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SUV Recall: करोड़ों की SUV में गियरबॉक्स की खामी, पावर फेलियर की अशंका से कंपनी ने बुलाईं कारें; जानें मामला
ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: जागृति
Updated Sun, 22 Feb 2026 12:44 PM IST
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सार
Lexus LX Recall India: अपनी लग्जरी और विश्वसनीयता के लिए मशहूर लेक्सस की धाकड़ एसयूवी एल एक्स 500d के ट्रांसमिशन में बड़ी खामी पाई गई है। कंपनी ने भारत में बेची गई 117 यूनिट्स को फ्री सॉफ्टवेयर अपडेट के लिए वापस बुलाया है। तो क्या इस खराबी से ब्रांड की बुलेटप्रूफ रिलायबिलिटी पर सवाल खड़े हो रहे हैं? जानें इस लेख में....
लेक्सस एलएक्स रिकॉल
- फोटो : lexus india
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विस्तार
भारत में प्रीमियम एसयूवी सेगमेंट में बड़ा नाम मानी जाने वाली Lexus (लेक्सस) की फ्लैगशिप एलएक्स को लेकर रिकॉल जारी किया गया है। यह कदम 6 मार्च 2025 से 29 सितंबर 2025 के बीच निर्मित 117 यूनिट्स के लिए उठाया गया है। रिकॉल की वजह ट्रांसमिशन कंट्रोल सिस्टम से जुड़ी संभावित तकनीकी खामी मानी जा रही है, इसमें कुछ ड्राइविंग परिस्थितियों में पावर लॉस खतरा बन सकता है।
तकनीकी समस्या क्या है?
लेक्सस की फ्लैगशिप एसयूवी एलएक्स में 10-स्पीड ऑटोमैटिक ट्रांसमिशन दिया गया है, जो गियर शिफ्टिंग को नियंत्रित करने के लिए लीनियर सोलेनॉइड्स का इस्तेमाल करता है। रिपोर्ट के मुताबिक, अगर ड्राइविंग के दौरान यह सोलेनॉइड फेल होता है, तो गाड़ी का सॉफ्टवेयर (ECU) इसे पहचान नहीं पाता। इस वजह से ट्रांसमिशन गलत तरीके से काम करने लगता है और गियर ओवर-रेव हो जाते हैं, जो सीधे तौर पर सुरक्षा के लिए खतरा है।
ये भी पढ़े: Recall: नेताओं की पसंदीदा और लग्जरी के लिए मशहूर टोयोटा लैंड क्रूजर हुई रिकॉल, जानें क्या है वजह?
क्या यह ग्लोबल इश्यू है?
यह रिकॉल केवल भारतीय बाजार तक सीमित नहीं है। यह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जारी किए गए रिकॉल में शामिल है। मौजूदा जेनरेशन एलएक्स के डेब्यू के बाद ये चौथा रिकॉल है। ऐसे में, यह स्थिति ब्रांड की विश्वसनीयता की छवि के संदर्भ में चर्चा का विषय बन सकती है, क्योंकि लेक्सस लंबे समय से उच्च गुणवत्ता और भरोसेमंद इंजीनियरिंग के लिए जाना जाता है।
साथ ही इस रिकॉल की सबसे गंभीर बात यह है कि अगर आप हाइवे पर तेज रफ्तार में हैं और यह समस्या आती है, तो गाड़ी की मोटिव पावर (Motive Power) अचानक खत्म हो सकती है। यानी एक्सीलेटर दबाने पर भी गाड़ी रफ्तार नहीं पकड़ेगी, जो पीछे से आने वाले वाहनों के साथ क्रैश का कारण बन सकता है।
भारत में कौन-सा वेरिएंट बिक्री पर है?
भारतीय बाजार में फिलहाल लेक्सस LX 500d वेरिएंट उपलब्ध है। ये मॉडल 3.3-लीटर ट्विन-टर्बोचार्ज्ड वी6 डीजल इंजन से लैस है, जो 304 hp की पावर और 700 एनएम का पीक टॉर्क जनरेट करता है। इंजन को 10-स्पीड ऑटोमैटिक ट्रांसमिशन से जोड़ा गया है, जो स्मूद और हाई-टॉर्क ड्राइविंग अनुभव प्रदान करने के लिए ट्यून किया गया है।
हाई-एंड टेक्नोलॉजी और मैकेनिकल सेटअप
एलएक्स 500d में एडाप्टिव वेरिएबल सस्पेंशन (AVS) दिया गया है, जो सड़क की स्थिति के अनुसार डैम्पिंग को एडजस्ट करता है। इसके साथ फोर व्हील एक्टिव हाइट कंट्रोल सिस्टम मिलता है, जिससे वाहन की ऊंचाई विभिन्न ड्राइविंग मोड्स के अनुसार बदली जा सकती है। मल्टी-टेरेन ड्राइव मोड्स और ऑफ-रोड फोकस्ड चेसिस ट्यूनिंग इसे कठिन रास्तों पर भी सक्षम बनाते हैं। भारत में इसकी शुरुआती एक्स-शोरूम कीमत लगभग ढाई करोड़ है।
ये भी पढ़े: Used EV Cars: क्या सेकंड-हैंड इलेक्ट्रिक कारें पेट्रोल गाड़ियों से ज्यादा भरोसेमंद हैं? रिपोर्ट में बड़ा दावा
ग्राहकों के लिए क्या जरूरी?
