की तर्ज पर हरियाणा में भी इलेक्ट्रिक वाहनों पर 100 प्रतिशत टैक्स छूट प्रदान करने का एक प्रस्ताव सरकार को भेजा गया है। वर्तमान में, हरियाणा ईवी पंजीकरण शुल्क पर 20 प्रतिशत की छूट प्रदान करता है।

  • पब्लिक रुझान में तेजी की उम्मीद: विज ने संवाददाताओं से कहा कि यदि ईवी पर टैक्स राहत प्रदान की जाती है, तो इलेक्ट्रिक वाहनों की ओर जनता का झुकाव तेजी से बढ़ेगा।

  • इलेक्ट्रिक बसों की खरीद: इसके साथ ही उन्होंने यह भी घोषणा की कि राज्य सरकार जल्द ही 500 इलेक्ट्रिक बसें खरीदने जा रही है।


हरियाणा सरकार का यह फैसला दिल्ली-एनसीआर में पर्यावरण को स्वच्छ बनाने की दिशा में एक बड़ा नीतिगत बदलाव है। इससे जहां एक तरफ प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों पर रोक लगेगी, वहीं दूसरी तरफ यात्रियों और ड्राइवरों की सुरक्षा व कल्याण के लिए एक मजबूत और पारदर्शी डिजिटल व्यवस्था तैयार होगी।

 

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