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Scooter Brakes: कमजोर ब्रेक के साथ चलाना खतरनाक, स्कूटर राइडर्स के लिए जरूरी चेतावनी

ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: अमर शर्मा Updated Sat, 21 Feb 2026 11:06 PM IST
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सार

अगर आपको अचानक पता चले कि आपके ब्रेक ठीक से काम नहीं कर रहे हैं, तो पहला नियम है कि घबराएं नहीं। नए स्कूटर चलाने वालों के लिए यह सबसे आम समस्याओं में से एक है और इसे जल्दी ठीक करना भी सबसे जरूरी है।

Riding With Poor Brakes? How to Fix Weak Scooter Brakes Quickly scooter riding safety tips
Scooter Tips - फोटो : Yamaha
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विस्तार

भारत के भीड़-भाड़ वाले ट्रैफिक जहां कहीं तुरंत ब्रेक लगाना पड़ता है तो कहीं तुरंत एक्सीलेटर लेना पड़ता है। ऐसी ट्रैफिक में स्कूटर के ब्रेक आपकी सबसे बड़ी सुरक्षा होते हैं। अगर ब्रेक लीवर ढीला लगे, स्पॉन्जी महसूस हो या हैंडल के बहुत करीब तक आ जाए। तो यह मामूली खराबी नहीं बल्कि चेतावनी संकेत है। नए राइडर्स में यह समस्या आम है, और इसे जल्दी ठीक करना बेहद जरूरी। अच्छी बात यह है कि हर बार बड़ा रिपेयर नहीं लगता, अक्सर वजह साधारण घिसावट होती है। लेकिन इसे नजरअंदाज करना जोखिम बढ़ा देता है। 
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चलते समय सबसे पहले क्या करें?
अगर अचानक महसूस हो कि ब्रेक ठीक से काम नहीं कर रहे, तो घबराएं नहीं।
  • एक्सीलेरेटर छोड़ें और शांति से सड़क के बाएं हिस्से की ओर रोकें।
  • अगर दूसरा ब्रेक ठीक है, तो उसे हल्के-हल्के इस्तेमाल करें (ज्यादातर स्कूटर्स में फ्रंट और रियर ब्रेक अलग होते हैं)।
  • डिस्क ब्रेक में कभी-कभी लीवर को तेजी से 2-3 बार पंप करने से अस्थायी प्रेशर बन जाता है। इतना कि आप नजदीकी मैकेनिक तक कम स्पीड में पहुंच सकें।
  • स्पीड 20 किमी प्रति घंटा से नीचे रखें और इंडिकेटर प्रति हॉर्न से आसपास के वाहनों को संकेत दें।
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सड़क किनारे कौन-सा आसान तरीका खुद से अपनाया जा सकता है?
अगर आपके पास बेसिक टूलकिट है (जो हर कम्यूटर के पास होनी चाहिए), तो रियर ब्रेक टाइट करना पांच मिनट का काम है।
  • रियर व्हील के पास ब्रेक केबल का एडजस्टर नट मिलेगा। इसे क्लॉकवाइज घुमाने से ब्रेक टाइट होता है।
  • एडजस्ट करने के बाद पहिया घुमाकर देखें, लगातार रगड़ तो नहीं रहा।
  • लीवर में थोड़ा-सा फ्री-प्ले रहना चाहिए, तभी ब्रेक सही से काम करता है।
  • एक और त्वरित एडजस्टमेंट ब्रेक लीवर के पास बैरेल एडजस्टर से हो जाता है। इससे केबल टेंशन बढ़ती है और फील तुरंत बेहतर होती है।

कब DIY नहीं, मैकेनिक जरूरी है?
अगर एडजस्टर पूरी तरह टाइट हो चुका है और फिर भी ब्रेक कमजोर हैं, तो मामला गंभीर है।
  • ड्रम ब्रेक में ब्रेक शूज या डिस्क ब्रेक में ब्रेक पैड्स घिस चुके हो सकते हैं, तो इन्हें बदलना पड़ेगा।
  • फ्रंट डिस्क ब्रेक में स्पॉन्जी लीवर अक्सर लो ब्रेक फ्लूइड या ब्रेक लाइन में हवा का संकेत होता है। इसे ब्रेक ब्लीडिंग कहते हैं- यह काम प्रशिक्षित मैकेनिक से ही कराएं।
  • अगर लीवर बिल्कुल ढीला है और कोई रेसिस्टेंस नहीं, तो ब्रेक केबल टूट सकती है। ऐसी हालत में स्कूटर नहीं चलाएं।

भारतीय परिस्थितियों में यह समस्या इतनी आम क्यों है?
धूल, पानी, भारी इस्तेमाल और ट्रैफिक में बार-बार ब्रेकिंग से ब्रेक पार्ट्स तेजी से घिसते हैं। रोजाना ऑफिस या डिलीवरी के लिए इस्तेमाल होने वाले स्कूटर्स में हर 1,000-2,000 किमी पर ब्रेक एडजस्टमेंट जरूरी हो जाता है। इसके शुरुआती संकेत हैं, जैसे चींचीं की आवाज, कम बाइट या लीवर ट्रैवल बढ़ना, इसे नजरअंदाज करने से बाद में खर्च बढ़ता है।
 

रोकथाम आसान और सस्ती कैसे रखें?
रूटीन सर्विस सबसे बड़ा सेफ्टी और रीसेल-वैल्यू बूस्टर है। सर्विस के दौरान-
  • ब्रेक प्ले एडजस्ट होता है
  • लाइनर्स/पैड्स चेक होते हैं
  • ब्रेक फ्लूइड टॉप-अप होता है
  • केबल्स लुब्रिकेट होती हैं
ये छोटे-छोटे चेक कम खर्च में राइडिंग कॉन्फिडेंस को बहुत बढ़ा देते हैं।

आखिर याद रखने वाली बात क्या है?
स्कूटर की दुनिया में परफॉर्मेंस का मतलब स्पीड नहीं, कंट्रोल है। सही काम करता ब्रेक भीड़भाड़ वाली सड़कों, अचानक रुकते ट्रैफिक और बारिश में वही कंट्रोल देता है। इसलिए जब अगली बार ब्रेक लीवर थोड़ा ज्यादा चलने लगे, तो इसे वीकेंड तक टालें नहीं। आज का दो-मिनट का एडजस्टमेंट, कल का बड़ा हादसा रोक सकता है।
खासतौर पर नए राइडर्स के लिए, मजबूत ब्रेक लक्जरी नहीं, जरूरी सुरक्षा उपकरण हैं। 

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