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Paddle Shifter: ऑटोमैटिक कार में मैनुअल फील चाहिए? जानें पैडल शिफ्टर क्या हैं और कैसे काम करते हैं?

ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: अमर शर्मा Updated Sat, 21 Feb 2026 08:33 PM IST
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सार

आपने शायद पैडल शिफ्टर को मॉडर्न कारों में स्टीयरिंग व्हील के पीछे देखा होगा और सोचा होगा - ‘ये कैसे काम करते हैं और आप असल में रेगुलर ड्राइविंग से इन्हें इस्तेमाल करने पर कैसे स्विच करते हैं?’

Want Manual Control in Automatic Car? What Are Paddle Shifters and How to Use Them in Automatic Cars
Car Steering - फोटो : Freepik
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विस्तार

भारतीय सड़कों पर ड्राइविंग का आनंद क्लच और गियर लीवर वाली कारों से जुड़ा रहा है। लेकिन जैसे-जैसे ऑटोमैटिक कारें आम और एडवांस होती जा रही हैं, पैडल शिफ्टर्स वो फीचर बनकर उभरा है, जो ड्राइविंग पसंद करने वालों और रोजमर्रा के यूजर्स, दोनों का ध्यान खींच रहा है। अक्सर लोग स्टीयरिंग के पीछे लगे इन छोटे लीवरों को देखकर सोचते हैं कि ये काम कैसे करते हैं। और इन्हें इस्तेमाल कैसे किया जाए?

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पैडल शिफ्टर क्या होते हैं?
सबसे पहले यह जानते हैं कि आखिर पैडल शिफ्टर क्या होते हैं। पैडल शिफ्टर स्टीयरिंग व्हील के पीछे लगे छोटे लीवर होते हैं, जिनसे आप ऑटोमैटिक या CVT कार में हाथ स्टीयरिंग से हटाए बिना मैन्युअली गियर बदल सकते हैं। 

इन पर आमतौर पर "+" (अपशिफ्ट) और "–" (डाउनशिफ्ट) लिखा होता है। ये आपको एक्सेलेरेशन और इंजन ब्रेकिंग पर ज्यादा कंट्रोल देते हैं। इनसे ओवरटेक आसान होता है और ड्राइविंग में स्पोर्टी फील आती है, जबकि ऑटोमैटिक की सुविधा बनी रहती है।

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'D' से मैन्युअल फील तक कैसे जाएं?
पैडल शिफ्टर वाली कार में प्रक्रिया बेहद आसान है।

  • गियर सेलेक्टर को ड्राइव (D), स्पोर्ट (S) या मैन्युअल (M) मोड में रखें (जो आपकी कार में उपलब्ध हो)।

  • स्टीयरिंग के पीछे लगे किसी एक पैडल को खींचें।

दायां पैडल (+) गियर ऊपर ले जाता है- हाईवे पर स्मूद क्रूजिंग और बेहतर माइलेज के लिए।
बायां पैडल (–) गियर नीचे करता है- ओवरटेक, चढ़ाई या इंजन ब्रेकिंग के लिए ज्यादा पावर देता है।

जैसे ही आप पैडल खींचते हैं, इंस्ट्रूमेंट क्लस्टर पर M1, M2, M3 जैसे संकेत दिखते हैं- यानी कार मैन्युअल कंट्रोल में है।

पैडल शिफ्टर किस-किस तरह से काम करते हैं?
ज्यादातर कारों में दो तरीके मिलते हैं:

1) अस्थायी मैन्युअल मोड
आप सामान्य ऑटोमैटिक में ड्राइव कर रहे हों और बस एक पैडल टैप करें- कुछ सेकंड के लिए मैन्युअल कंट्रोल मिल जाता है। ओवरटेक के लिए बढ़िया। पैडल छोड़ते ही कार अपने-आप ऑटोमैटिक मोड में लौट आती है।

2) फुल मैन्युअल मोड
गियर लीवर को स्पोर्ट/मैन्युअल में डालें। अब कार आपके इनपुट्स फॉलो करती है और गियर ज्यादा देर तक होल्ड करती है- ड्राइविंग ज्यादा एंगेजिंग हो जाती है। फिर भी सिस्टम इंजन को ओवर-रेव या स्टॉल होने से बचाता है। 

वापस ऑटोमैटिक में कैसे आएं?
या तो दायां पैडल कुछ सेकंड दबाए रखें, या गियर लीवर को फिर से ड्राइव (D) में ले जाएं।

पैडल शिफ्टर इस्तेमाल करने का फायदा क्या है?
शुरुआती ड्राइवर्स के लिए सबसे बड़ा फायदा है कंट्रोल।

  • मोड़ से पहले डाउनशिफ्ट

  • चढ़ाई पर सही गियर होल्ड

  • माइलेज के लिए जल्दी अपशिफ्ट

यह सब स्टीयरिंग से हाथ हटाए बिना। यानी मैन्युअल जैसी भागीदारी, ऑटोमैटिक जैसी सहूलियत।

क्या मैन्युअल कार में पैडल शिफ्टर लगाए जा सकते हैं?
यहीं हकीकत सामने आती है। पारंपरिक मैन्युअल गियरबॉक्स पूरी तरह मैकेनिकल होता है, जबकि पैडल शिफ्टर के लिए इलेक्ट्रॉनिक कंट्रोल, क्लच ऑपरेशन और सॉफ्टवेयर चाहिए।
मैन्युअल कार को पैडल-शिफ्ट सेटअप में बदलने के लिए रोबोटिक एक्ट्यूएटर्स, अलग कंट्रोल यूनिट, नई वायरिंग और जटिल प्रोग्रामिंग चाहिए। जिसका खर्च अक्सर लाखों में जाता है और कार की कीमत से भी ज्यादा हो सकता है।

एक व्यावहारिक विकल्प है उसी मॉडल के ऊंचे वेरिएंट का ऑटोमैटिक/डीसीटी ट्रांसमिशन स्वैप, लेकिन इसके लिए भारत में आरटीओ अप्रूवल और बड़े मॉडिफिकेशन चाहिए।

एक विकल्प iMT भी होता है, जिसमें क्लच पैडल नहीं रहता लेकिन गियर लीवर रहता है। हालांकि इसमें पैडल शिफ्टर नहीं होते।

तो आखिर क्या करना चाहिए?
अगर आपको पैडल शिफ्टर चाहिए, तो फैक्ट्री-फिटेड पैडल शिफ्टर वाली कार खरीदना ही सबसे समझदारी और किफायती रास्ता है।

आखिर पैडल शिफ्टर क्यों खास हैं?
पैडल शिफ्टर दिखाते हैं कि आधुनिक कारें कैसे परफॉर्मेंस और कंवीनियंस को साथ ला रही हैं। नए ड्राइवर्स के लिए ये मैन्युअल कंट्रोल का आसान कदम हैं, ट्रैफिक में क्लच की झंझट बिना। और एक बार सही समय पर डाउनशिफ्ट के लिए पैडल टैप करने की आदत लग जाए, तो समझ आएगा कि यह फीचर रेसिंग-कारों से निकलकर भारतीय सड़कों की रोजमर्रा की कारों तक क्यों पहुंच गया है। 

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