लेक्सस इंडिया प्रभावित 117 ग्राहकों से व्यक्तिगत रूप से संपर्क करेगी। समस्या को ठीक करने के लिए किसी फिजिकल पार्ट को बदलने की जरूरत नहीं है; सिर्फ कंट्रोल यूनिट के फर्मवेयर को अपडेट किया जाएगा। लेक्सस मालिकों को सलाह दी जाती है कि वे अपने नजदीकी डीलरशिप से समय रहते संपर्क करें।
ऑटो एक्सपर्ट कहते हैं कि जहां प्रीमियम और लग्जरी सेगमेंट में आधुनिक वाहन अब सॉफ्टवेयर पर निर्भर हो चुके हैं। मल्टी-गियर ऑटोमैटिक ट्रांसमिशन, एडवांस्ड ई सीयू मैपिंग और एडीएएस जैसे सिस्टम जटिल इलेक्ट्रॉनिक आर्किटेक्चर पर आधारित होते हैं। ऐसे में सॉफ्टवेयर अपडेट आधारित रिकॉल अब असामान्य नहीं रह गए हैं। हालांकि, जब बात फ्लैगशिप एसयूवी की हो और कीमत करीब दाे करोड़ रुपये से अधिक हो, तो लगातार रिकॉल ब्रांड की विश्वसनीयता पर प्रभाव डाल सकते हैं।
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तकनीकी समस्या क्या है?
लेक्सस की फ्लैगशिप एसयूवी एलएक्स में 10-स्पीड ऑटोमैटिक ट्रांसमिशन दिया गया है, जो गियर शिफ्टिंग को नियंत्रित करने के लिए लीनियर सोलेनॉइड्स का इस्तेमाल करता है। रिपोर्ट के मुताबिक, अगर ड्राइविंग के दौरान यह सोलेनॉइड फेल होता है, तो गाड़ी का सॉफ्टवेयर (ECU) इसे पहचान नहीं पाता। इस वजह से ट्रांसमिशन गलत तरीके से काम करने लगता है और गियर ओवर-रेव हो जाते हैं, जो सीधे तौर पर सुरक्षा के लिए खतरा है।
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क्या यह ग्लोबल इश्यू है?
यह रिकॉल केवल भारतीय बाजार तक सीमित नहीं है। यह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जारी किए गए रिकॉल में शामिल है। मौजूदा जेनरेशन एलएक्स के डेब्यू के बाद ये चौथा रिकॉल है। ऐसे में, यह स्थिति ब्रांड की विश्वसनीयता की छवि के संदर्भ में चर्चा का विषय बन सकती है, क्योंकि लेक्सस लंबे समय से उच्च गुणवत्ता और भरोसेमंद इंजीनियरिंग के लिए जाना जाता है।
साथ ही इस रिकॉल की सबसे गंभीर बात यह है कि अगर आप हाइवे पर तेज रफ्तार में हैं और यह समस्या आती है, तो गाड़ी की मोटिव पावर (Motive Power) अचानक खत्म हो सकती है। यानी एक्सीलेटर दबाने पर भी गाड़ी रफ्तार नहीं पकड़ेगी, जो पीछे से आने वाले वाहनों के साथ क्रैश का कारण बन सकता है।
भारत में कौन-सा वेरिएंट बिक्री पर है?
भारतीय बाजार में फिलहाल लेक्सस LX 500d वेरिएंट उपलब्ध है। ये मॉडल 3.3-लीटर ट्विन-टर्बोचार्ज्ड वी6 डीजल इंजन से लैस है, जो 304 hp की पावर और 700 एनएम का पीक टॉर्क जनरेट करता है। इंजन को 10-स्पीड ऑटोमैटिक ट्रांसमिशन से जोड़ा गया है, जो स्मूद और हाई-टॉर्क ड्राइविंग अनुभव प्रदान करने के लिए ट्यून किया गया है।
हाई-एंड टेक्नोलॉजी और मैकेनिकल सेटअप
एलएक्स 500d में एडाप्टिव वेरिएबल सस्पेंशन (AVS) दिया गया है, जो सड़क की स्थिति के अनुसार डैम्पिंग को एडजस्ट करता है। इसके साथ फोर व्हील एक्टिव हाइट कंट्रोल सिस्टम मिलता है, जिससे वाहन की ऊंचाई विभिन्न ड्राइविंग मोड्स के अनुसार बदली जा सकती है। मल्टी-टेरेन ड्राइव मोड्स और ऑफ-रोड फोकस्ड चेसिस ट्यूनिंग इसे कठिन रास्तों पर भी सक्षम बनाते हैं। भारत में इसकी शुरुआती एक्स-शोरूम कीमत लगभग ढाई करोड़ है।
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ग्राहकों के लिए क्या जरूरी?
लेक्सस इंडिया प्रभावित 117 ग्राहकों से व्यक्तिगत रूप से संपर्क करेगी। समस्या को ठीक करने के लिए किसी फिजिकल पार्ट को बदलने की जरूरत नहीं है; सिर्फ कंट्रोल यूनिट के फर्मवेयर को अपडेट किया जाएगा। लेक्सस मालिकों को सलाह दी जाती है कि वे अपने नजदीकी डीलरशिप से समय रहते संपर्क करें।
ऑटो एक्सपर्ट कहते हैं कि जहां प्रीमियम और लग्जरी सेगमेंट में आधुनिक वाहन अब सॉफ्टवेयर पर निर्भर हो चुके हैं। मल्टी-गियर ऑटोमैटिक ट्रांसमिशन, एडवांस्ड ई सीयू मैपिंग और एडीएएस जैसे सिस्टम जटिल इलेक्ट्रॉनिक आर्किटेक्चर पर आधारित होते हैं। ऐसे में सॉफ्टवेयर अपडेट आधारित रिकॉल अब असामान्य नहीं रह गए हैं। हालांकि, जब बात फ्लैगशिप एसयूवी की हो और कीमत करीब दाे करोड़ रुपये से अधिक हो, तो लगातार रिकॉल ब्रांड की विश्वसनीयता पर प्रभाव डाल सकते हैं।
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